जन सुराज के डिजिटल मैनेजर देवपालिक गुप्ता का शव मिला, रांची से पटना आने के दौरान ट्रेन से हुए थे लापता

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BNT Desk: जन सुराज पार्टी के डिजिटल कम्युनिकेशन मैनेजर देवपालिक गुप्ता की मौत की खबर सामने आई है। सोमवार, 26 अक्टूबर को रांची से पटना आने के दौरान जनशताब्दी एक्सप्रेस से लापता हुए देवपालिक का शव झारखंड के मुरी इलाके के जंगल से बरामद किए जाने की जानकारी जन सुराज की ओर से दी गई है। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता कुमार सौरव सिंह के मुताबिक, शव मिलने के बाद पुलिस मामले की जांच में जुटी है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि देवपालिक की मौत किन परिस्थितियों में हुई और वह चलती ट्रेन से कैसे लापता हुए थे।

उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले देवपालिक गुप्ता जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर की टीम से जुड़े थे। वह पार्टी में डिजिटल कम्युनिकेशन मैनेजर की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। उनके लापता होने के बाद पार्टी के नेताओं और सहयोगियों ने सोशल मीडिया के जरिए पुलिस तथा प्रशासन से मदद मांगी थी। अब शव मिलने की खबर के बाद घटना को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, मौत की वजह और घटनाक्रम को लेकर पुलिस की जांच के नतीजों का इंतजार है।

 

मुरी के जंगल से बरामद हुआ शव

जन सुराज के राष्ट्रीय प्रवक्ता कुमार सौरव सिंह के अनुसार, देवपालिक गुप्ता का शव झारखंड के मुरी इलाके के जंगल से बरामद हुआ है। जन सुराज संघर्ष वाहिनी के बिहार अध्यक्ष ने भी सोशल मीडिया पर पोस्ट कर उनके निधन की जानकारी दी। इसके बाद पार्टी से जुड़े लोगों और उनके परिचितों के बीच शोक का माहौल है। फिलहाल पुलिस की ओर से मौत के कारण को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। यह भी साफ नहीं हुआ है कि देवपालिक ट्रेन से किस परिस्थिति में गायब हुए और मुरी के जंगल तक कैसे पहुंचे। इन सवालों का जवाब जांच, घटनास्थल से जुटाए गए साक्ष्यों और अन्य उपलब्ध जानकारी के आधार पर ही मिल सकेगा। शव मिलने के बाद जांच का एक अहम पहलू यह होगा कि देवपालिक के ट्रेन से लापता होने और जंगल में शव मिलने के बीच क्या संबंध है। पुलिस को इस दौरान की गतिविधियों और संभावित घटनाक्रम की कड़ियां जोड़नी होंगी। फिलहाल किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।

 

26 अक्टूबर को रांची से पटना के लिए निकले थे

जानकारी के मुताबिक, देवपालिक गुप्ता सोमवार, 26 अक्टूबर को अपने दो साथियों के साथ रांची से पटना आने के लिए जनशताब्दी एक्सप्रेस में सवार हुए थे। यह ट्रेन संख्या 12366 बताई गई है। उनके साथ यात्रा कर रहे दोस्तों के अनुसार, ट्रेन में उनकी सीट कोच C-2 में 50 नंबर पर थी। साथियों के मुताबिक, ट्रेन दोपहर करीब 2:25 बजे रांची स्टेशन से रवाना हुई थी। कुछ देर बाद देवपालिक ने बताया कि वह खाना लेने के लिए पैंट्री कार की ओर जा रहे हैं। इसके बाद वह अपनी सीट पर वापस नहीं लौटे। शुरुआत में साथियों को लगा कि वह किसी काम से गए होंगे, लेकिन काफी समय बीतने के बाद भी उनका पता नहीं चला। जब दोस्तों ने उनकी तलाश शुरू की, तो वह पैंट्री कार में भी नहीं मिले। इसके बाद ट्रेन के दूसरे डिब्बों में भी खोजबीन की गई। पूरी ट्रेन में तलाश करने के बावजूद देवपालिक का कोई सुराग नहीं मिला। उनका मोबाइल फोन भी बंद आ रहा था, जिससे साथियों की चिंता बढ़ गई।

 

मुरी जंक्शन पर भी की गई तलाश

साथियों ने ट्रेन में तलाश के दौरान टीटी और रेलवे सुरक्षा बल (RPF) के जवानों की मदद लेने की बात कही है। ट्रेन के मुरी जंक्शन पहुंचने पर भी देवपालिक की खोजबीन की गई। इसके बावजूद उनका पता नहीं चला। मुरी जंक्शन पर रेलवे सुरक्षा बल के निरीक्षक संजीव सिंह ने पहले मीडिया को बताया था कि स्टेशन के सीसीटीवी फुटेज की जांच की जा रही है। उन्होंने यह भी कहा था कि शुरुआती जानकारी के मुताबिक देवपालिक रांची के बाद ट्रेन के पहले ठहराव मुरी स्टेशन पर ट्रेन से नहीं उतरे थे। उस समय स्थानीय पुलिस और RPF की संयुक्त टीम उनकी तलाश में जुटी थी। अब शव मिलने के बाद जांच में यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि ट्रेन से लापता होने के बाद उनके साथ क्या हुआ। सीसीटीवी फुटेज, यात्रा से जुड़ी जानकारी और अन्य उपलब्ध साक्ष्य इस मामले में महत्वपूर्ण हो सकते हैं। हालांकि, जांच एजेंसियों की ओर से इन पहलुओं पर अंतिम जानकारी सामने आने का इंतजार है।

