109 साल बाद राजभवन का नाम बदला—क्या बदल रही है बिहार की पहचान?

बिहार का 109 साल पुराना राजभवन अब नया नाम ‘बिहार लोक भवन’ बन गया है। यह बदलाव केंद्र सरकार के उस निर्देश के बाद किया गया है, जिसमें सभी राजभवनों का नाम बदलने की बात कही गई थी। इस निर्णय पर शिक्षाविदों की मिली-जुली प्रतिक्रिया सामने आई है।

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BNT, Patna: बिहार राजभवन, जो 109 साल पुराना है, अब “बिहार लोक भवन” नाम से जाना जाएगा। यह नया नाम सोमवार से औपचारिक रूप से लागू हो गया है। इस संबंध में अधिसूचना राज्यपाल सचिवालय की ओर से जारी की गई। आदेश के अनुसार अब सभी आधिकारिक दस्तावेजों, बोर्डों और नामपट्टों पर “राजभवन, बिहार” की जगह “बिहार लोक भवन” लिखा जाएगा। पुराने नाम वाले सभी बोर्ड अब हटाए जाएंगे।

गृह मंत्रालय, भारत सरकार ने 25 नवंबर 2025 को एक पत्र भेजकर देशभर में यह बदलाव लागू करने का निर्देश दिया था। मंत्रालय का उद्देश्य “राज” शब्द से जुड़ी पुरानी औपनिवेशिक छवि को खत्म करना और संस्थानों को अधिक जनता-केंद्रित बनाना है। केंद्र सरकार ने निर्देश दिया है कि राज्य के राजभवन को लोक भवन तथा केंद्र शासित प्रदेशों के राज निवास को लोक निवास कहा जाए। कई राज्यों में यह परिवर्तन पहले ही लागू किया जा चुका है।

बिहार राजभवन का इतिहास काफी पुराना है। वर्ष 1913 में वायसराय लॉर्ड हार्डिंग ने इसके निर्माण की आधारशिला रखी थी। न्यूजीलैंड के आर्किटेक्ट जे. एफ. मन्निंग्स को नई सरकारी इमारतों को डिजाइन करने की जिम्मेदारी दी गई थी। 3 फरवरी 1916 को राजभवन, पुराना सचिवालय और पटना हाईकोर्ट का उद्घाटन लॉर्ड हार्डिंग ने स्वयं किया था।

इस फैसले को लेकर शिक्षाविदों में अलग-अलग प्रतिक्रियाएँ सामने आई हैं।

बिहार इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक फाइनेंस एंड पॉलिसी के प्रोफेसर सुधांशु कुमार ने कहा कि नया नाम अधिक लोकतांत्रिक और जनता से जुड़ा हुआ है। उनके अनुसार नाम किसी संस्था की पहचान और उद्देश्य को दर्शाता है और यह बदलाव प्रशासन को जनता की सेवा की दिशा में आगे ले जाने का संकेत है।

वहीं पटना कॉलेज के पूर्व प्राचार्य नवल किशोर चौधरी ने इसे एक राजनीतिक कदम करार दिया। उन्होंने कहा कि इससे आम लोगों के जीवन में कोई वास्तविक सुधार नहीं होगा, और सवाल उठाया कि क्या आगे चलकर ‘राज्यपाल’ को भी ‘लोकपाल’ कहा जाएगा?

पटना विश्वविद्यालय की राजनीति विज्ञान विभाग की पूर्व प्रमुख शेफाली रॉय ने कहा कि यह कदम जनता का ध्यान असली समस्याओं से हटाने के लिए उठाया गया है। उन्होंने इसे “लोकप्रियता पाने की कोशिश” बताया।

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