BNT Desk: बिहार विधान परिषद की शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों की आठ सीटों के लिए मंगलवार, 27 अक्टूबर को मतगणना शुरू हो गई। राज्य में निर्धारित मतगणना केंद्रों पर सुबह 8 बजे से वोटों की गिनती की प्रक्रिया शुरू की गई। शुरुआत में मतपत्रों की बंडलिंग का काम किया जा रहा है। इसके बाद निर्धारित चुनावी नियमों के अनुसार मतपत्रों की जांच और गिनती की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। मतगणना के दौरान प्रत्याशियों, उनके समर्थकों और राजनीतिक दलों की नजर परिणामों पर टिकी हुई है।
इस चुनाव में चार शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों और चार स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों की सीटें शामिल हैं। मतगणना के लिए राज्य में आठ केंद्र बनाए गए हैं। पटना के अलावा मुजफ्फरपुर, दरभंगा, पूर्णिया और छपरा में अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों के लिए मतगणना की व्यवस्था की गई है। निर्वाचन आयोग ने मतगणना के दौरान निर्धारित प्रक्रिया का पालन करने और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के इंतजाम किए हैं।
पहले मतपत्रों की बंडलिंग, फिर होगी वोटों की गिनती
मतगणना केंद्रों पर सुबह से ही चुनावी गतिविधियां तेज हैं। हालांकि, मतगणना शुरू होने का मतलब यह नहीं है कि सभी सीटों के शुरुआती रुझान तुरंत सामने आ जाएंगे। सबसे पहले मतपत्रों को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार व्यवस्थित किया जाता है। इसके बाद उनकी जांच और गिनती के अलग-अलग चरण पूरे किए जाते हैं।
मतगणना की शुरुआती प्रक्रिया में मतपत्रों की बंडलिंग महत्वपूर्ण होती है। मतपत्रों को व्यवस्थित करने के बाद उनकी वैधता और निर्धारित नियमों के अनुरूप जांच की जाती है। किसी मतपत्र को वैध या अवैध मानने का फैसला संबंधित चुनावी नियमों के आधार पर किया जाता है। इस प्रक्रिया में सावधानी बरतना जरूरी है, क्योंकि मतपत्रों की स्थिति का असर आगे की गिनती पर पड़ सकता है।
बिहार विधान परिषद के शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के चुनाव में मतपत्रों के जरिए मतदान हुआ है। इसलिए इन सीटों की मतगणना सामान्य रूप से ईवीएम से होने वाली विधानसभा या लोकसभा चुनाव की गिनती से अलग होती है। मतपत्रों की जांच और मतों की गणना के विभिन्न चरणों के कारण इसमें समय लग सकता है।
शिक्षक सीटों के रुझान शाम तक आने की उम्मीद
मतगणना के दौरान सबसे बड़ा सवाल यह है कि शुरुआती रुझान कब सामने आएंगे। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, निर्वाचन आयोग के पदाधिकारी ने उम्मीद जताई है कि शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में रुझान शाम तक आने शुरू हो सकते हैं। हालांकि, यह शुरुआती अनुमान है। वास्तविक समय मतगणना की गति और प्रक्रिया पूरी होने पर निर्भर करेगा।
शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में मतपत्रों की गिनती के बाद ही प्रत्याशियों की स्थिति स्पष्ट होने लगेगी। शुरुआती रुझान से यह अंदाजा लग सकता है कि कौन-सा प्रत्याशी आगे चल रहा है, लेकिन अंतिम परिणाम घोषित होने तक किसी को विजेता मानना सही नहीं होगा।
प्रत्याशियों और उनके समर्थकों के लिए शुरुआती रुझान अहम होंगे। इससे चुनावी मुकाबले की दिशा का पता चल सकता है। हालांकि, मतगणना के शुरुआती चरण में सामने आने वाले आंकड़ों और अंतिम नतीजों के बीच अंतर भी हो सकता है। इसलिए अंतिम घोषणा का इंतजार करना जरूरी होगा।
स्नातक सीटों के परिणाम में लग सकता है अधिक समय
स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों की मतगणना में शिक्षक सीटों की तुलना में अधिक समय लगने की संभावना जताई गई है। इसका कारण मतपत्रों की संख्या और गिनती की प्रक्रिया है। स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में मतदाताओं की संख्या शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की तुलना में काफी अधिक रही है। ऐसे में मतपत्रों की जांच और गिनती के चरणों को पूरा करने में अतिरिक्त समय लग सकता है।
बिहार विधान परिषद की आठ सीटों के चुनाव में कुल 5.32 लाख से अधिक मतदाताओं के लिए व्यवस्था की गई थी। इनमें स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के मतदाताओं की संख्या शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों से काफी अधिक थी। इसी वजह से दोनों श्रेणियों की मतगणना में लगने वाले समय में अंतर हो सकता है।