 

FIR दर्ज कराने में देरी का साथियों ने लगाया आरोप

देवपालिक के साथ यात्रा कर रहे साथियों ने शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनके अनुसार, ट्रेन आगे बढ़ने के बाद करीब 4:30 बजे बोकारो पहुंची, जहां रेल मदद के माध्यम से शिकायत करने की कोशिश की गई। साथियों का आरोप है कि उस समय उन्हें अपेक्षित सहायता नहीं मिली और मामला RPF तथा राजकीय रेलवे पुलिस (GRP) के बीच उलझता रहा।

उनका कहना है कि बोकारो GRP में जाने पर उन्हें बताया गया कि मामला मुरी से जुड़ा है और वहां शिकायत करनी चाहिए। इसके बाद साथी मुरी पहुंचे, लेकिन वहां उन्हें रांची में मामला दर्ज कराने की बात कही गई। साथियों के अनुसार, घटना दोपहर करीब 3 बजे हुई थी, जबकि FIR रात लगभग 9 बजे दर्ज की गई।

इस तरह, साथियों ने शिकायत दर्ज होने में करीब छह घंटे लगने का दावा किया है। उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि पुलिस ने रात में तलाश करने की बात कही, लेकिन उस दौरान प्रभावी खोजबीन नहीं की गई। ये आरोप देवपालिक के साथियों की ओर से लगाए गए हैं। इनकी स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित पुलिस अधिकारियों का पक्ष सामने आना अभी बाकी है।

 

सोशल मीडिया पर मदद की अपील की गई थी

देवपालिक के लापता होने की खबर सामने आने के बाद जन सुराज के नेताओं ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के जरिए मदद मांगी थी। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता कुमार सौरव सिंह ने झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, रांची के उपायुक्त और पुलिस अधिकारियों को टैग करते हुए मामले में तत्काल हस्तक्षेप की अपील की थी।

पार्टी की ओर से झारखंड पुलिस और रांची जिला प्रशासन से भी देवपालिक का पता लगाने में मदद करने का अनुरोध किया गया था। उनके सहयोगियों ने भी सोशल मीडिया पर उनकी तस्वीर और यात्रा से जुड़ी जानकारी साझा की थी, ताकि उनके बारे में कोई सूचना मिलने पर संबंधित लोगों तक पहुंचाई जा सके।

अब शव बरामद होने की जानकारी के बाद मामले की प्रकृति और घटनाक्रम को लेकर जांच और महत्वपूर्ण हो गई है। पुलिस के सामने यह स्पष्ट करने की चुनौती है कि देवपालिक किस परिस्थिति में लापता हुए और उनकी मौत कैसे हुई।

 

IIMC से पढ़ाई, जन सुराज की डिजिटल टीम में थे शामिल

देवपालिक गुप्ता दिल्ली स्थित भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) के पूर्व छात्र थे। वह जन सुराज पार्टी की डिजिटल कम्युनिकेशन टीम में काम कर रहे थे और पार्टी के संदेशों तथा गतिविधियों को डिजिटल माध्यमों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी संभालते थे। जन सुराज के कार्यक्रमों और राजनीतिक गतिविधियों के प्रचार-प्रसार में डिजिटल कम्युनिकेशन की अहम भूमिका रहती है। देवपालिक इसी काम से जुड़े हुए थे। रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने बांकीपुर उपचुनाव के दौरान भी पार्टी के लिए काम किया था। उनकी तस्वीरें पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर और बिहार अध्यक्ष मनोज भारती के साथ भी सामने आई हैं। उनके साथ काम करने वाले लोगों के लिए यह खबर दुखद है। हालांकि, उनकी मौत को लेकर किसी भी तरह की अटकल लगाने के बजाय जांच के निष्कर्षों का इंतजार करना जरूरी है।

 

मौत की वजह और लापता होने की परिस्थितियां अब भी स्पष्ट नहीं

देवपालिक गुप्ता का शव मिलने के बाद सबसे बड़ा सवाल उनकी मौत की वजह को लेकर है। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि उनकी मौत दुर्घटना में हुई, किसी अन्य परिस्थिति में हुई या इसके पीछे कोई और कारण है। पुलिस की जांच से ही इन सवालों का जवाब मिलने की उम्मीद है। जांच में ट्रेन से लापता होने का समय, मुरी जंक्शन के आसपास की गतिविधियां, सीसीटीवी फुटेज और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की अहम भूमिका हो सकती है। साथियों की ओर से शिकायत दर्ज कराने में देरी के आरोपों की भी संबंधित अधिकारियों के बयान और रिकॉर्ड के आधार पर पड़ताल की जा सकती है। फिलहाल जन सुराज की ओर से शव मिलने की जानकारी दी गई है, लेकिन मौत के कारण और पूरे घटनाक्रम पर विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने आना बाकी है। पुलिस जांच पूरी होने और संबंधित अधिकारियों की ओर से तथ्य साझा किए जाने के बाद ही इस मामले की वास्तविक परिस्थितियां स्पष्ट हो सकेंगी।

 

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