BNT Desk: पटना के खासपुर निवासी अमरनाथ राय के 24 वर्षीय पुत्र आशुतोष कुमार के गंगा नदी में डूबने के पांच दिन बाद भी उसका शव बरामद नहीं हो सका है। लगातार तलाश के बावजूद जब आशुतोष का कोई सुराग नहीं मिला तो शुक्रवार को परिवार ने बेहद भावुक माहौल में उसके पुतले का दाह-संस्कार किया। इस दौरान पूरे गांव में मातम पसरा रहा। परिजनों की आंखों से आंसू थम नहीं रहे थे। सबसे भावुक दृश्य उस समय देखने को मिला, जब आशुतोष की मां बेटे के पुतले को अंतिम विदाई देते हुए फूट-फूटकर रोने लगीं। परिवार के लिए यह पल बेहद पीड़ादायक था, क्योंकि जिस बेटे के सकुशल लौटने की उम्मीद में वे कई दिनों से नदी किनारे तलाश कर रहे थे, उसका शव तक उन्हें नहीं मिल सका।
जिउतिया पर बेटे की लंबी उम्र के लिए रखा था व्रत
आशुतोष की मां अपने बेटे की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए जिउतिया पर्व पर निर्जला व्रत रखती थीं। परिवार के लोगों के अनुसार, मां को इस बात की उम्मीद थी कि उनका बेटा सुरक्षित वापस घर लौटेगा। लेकिन कई दिनों की तलाश के बाद भी जब आशुतोष नहीं मिला तो परिवार ने शुक्रवार को उसके पुतले का अंतिम संस्कार करने का फैसला लिया। पुतले के अंतिम संस्कार के दौरान मां की चीख-पुकार से वहां मौजूद ग्रामीण भी भावुक हो गए। परिवार और आसपास के लोगों के बीच शोक का माहौल रहा। किसी को भी विश्वास नहीं हो रहा था कि जिस युवक ने अपने दोस्तों की जान बचाने के लिए अपनी जान जोखिम में डाल दी, उसका शव तक परिवार को नहीं मिल पाया।
दोस्तों को बचाने के लिए गहरे पानी में कूदा था आशुतोष
परिजनों के मुताबिक, 27 सितंबर की दोपहर आशुतोष अपने दोस्तों अरविंद, रंजन और प्रिंस के साथ गांव के सामने छितनावां में गंगा नदी में स्नान करने गया था। स्नान के दौरान अचानक तीन युवक डूबने लगे। उन्हें मुश्किल में देखकर आशुतोष उन्हें बचाने के लिए गंगा में कूद पड़ा। बताया गया कि आशुतोष ने डूब रहे तीनों दोस्तों को बचा लिया। हालांकि, इसी दौरान वह खुद नदी के गहरे पानी में चला गया। गंगा में तेज धार होने के कारण वह पानी में बह गया और इसके बाद उसका कोई पता नहीं चल सका।
घटना के बाद शुरू हुई तलाश
आशुतोष के नदी में लापता होने की सूचना मिलते ही परिवार के लोग मौके पर पहुंचे। इसके बाद स्थानीय लोगों और SDRF की टीम की मदद से गंगा नदी में खोज अभियान शुरू किया गया। नदी में संभावित स्थानों पर कई घंटे तक तलाश की गई। आसपास के इलाकों में भी लोगों ने आशुतोष की खोज की, लेकिन पांच दिन बीतने के बाद भी उसका शव नहीं मिल पाया। परिवार के लोग लगातार इस उम्मीद में नदी के आसपास मौजूद रहे कि शायद किसी स्थान पर आशुतोष का पता चल जाए। लेकिन हर गुजरते दिन के साथ उनकी चिंता और बढ़ती गई। शव नहीं मिलने के कारण परिवार को यह भी स्पष्ट नहीं हो पा रहा था कि बेटे के साथ वास्तव में क्या हुआ।
शव नहीं मिलने से परिवार गहरे सदमे में
आशुतोष के लापता होने के बाद से उसके परिवार की स्थिति बेहद खराब है। परिजनों का कहना है कि जवान बेटे के अचानक लापता होने की घटना ने पूरे परिवार को तोड़ दिया है। मां कई दिनों से बेटे के गम में ठीक से खाना-पीना भी नहीं कर रही हैं। परिवार के लोगों के अनुसार, वह लगातार गंगा किनारे बैठी रहती हैं और बेटे के वापस आने की उम्मीद लगाए रहती हैं। उनका मानना है कि गंगा मैया किसी न किसी तरह उनके बेटे को उनके पास वापस जरूर लाएंगी।
छह दिन से नदी किनारे बेटे का इंतजार
आशुतोष के लापता होने के बाद उसकी मां का अधिकांश समय नदी किनारे ही बीत रहा है। वह आने-जाने वाले लोगों से भी बेटे के बारे में पूछती रहती हैं। परिवार के लोग भी लगातार आशुतोष के शव की तलाश में जुटे रहे। हालांकि, कई दिनों तक चले खोज अभियान के बावजूद कोई सफलता नहीं मिली। शुक्रवार को पुतले का दाह-संस्कार करना परिवार के लिए बेहद कठिन फैसला था। परिजनों ने बताया कि बेटे का वास्तविक शव नहीं मिलने के कारण वे उसे अंतिम विदाई भी नहीं दे पा रहे थे। इसी वजह से धार्मिक रीति-रिवाज के अनुसार पुतला तैयार कर उसका अंतिम संस्कार किया गया।
गांव में पसरा मातम
आशुतोष के पुतले के अंतिम संस्कार के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण और परिचित मौजूद रहे। सभी ने परिवार को सांत्वना दी। ग्रामीणों के बीच भी घटना को लेकर दुख का माहौल है। लोगों का कहना है कि आशुतोष ने अपने दोस्तों को बचाने के लिए साहस दिखाया, लेकिन दुर्भाग्य से खुद गंगा की तेज धार में लापता हो गया। परिवार को अब भी उम्मीद है कि आशुतोष के बारे में कोई जानकारी मिल सकती है। वहीं, नदी में शव की तलाश को लेकर भी परिजन और ग्रामीण लगातार प्रयास कर रहे हैं। जवान बेटे के गंगा में लापता होने और शव नहीं मिलने की वजह से परिवार के लिए यह समय बेहद कठिन बना हुआ है।