स्नातक सीटों पर परिणाम आने का समय इस बात पर भी निर्भर करेगा कि मतपत्रों की जांच कितनी तेजी से पूरी होती है और आगे की गणना में कितना समय लगता है। इसलिए इन सीटों के परिणाम के लिए लोगों को अधिक इंतजार करना पड़ सकता है। जब तक सभी आवश्यक चरण पूरे नहीं हो जाते, तब तक अंतिम नतीजे की घोषणा नहीं की जा सकती।
CCTV कैमरों को लेकर उठे सवाल पर आयोग की सफाई
मतगणना केंद्रों पर निगरानी व्यवस्था को लेकर भी विवाद सामने आया है। पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से राजद प्रत्याशी डॉ. संजीव कुमार सिंह ने मतगणना हॉल के अंदर सीसीटीवी कैमरे नहीं दिखने का सवाल उठाया था। उन्होंने इस मामले में पटना प्रमंडलीय आयुक्त को पत्र लिखकर निगरानी व्यवस्था स्पष्ट करने और आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की थी।
अब इस मुद्दे पर राज्य निर्वाचन आयोग के पदाधिकारी की ओर से सफाई दी गई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पदाधिकारी ने कहा कि एमएलसी चुनाव के मतगणना केंद्र के अंदर सीसीटीवी कैमरे लगाने का कोई प्रावधान नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि कैमरों को लेकर सवाल उठाने वालों को नियमों और व्यवस्था के बारे में स्पष्ट किया गया है।
इस सफाई के बाद विवाद का मुख्य मुद्दा यह है कि मतगणना की निगरानी किन निर्धारित व्यवस्थाओं के तहत की जा रही है। राजद प्रत्याशी ने जहां हॉल में कैमरे नहीं होने पर चिंता जताई थी, वहीं आयोग के पदाधिकारी ने कहा है कि अंदर सीसीटीवी लगाने का प्रावधान नहीं है। दोनों पक्षों की बातों को ध्यान में रखते हुए यह स्पष्ट करना जरूरी है कि कैमरों की अनुपस्थिति का आरोप अपने आप में मतगणना में गड़बड़ी का प्रमाण नहीं है।
उम्मीदवारों के एजेंट मौजूद, वीडियोग्राफी से निगरानी
निर्वाचन आयोग के पदाधिकारी के मुताबिक, मतगणना केंद्रों के अंदर प्रत्येक उम्मीदवार के अधिकृत एजेंट मौजूद रहते हैं। इससे उम्मीदवारों के प्रतिनिधियों को मतगणना की प्रक्रिया पर नजर रखने का अवसर मिलता है। इसके अतिरिक्त मतगणना केंद्र पर वीडियोग्राफी भी कराई जा रही है। वीडियोग्राफी का उद्देश्य मतगणना प्रक्रिया का रिकॉर्ड रखना और निर्धारित नियमों के अनुसार निगरानी में मदद करना है। मतगणना के दौरान एजेंटों की मौजूदगी भी महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि वे प्रक्रिया को देख सकते हैं और लागू नियमों के तहत किसी आपत्ति या संदेह की स्थिति में संबंधित अधिकारियों के सामने अपना पक्ष रख सकते हैं। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया है कि मतगणना निर्धारित नियमों के तहत कराई जा रही है और सुरक्षा के आवश्यक इंतजाम किए गए हैं। हालांकि, निगरानी व्यवस्था के संबंध में उठे सवालों का अंतिम आकलन संबंधित नियमों, उपलब्ध रिकॉर्ड और प्रशासनिक स्पष्टीकरण के आधार पर ही किया जा सकता है।
आठ सीटों के नतीजों पर टिकी राजनीतिक दलों की नजर
बिहार विधान परिषद की इन आठ सीटों के नतीजे राजनीतिक दलों और प्रत्याशियों के लिए महत्वपूर्ण हैं। चुनाव में शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के मतदाताओं ने अपने प्रतिनिधि चुनने के लिए मतदान किया था। अब मतगणना के बाद यह स्पष्ट होगा कि किन उम्मीदवारों को विधान परिषद पहुंचने का मौका मिलता है। 23 अक्टूबर को हुए मतदान में शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान प्रतिशत स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों की तुलना में अधिक रहा था। अंतिम आंकड़ों के अनुसार, शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में 82.85 प्रतिशत और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में 53.42 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया था। अब सभी की निगाहें मतगणना की प्रगति पर हैं। बंडलिंग और जांच की प्रक्रिया पूरी होने के बाद वोटों की गिनती आगे बढ़ेगी। शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में शाम तक शुरुआती रुझान आने की उम्मीद जताई गई है, जबकि स्नातक सीटों के परिणाम में अधिक समय लग सकता है। फिलहाल, मतगणना केंद्रों पर प्रक्रिया जारी है और किसी भी सीट के अंतिम नतीजे को लेकर आधिकारिक घोषणा का इंतजार करना होगा। जैसे-जैसे मतगणना के चरण पूरे होंगे, उम्मीदवारों की स्थिति साफ होती जाएगी। इसके बाद ही पता चलेगा कि आठ सीटों में किस प्रत्याशी को जीत मिली और किसे हार का सामना करना पड़ा।