बिहार: नालंदा में उत्पाद विभाग के सिपाही अजीत की मौत पर सवाल, तस्करों की नहीं अपने ही जवान की राइफल से चली थी गोली!

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BNT Desk: बिहार के नालंदा में उत्पाद विभाग के सिपाही अजीत की मौत ने विभागीय कार्रवाई और घटनास्थल पर मौजूद कर्मियों की भूमिका को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शुरुआती जानकारी में बताया गया था कि शराब तस्करों की फायरिंग में सिपाही अजीत को गोली लगी थी। हालांकि, बाद में सामने आई जानकारी के मुताबिक, गोली शराब तस्करों की ओर से नहीं, बल्कि कथित तौर पर उत्पाद विभाग की टीम में शामिल एक होमगार्ड जवान की राइफल से चली थी। इस घटनाक्रम ने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया है।

घटना के समय टीम का नेतृत्व महिला दारोगा पुष्पा कुमारी कर रही थीं। मामले में उन्हें और दो जवानों को हिरासत में लिए जाने की जानकारी सामने आई है। गोली चलाने के आरोपी होमगार्ड जवान समेत संबंधित कर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज किए जाने और कानूनी कार्रवाई की बात भी कही जा रही है। हालांकि, घटना की परिस्थितियों, संबंधित कर्मियों की भूमिका और शुरुआती सूचना में अंतर को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

 

शराब तस्करों की फायरिंग की कहानी पर उठे सवाल

जानकारी के मुताबिक, गुरुवार को उत्पाद विभाग की टीम शराब की खेप लेकर जा रहे एक वाहन का पीछा कर रही थी। इसी दौरान सिपाही अजीत को गोली लग गई। घटना के तुरंत बाद सामने आई जानकारी में दावा किया गया कि शराब तस्करों की फायरिंग में अजीत घायल हुए हैं। उस समय मामला शराब तस्करी के खिलाफ कार्रवाई के दौरान हुई गोलीबारी का लग रहा था।

लेकिन बाद में जांच के दौरान गोली चलने की परिस्थितियों को लेकर अलग जानकारी सामने आई। बताया गया कि अजीत को गोली टीम में शामिल एक होमगार्ड जवान की राइफल से लगी थी। यदि जांच में यह तथ्य प्रमाणित होता है, तो यह पता लगाना जरूरी होगा कि गोली किन परिस्थितियों में चली और घटना के समय टीम के सदस्य कहां मौजूद थे। इस मामले में कई सवालों के जवाब तलाशे जा रहे हैं। क्या वाहन का पीछा करने के दौरान अफरातफरी मची थी? क्या गोली गलती से चली या इसके पीछे कोई दूसरी परिस्थिति थी? घटना के समय टीम के अन्य सदस्यों ने क्या देखा? इन सभी पहलुओं की जांच जरूरी है, ताकि सिपाही की मौत की वास्तविक वजह स्पष्ट हो सके।

 

पावापुरी से पटना रेफर, इलाज के दौरान मौत

गोली लगने के बाद सिपाही अजीत को इलाज के लिए पावापुरी मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था। उनकी हालत गंभीर होने के कारण डॉक्टरों ने उन्हें पटना रेफर कर दिया। पटना में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

अजीत की मौत से विभाग में शोक का माहौल है। वहीं, घटना की परिस्थितियों को लेकर उठ रहे सवालों ने मामले को गंभीर बना दिया है। ड्यूटी के दौरान किसी जवान की जान जाना अपने आप में दुखद है, लेकिन यदि जांच में यह सामने आता है कि गोली अपनी ही टीम के किसी सदस्य की राइफल से चली थी, तो सुरक्षा व्यवस्था और हथियारों के इस्तेमाल से जुड़े नियमों की भी पड़ताल करनी होगी। जांच एजेंसियों के सामने यह स्पष्ट करना महत्वपूर्ण है कि गोली चलने के समय क्या स्थिति थी, घायल जवान को तत्काल किस तरह की मदद दी गई और घटनास्थल पर मौजूद कर्मियों ने आगे क्या कार्रवाई की।

 

