प्रोटेम स्पीकर ने विनय बिहारी को कविता पढ़ने से रोका, अनंत सिंह अनुपस्थित

शपथ ग्रहण समारोह में भाषाई और सांस्कृतिक विविधता दिखाई दी। जीवेश मिश्र ने संस्कृत में शपथ ली, वहीं विनय बिहारी को कविता पढ़ने पर प्रोटेम स्पीकर ने रोक दिया। मोकामा के विधायक अनंत सिंह अनुपस्थित रहे और शपथ नहीं ले सके। समारोह में अनुशासन और परंपरा का पालन हुआ।

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BTN, Desk: बिहार विधानसभा के शीतकालीन सत्र का दूसरा दिन राजनीतिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण रहा। आज शपथ ग्रहण के दौरान सदन में एक रोचक और अनुशासन से जुड़ी घटना देखने को मिली। बीजेपी विधायक विनय बिहारी शपथ लेने से पहले भोजपुरी में कविता पढ़ने लगे जिसके बाद प्रोटेम स्पीकर ने उन्हें रोकते हुए कहा कि नियमों के अनुसार सिर्फ शपथ ली जा सकती है, कविता पढ़ने की अनुमति नहीं है। इसके बाद विनय बिहारी ने नियमों का पालन किया और शपथ प्रक्रिया सामान्य रूप से जारी रही।

इसी दौरान जीवेश कुमार मिश्र ने संस्कृत भाषा में शपथ ली, जिससे सदन में भाषा की विविधता और सांस्कृतिक विरासत का एहसास हुआ। केदारनाथ सिंह ने भी नियमों के अनुसार शपथ ग्रहण किया।कुछ विधायक आज अनुपस्थित रहे। मोकामा के जदयू विधायक अनंत सिंह, जो इस समय जेल में हैं, शपथ लेने के लिए नहीं आ सके। अमरेंद्र पांडेय भी सत्र में मौजूद नहीं रहे, इसलिए उनकी शपथ प्रक्रिया आज पूरी नहीं हो पाई।

सदन में एक बड़ा और सकारात्मक पल तब आया जब बीजेपी नेता प्रेम कुमार को विधानसभा का नया अध्यक्ष चुना गया। खास बात यह रही कि उन्हें एकमत (सर्वसम्मति) से चुना गया, यानी सत्ता पक्ष के साथ-साथ विपक्ष ने भी उनके नाम का समर्थन किया। राजद विधायक राहुल कुमार ने सार्वजनिक तौर पर कहा कि वे भी प्रेम कुमार के समर्थन में हैं। इसके बाद प्रेम कुमार निर्विरोध अध्यक्ष चुने गए और सदन में तालियों की गड़गड़ाहट गूँज उठी।

 

इस सत्र की एक बड़ी खासियत यह भी है कि इस बार 100 से ज्यादा नए सदस्य विधानसभा में आए हैं, जिनके लिए आगे चलकर विशेष प्रशिक्षण और कार्यशालाओं का आयोजन किया जाएगा ताकि वे सदन की कार्यप्रणाली को बेहतर तरीके से समझ सकें।

कुल मिलाकर, शीतकालीन सत्र का दूसरा दिन शांति, अनुशासन, भाषा की विविधता और राजनीतिक एकता का प्रतीक बनकर दर्ज हुआ। यह दिन बिहार की लोकतांत्रिक परंपरा को मजबूत करने वाला साबित हुआ।

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