बिहार: रक्सौल में पाकिस्तानी एजेंटों से जुड़े नेटवर्क का खुलासा, दो युवक गिरफ्तार; WhatsApp OTP भेजने का आरोप

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BNT Desk: बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के रक्सौल में कथित साइबर जासूसी नेटवर्क से जुड़े मामले में दो युवकों को गिरफ्तार किया गया है। आरोप है कि दोनों भारतीय मोबाइल नंबरों पर WhatsApp अकाउंट सक्रिय कराने के लिए जरूरी ओटीपी (OTP) पाकिस्तानी हैंडलर्स तक पहुंचाते थे। इसके बदले उन्हें पैसे दिए जाने की बात भी जांच में सामने आई है। पुलिस ने आरोपियों के पास से दो मोबाइल फोन बरामद किए हैं।

यह कार्रवाई भारत-नेपाल सीमा के पास स्थित रक्सौल में की गई है। मामले की जांच आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा में चल रहे एक प्रकरण से जुड़ी बताई गई है। जांच के दौरान मिले डिजिटल इनपुट के आधार पर पुलिस को रक्सौल के कुछ लोगों की गतिविधियों पर संदेह हुआ था। इसके बाद विजयवाड़ा पुलिस ने स्थानीय पुलिस से संपर्क किया और संयुक्त कार्रवाई की गई।

पुलिस का कहना है कि मोबाइल फोन की शुरुआती जांच में कथित तौर पर ओटीपी साझा करने और इसके बदले भुगतान किए जाने से जुड़े डिजिटल साक्ष्य मिले हैं। हालांकि, इन खातों का इस्तेमाल वास्तव में किन गतिविधियों में हुआ, नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं और आरोपों की पूरी कड़ी क्या है, इन सभी पहलुओं की जांच अभी महत्वपूर्ण है।

 

आदित्य पांडेय और राजा कुमार की हुई गिरफ्तारी

गिरफ्तार युवकों की पहचान आदित्य पांडेय और राजा कुमार के रूप में हुई है। आदित्य पांडेय पूर्वी चंपारण जिले के रक्सौल स्थित नागा रोड का निवासी बताया गया है। वहीं, राजा कुमार मूल रूप से मधुबनी जिले के हरलाखी थाना क्षेत्र का रहने वाला है। रिपोर्टों के अनुसार, वह रक्सौल के नोनियाडीह इलाके में रह रहा था।

पुलिस ने दोनों आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की और उनके मोबाइल फोन की तलाशी ली। तलाशी के दौरान दो मोबाइल फोन बरामद किए गए। जांच एजेंसियों को इन उपकरणों में कथित तौर पर ओटीपी से जुड़े डिजिटल रिकॉर्ड और पैसे के लेन-देन से संबंधित जानकारी मिलने की बात कही गई है। <

पुलिस के मुताबिक, यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि दोनों आरोपी कितने समय से इस गतिविधि में शामिल थे और उनके संपर्क में कौन-कौन लोग थे। जांच का एक अहम पहलू यह भी है कि संबंधित मोबाइल नंबरों पर बनाए गए WhatsApp अकाउंट किसके नियंत्रण में थे और उनका इस्तेमाल किन उद्देश्यों के लिए किया जा रहा था।

 

विजयवाड़ा पुलिस से मिले इनपुट के बाद शुरू हुई जांच

मिली जानकारी के अनुसार, 25 अक्टूबर 2026 को आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा की पुलिस एक मामले की जांच के सिलसिले में रक्सौल पहुंची। इस दौरान स्थानीय स्तर पर कुछ लोगों की संदिग्ध गतिविधियों के बारे में जानकारी साझा की गई। आरोप था कि भारतीय मोबाइल नंबरों पर WhatsApp अकाउंट बनाने और उन्हें सक्रिय करने के लिए जरूरी ओटीपी विदेश में बैठे कथित हैंडलर्स तक पहुंचाए जा रहे थे।

इनपुट मिलने के बाद रक्सौल पुलिस और विजयवाड़ा पुलिस ने संयुक्त रूप से कार्रवाई की। कुछ रिपोर्टों के मुताबिक, जांच के दौरान बिहार एसटीएफ और जिला आसूचना इकाई की टीम भी शामिल थी। पुलिस ने रक्सौल के विभिन्न इलाकों में छापेमारी की और कई युवक-युवतियों से पूछताछ की। शुरुआती पूछताछ और जांच के बाद दो युवकों को गिरफ्तार किया गया।