घटना के बाद दी गई सूचना भी जांच के दायरे में

इस मामले में घटना के बाद अधिकारियों और पुलिस को दी गई सूचना को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। सामने आई जानकारी के अनुसार, टीम के नालंदा से बाहर निकलने के बाद फोन पर सूचना दी गई कि अजीत शराब तस्करों की फायरिंग में घायल हुए हैं। इसके बाद पुलिस ने मामले की पड़ताल शुरू की। अब जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि शुरुआती सूचना घटना की वास्तविक परिस्थितियों के अनुरूप थी या नहीं। यदि शुरुआती जानकारी और बाद में सामने आए तथ्यों में अंतर मिलता है, तो उसका कारण स्पष्ट करना भी जरूरी होगा।

क्या घटना को लेकर कोई गलतफहमी हुई थी? क्या जानकारी देने में लापरवाही बरती गई? या फिर किसी ने जानबूझकर वास्तविक परिस्थितियों को छिपाने की कोशिश की? फिलहाल इन सवालों का जवाब उपलब्ध तथ्यों और जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही दिया जा सकता है। बिना जांच पूरी हुए किसी अधिकारी या जवान को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा।

 

SIT कर रही जांच, झारखंड तक जुड़ रहे तार

मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष जांच टीम यानी एसआईटी गठित किए जाने की जानकारी सामने आई है। जांच टीम शराब की खेप लेकर जा रहे वाहन और उससे जुड़े लोगों की पहचान करने में जुटी है। इस सिलसिले में जांच टीम के झारखंड जाने की भी जानकारी सामने आई है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि शराब कहां से लाई जा रही थी, उसे कहां पहुंचाया जाना था और इस कारोबार से कौन-कौन लोग जुड़े हुए थे। शराब तस्करी के संभावित नेटवर्क की पड़ताल के साथ-साथ सिपाही अजीत की मौत से जुड़े घटनाक्रम की भी जांच की जा रही है। जांच में वाहन की पहचान, शराब की खेप के स्रोत और तस्करी से जुड़े लोगों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। इसके अलावा, टीम के सदस्यों के बयान और घटना के बाद दी गई सूचना का मिलान करके भी घटनाक्रम को समझने की कोशिश की जाएगी।

 

विभागीय कार्रवाई और जवाबदेही पर उठे सवाल

सिपाही अजीत की मौत का मामला केवल शराब तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान तक सीमित नहीं है। इसने सरकारी टीमों के ऑपरेशन के दौरान सुरक्षा नियमों के पालन और जवाबदेही को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। यदि गोली टीम के ही किसी सदस्य की राइफल से चली थी, तो यह जांचना जरूरी होगा कि हथियार का इस्तेमाल किन परिस्थितियों में हुआ और क्या निर्धारित सुरक्षा प्रक्रियाओं का पालन किया गया था। इसी तरह, घटना के बाद अधिकारियों को दी गई सूचना में किसी प्रकार की विसंगति पाए जाने पर उसकी वजह भी स्पष्ट करनी होगी। फिलहाल महिला दारोगा पुष्पा कुमारी समेत तीन लोगों को हिरासत में लिए जाने की जानकारी के बाद मामले की जांच पर सबकी निगाहें टिकी हैं। हिरासत में लिया जाना अपने आप में किसी व्यक्ति का दोष साबित नहीं करता। अंतिम जिम्मेदारी जांच में सामने आने वाले साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर तय होगी।

 

अजीत की मौत की असली वजह सामने आना जरूरी

सिपाही अजीत की मौत ने कई ऐसे सवाल खड़े किए हैं, जिनका जवाब मिलना जरूरी है। गोली किस परिस्थिति में चली? घटना के समय टीम के सदस्यों की भूमिका क्या थी? शुरुआती सूचना में शराब तस्करों की फायरिंग का जिक्र क्यों किया गया? और क्या घटना के बाद अधिकारियों को पूरी तथा सही जानकारी दी गई थी? इन सवालों का जवाब मिलने से न केवल अजीत की मौत के घटनाक्रम की तस्वीर स्पष्ट होगी, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए जरूरी कदम उठाने में भी मदद मिलेगी। अब SIT की जांच और पुलिस की आगे की कार्रवाई पर सबकी नजर है। जांच में सामने आने वाले तथ्य ही यह स्पष्ट कर पाएंगे कि अजीत की मौत के लिए कौन-सी परिस्थितियां जिम्मेदार थीं और घटना के बाद दी गई शुरुआती जानकारी में अंतर क्यों आया।

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