BNT Desk: वाराणसी-रांची-कोलकाता इकोनॉमिक कॉरिडोर का करीब 33.5 किलोमीटर हिस्सा बिहार के गया जिले से होकर गुजरेगा। इस महत्वपूर्ण सड़क परियोजना के पूरा होने से बिहार की कनेक्टिविटी उत्तर प्रदेश, झारखंड और पश्चिम बंगाल से बेहतर होने की उम्मीद है। गया जिले में आने वाले इस हिस्से के निर्माण का करीब 28.2% काम पूरा हो चुका है। परियोजना को 30 जून 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
गया जिले से होकर गुजरेगा 33.5 किमी का हिस्सा
वाराणसी-रांची-कोलकाता इकोनॉमिक कॉरिडोर की कुल लंबाई करीब 800 किलोमीटर है। यह कॉरिडोर पूर्वी भारत के कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों को सड़क नेटवर्क से जोड़ने के उद्देश्य से विकसित किया जा रहा है। बिहार में इसका एक महत्वपूर्ण हिस्सा गया जिले से होकर गुजर रहा है। रोड कंस्ट्रक्शन डिपार्टमेंट के सचिव पंकज कुमार पाल के अनुसार, गया में करीब 33.5 किलोमीटर लंबे हिस्से का निर्माण परियोजना के पैकेज-7 के तहत किया जा रहा है। यह सड़क डुमरिया प्रखंड के अनिरबंसलिया गांव से शुरू होकर इमामगंज प्रखंड के संग्रामपुर तक जाएगी। इस मार्ग के तैयार होने के बाद गया जिले के इन क्षेत्रों में सड़क संपर्क को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।
1,248.37 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत
गया जिले में बनाए जा रहे इस पैकेज की अनुमानित लागत करीब 1,248.37 करोड़ रुपये है। परियोजना के तहत आधुनिक सड़क का निर्माण किया जा रहा है, जिसका इस्तेमाल स्थानीय यातायात के साथ-साथ लंबी दूरी के वाहनों और माल परिवहन के लिए भी किया जा सकेगा। विभाग के अनुसार, निर्माण कार्य 1 जुलाई 2025 को शुरू हुआ था। इसके लिए 30 जून 2027 की निर्धारित पूर्णता तिथि रखी गई है। परियोजना की प्रगति रिपोर्ट के अनुसार, अब तक करीब 28.2% भौतिक काम पूरा हो चुका है।
2027 तक पूरा करने का लक्ष्य
निर्माण कार्य को निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। परियोजना पूरी होने के बाद गया जिले से होकर गुजरने वाला यह मार्ग इकोनॉमिक कॉरिडोर के बड़े नेटवर्क का हिस्सा बन जाएगा। करीब 33.5 किलोमीटर के इस हिस्से में सड़क निर्माण के साथ आवश्यक संरचनात्मक और यातायात सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इसके तैयार होने के बाद क्षेत्र के लोगों को बेहतर और आधुनिक सड़क संपर्क मिलने की संभावना है।
चार राज्यों के बीच मजबूत होगी कनेक्टिविटी
वाराणसी-रांची-कोलकाता इकोनॉमिक कॉरिडोर का उद्देश्य उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल के बीच सड़क संपर्क को मजबूत करना है। करीब 800 किलोमीटर लंबा यह कॉरिडोर इन राज्यों के कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों को आपस में जोड़ने में भूमिका निभाएगा। गया में बनने वाला हिस्सा भी इसी नेटवर्क का महत्वपूर्ण भाग है। इसके चालू होने के बाद उत्तर प्रदेश से बिहार होते हुए झारखंड और पश्चिम बंगाल की ओर जाने वाले वाहनों को बेहतर सड़क मार्ग उपलब्ध हो सकता है।
भारी वाहनों और माल परिवहन को मिलेगा नया मार्ग
इकोनॉमिक कॉरिडोर का एक प्रमुख उद्देश्य माल और वाणिज्यिक वाहनों के आवागमन को सुगम बनाना है। नए और बेहतर सड़क नेटवर्क से भारी वाहनों के लिए यात्रा अधिक व्यवस्थित होने की उम्मीद है। गया से होकर गुजरने वाला नया मार्ग भी माल परिवहन के लिए उपयोगी हो सकता है। इससे अलग-अलग राज्यों के बीच सामान की आवाजाही को सुविधाजनक बनाने और परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने में मदद मिलने की संभावना है।
यात्रा का समय कम होने की उम्मीद
करीब 800 किलोमीटर लंबे इस आर्थिक कॉरिडोर के विकसित होने के बाद जुड़े हुए प्रमुख स्थानों के बीच यात्रा के समय में कमी आने की उम्मीद है। हालांकि, किसी विशेष रूट पर वास्तविक समय की बचत सड़क के अंतिम स्वरूप, यातायात की स्थिति और परिचालन व्यवस्था पर निर्भर करेगी। गया जिले के आसपास के इलाकों को भी इस परियोजना से बेहतर सड़क संपर्क मिलने की संभावना है। इससे स्थानीय लोगों के साथ व्यापारिक और वाणिज्यिक गतिविधियों को भी सड़क नेटवर्क का फायदा मिल सकता है।
क्षेत्रीय विकास में भी मदद की उम्मीद
सड़क कनेक्टिविटी में सुधार का असर केवल लंबी दूरी के यातायात तक सीमित नहीं रहेगा। नए मार्ग से गया जिले के आसपास के क्षेत्रों तक पहुंच आसान होने की संभावना है। बेहतर सड़क संपर्क से बाजारों, व्यापारिक केंद्रों और परिवहन नेटवर्क के बीच आवाजाही को सुविधा मिल सकती है। विशेष रूप से डुमरिया और इमामगंज क्षेत्र से होकर गुजरने वाले इस मार्ग से स्थानीय कनेक्टिविटी में बदलाव आने की उम्मीद है। परियोजना पूरी होने के बाद इसके वास्तविक प्रभाव का आकलन यातायात शुरू होने के बाद किया जा सकेगा।
जून 2027 तक पूरा होगा प्रोजेक्ट
फिलहाल परियोजना का निर्माण कार्य जारी है और करीब 28.2% काम पूरा होने की जानकारी दी गई है। निर्माण विभाग ने 30 जून 2027 तक इसे पूरा करने की समय सीमा निर्धारित की है। वाराणसी-रांची-कोलकाता इकोनॉमिक कॉरिडोर के तहत गया में बन रहा 33.5 किलोमीटर का यह हिस्सा बिहार को पड़ोसी राज्यों से जोड़ने वाले सड़क नेटवर्क को विस्तार देगा। परियोजना पूरी होने के बाद उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल के बीच सड़क और माल परिवहन कनेक्टिविटी को एक अतिरिक्त मार्ग मिलने की उम्मीद है।