जांच एजेंसियां अब इस बात का पता लगाने में जुटी हैं कि भारतीय मोबाइल नंबरों और उनसे जुड़े WhatsApp अकाउंट की जानकारी कथित तौर पर किस माध्यम से दूसरे लोगों तक पहुंचाई जा रही थी। साथ ही, यह भी जांच की जा रही है कि आरोपियों को भुगतान सीधे किया जाता था या इसके लिए किसी अन्य व्यक्ति अथवा डिजिटल भुगतान खाते का इस्तेमाल किया गया।

 

ऑनलाइन गेम के जरिए संपर्क होने की बात भी आई सामने

इस मामले से जुड़ी एक मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ऑनलाइन गेम खेलने के दौरान राजा कुमार की एक पाकिस्तानी लड़की से WhatsApp के माध्यम से दोस्ती हुई थी। रिपोर्ट के अनुसार, ओटीपी उपलब्ध कराने के बदले करीब 10 हजार रुपये देने का लालच दिए जाने की बात भी पूछताछ में सामने आई। हालांकि, इस दावे और संपर्क के पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र पुष्टि जांच के आधिकारिक निष्कर्षों से ही हो सकेगी।

जांच एजेंसियां यह समझने की कोशिश कर रही हैं कि कथित संपर्क केवल व्यक्तिगत बातचीत तक सीमित था या इसके पीछे संगठित नेटवर्क काम कर रहा था। यदि कई भारतीय मोबाइल नंबरों के ओटीपी एक ही तरीके से साझा किए गए हैं, तो इससे जुड़े अन्य लोगों और खातों की पहचान करना भी जांच का हिस्सा हो सकता है।

 

WhatsApp OTP का गलत इस्तेमाल क्यों गंभीर है?

WhatsApp अकाउंट को सक्रिय करने के लिए मोबाइल नंबर पर एक ओटीपी भेजा जाता है। यह कोड अकाउंट के सत्यापन की प्रक्रिया का हिस्सा होता है। यदि कोई व्यक्ति अपना ओटीपी किसी अनजान व्यक्ति के साथ साझा कर देता है, तो संबंधित व्यक्ति उस नंबर से जुड़ा अकाउंट सक्रिय करने की कोशिश कर सकता है। इससे अकाउंट के नियंत्रण, पहचान के दुरुपयोग और दूसरे लोगों से संपर्क करने जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं।

इस मामले में पुलिस को आशंका है कि भारतीय मोबाइल नंबरों से जुड़े WhatsApp अकाउंट का इस्तेमाल भारत-विरोधी गतिविधियों या जासूसी के लिए किया जा सकता था। हालांकि, किसी अकाउंट को सक्रिय कराने के लिए ओटीपी साझा करने का आरोप और उस अकाउंट का वास्तव में जासूसी में इस्तेमाल होना दो अलग-अलग बातें हैं। जांच एजेंसियों को यह पता लगाना होगा कि बनाए गए खातों का इस्तेमाल किस तरह किया गया और क्या किसी संवेदनशील गतिविधि से उनका संबंध स्थापित होता है।

 

जांच एजेंसियां नेटवर्क की अन्य कड़ियों की तलाश में

दोनों युवकों की गिरफ्तारी के बाद जांच का दायरा उनके मोबाइल फोन और संपर्कों तक सीमित नहीं है। एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि कथित नेटवर्क में और कितने लोग शामिल हो सकते हैं, भारतीय मोबाइल नंबर कहां से जुटाए गए और ओटीपी किसके पास पहुंचाए जाते थे। भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड की जांच भी इस मामले में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

आंध्र प्रदेश पुलिस की ओर से मामले में आगे की कार्रवाई किए जाने की जानकारी सामने आई है। 28 अक्टूबर की रिपोर्टों के अनुसार, दोनों आरोपियों को विजयवाड़ा की अदालत में पेश किए जाने और न्यायिक हिरासत में भेजे जाने की बात भी कही गई है।

फिलहाल मामले में जांच जारी है। आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी। जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह पता लगाना है कि कथित तौर पर साझा किए गए ओटीपी से कितने WhatsApp अकाउंट सक्रिय हुए, उनका इस्तेमाल किसने किया और इस पूरी गतिविधि के पीछे कोई बड़ा नेटवर्क काम कर रहा था या नहीं।

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