सीतामढ़ी में HIV विस्फोट? समिति ने बताया, यह है 20 साल पुराना डेटा

सीतामढ़ी में HIV के 7,000 से अधिक मरीजों के 'वायरल' दावे को बिहार एड्स नियंत्रण समिति (BSACS) ने भ्रामक बताया है। समिति ने स्पष्ट किया कि यह संख्या 20 सालों का कुल डेटा है, वर्तमान में केवल 4,958 मरीज ही नियमित दवा ले रहे हैं।

BNT
By
3 Min Read

BNT Desk: बिहार के सीतामढ़ी जिले से हाल ही में एचआईवी पॉजिटिव मरीजों की संख्या को लेकर कई मीडिया रिपोर्ट्स में डरावने दावे किए गए थे। रिपोर्ट्स में कहा गया था कि जिले में 7,000 से ज्यादा एचआईवी मरीज हैं और तो और, हर रोज़ 40 से 60 नए मरीज मिल रहे हैं! इन ‘वायरल’ आंकड़ों ने स्वास्थ्य विभाग से लेकर आम लोगों तक में हड़कंप मचा दिया था। लेकिन अब, इन परेशान करने वाले आंकड़ों का सच सामने आ गया है। बिहार राज्य एड्स नियंत्रण समिति (BSACS) ने इन सभी दावों को गलत और भ्रम फैलाने वाला बताया है। समिति ने साफ कर दिया है कि ये आंकड़े ज़मीनी हकीकत से पूरी तरह अलग हैं।

कितने हैं असलियत में मरीज? जानिए सही संख्या

एड्स नियंत्रण समिति ने सीतामढ़ी की वर्तमान स्थिति को स्पष्ट करते हुए सही आंकड़े बताए हैं। समिति के अनुसार, साल 2025-26 में अक्टूबर महीने तक जिले में केवल 200 नए मरीज ही सामने आए हैं। फिलहाल, जिले के एंटी रेट्रो वायरल थेरैपी (ART) केंद्र में 4,958 मरीज ही हैं, जो नियमित रूप से दवा ले रहे हैं। जो लोग यह कह रहे हैं कि 6,900 से ज्यादा मरीज अभी हैं, वह पूरी तरह से तथ्यों से परे है।

20 साल का पुराना डेटा हो रहा था वायरल

समिति ने बताया कि सीतामढ़ी में एचआईवी जांच केंद्र (ICTC) की शुरुआत 2005 में हुई थी और ART केंद्र 2012 में स्थापित हुआ था। साल 2005 से लेकर अब तक, यानी पिछले 20 सालों में, कुल मिलाकर लगभग 6,900 मरीजों का रजिस्ट्रेशन हुआ है। ध्यान देने वाली बात यह है कि यह संख्या 20 साल का कुल डेटा है। इनमें से कई मरीजों की मौत हो चुकी है, जबकि कई दूसरे ज़िलों या शहरों में इलाज के लिए स्थानांतरित हो चुके हैं। यानी, 6900 मरीज अभी भी सक्रिय नहीं हैं।

बच्चों का इलाज और जिम्मेदार रिपोर्टिंग की अपील

समिति ने ‘हर दिन मरीजों की संख्या बढ़ने’ के दावे को भी भ्रामक बताया है। समिति के अनुसार, अस्पतालों में रोज़ाना पुराने रजिस्टर्ड मरीज ही अपनी दवा लेने या रूटीन चेकअप के लिए आते हैं। बच्चों में संक्रमण के मामले में समिति ने बताया कि अब तक केवल 188 बच्चे संक्रमित पाए गए हैं और उनका नियमित इलाज चल रहा है। इन्हें आर्थिक सहायता भी दी जा रही है। एड्स नियंत्रण समिति ने मीडिया से अपील की है कि यह एक संवेदनशील विषय है और तथ्यहीन खबरें समाज में अनावश्यक डर और भ्रम पैदा करती हैं। इसलिए, किसी भी खबर को चलाने से पहले विश्वसनीय आंकड़ों की पुष्टि ज़रूर करें।

Share This Article