BNT Desk: बिहार और झारखंड के बीच रेल कनेक्टिविटी को मजबूत करने वाली विक्रमशिला-कटारिया रेल परियोजना ने एक और महत्वपूर्ण चरण में प्रवेश कर लिया है। रेलवे ने करीब 33 किलोमीटर लंबी नई रेल लाइन के निर्माण के लिए ₹1,163 करोड़ से अधिक का ई-टेंडर जारी किया है। इस परियोजना के पूरा होने के बाद नवगछिया और विक्रमशिला के बीच रेल संपर्क मजबूत होने की उम्मीद है। नई रेल लाइन से बिहार के कोसी और सीमांचल क्षेत्र को झारखंड के संताल परगना इलाके से जोड़ने में मदद मिल सकती है। इससे इन क्षेत्रों के बीच आने-जाने वाले यात्रियों को एक अतिरिक्त रेल मार्ग उपलब्ध होगा। परियोजना का असर धार्मिक पर्यटन पर भी पड़ने की उम्मीद है, खासकर देवघर जाने वाले यात्रियों के लिए।
33 किलोमीटर लंबी नई रेल लाइन का होगा निर्माण
रेलवे की ओर से जारी टेंडर के तहत करीब 33 किलोमीटर लंबी नई रेलवे लाइन का निर्माण किया जाना है। यह परियोजना नवगछिया क्षेत्र को विक्रमशिला से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। नई रेल लाइन को मौजूदा रेलवे नेटवर्क से जोड़ने के लिए कई जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर भी विकसित किए जाएंगे। इसके जरिए उत्तर और दक्षिण बिहार के संबंधित इलाकों के बीच रेल संपर्क को एक नया विकल्प मिल सकेगा। परियोजना पूरी होने के बाद यात्री बिहार के कोसी-सीमांचल क्षेत्र से झारखंड के संताल परगना इलाके की ओर जाने के लिए इस नए रेल मार्ग का इस्तेमाल कर सकेंगे। हालांकि, यात्रा के समय में कितनी कमी आएगी, यह अंतिम रूट, ट्रेनों की संख्या और परिचालन व्यवस्था तय होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
गंगा नदी पर बनेगा नया रेलवे पुल
विक्रमशिला-कटारिया परियोजना का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा गंगा नदी पर प्रस्तावित रेलवे पुल है। यह पुल बटेश्वरस्थान के पास बनाए जाने की योजना है। इसके निर्माण से नवगछिया की तरफ से विक्रमशिला की ओर सीधा रेल संपर्क स्थापित करने में मदद मिलेगी। गंगा पर रेलवे पुल बनने से इस इलाके में रेल नेटवर्क का विस्तार होगा। अभी नदी के दोनों किनारों के बीच आवागमन के लिए अलग-अलग मार्गों पर निर्भरता रहती है। नई रेल परियोजना के तहत बनने वाला पुल दोनों क्षेत्रों को रेलवे नेटवर्क से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
शिवनारायणपुर और कटारिया Y-लिंक से जुड़ेगा नेटवर्क
नई रेल लाइन को मौजूदा रेलवे नेटवर्क से जोड़ने के लिए शिवनारायणपुर Y-लिंक और कटारिया Y-लिंक का भी प्रावधान किया गया है। इन लिंक के जरिए नई रेल लाइन को आसपास के मौजूदा रेल मार्गों से जोड़ा जाएगा। इससे यात्रियों और माल परिवहन के लिए रेल नेटवर्क के इस्तेमाल की संभावनाएं बढ़ सकती हैं। परियोजना में नई रेलवे लाइन के साथ-साथ स्टेशन और अन्य जरूरी रेलवे ढांचे का भी निर्माण किया जाना है।
चार साल में काम पूरा करने का लक्ष्य
टेंडर की जानकारी के अनुसार, परियोजना के लिए बोली जमा करने की अंतिम तारीख 27 जनवरी 2027 निर्धारित की गई है। टेंडर प्रक्रिया पूरी होने और निर्माण कार्य शुरू होने के बाद परियोजना को 1,460 दिनों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। 1,460 दिन करीब चार साल के बराबर होते हैं। इसका मतलब है कि निर्माण कार्य शुरू होने के बाद निर्धारित समय के भीतर नई रेल लाइन और उससे जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर को तैयार करने का लक्ष्य है। परियोजना में रेलवे लाइन के लिए मिट्टी का काम, बड़े और छोटे पुलों का निर्माण, Rail Over Bridge, अंडरपास, प्लेटफॉर्म और स्टेशन भवन समेत कई तरह के निर्माण कार्य शामिल होंगे।
25 टन एक्सल लोड क्षमता के अनुरूप निर्माण
नई रेलवे लाइन को निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुसार विकसित किया जाना है। परियोजना में 25 टन एक्सल लोड क्षमता के अनुरूप रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने का प्रावधान है। इस क्षमता के अनुरूप ट्रैक और संबंधित संरचनाओं का निर्माण होने से भविष्य में यात्री ट्रेनों के साथ माल परिवहन की जरूरतों को भी ध्यान में रखा जा सकेगा। परियोजना में बनने वाले पुल और अन्य संरचनाओं को भी निर्धारित रेलवे मानकों के अनुसार तैयार किया जाएगा।
सीमांचल के जिलों को मिल सकता है फायदा
विक्रमशिला-कटारिया रेल परियोजना का फायदा सीमांचल क्षेत्र के कई जिलों के यात्रियों को मिलने की उम्मीद है। पूर्णिया, कटिहार, अररिया और किशनगंज जैसे जिलों से आने वाले यात्रियों के लिए यह रेल नेटवर्क एक अतिरिक्त कनेक्टिविटी विकल्प उपलब्ध करा सकता है। इन जिलों के लोगों को भागलपुर, नवगछिया और झारखंड के संताल परगना क्षेत्र की ओर जाने में नई रेल लाइन से सुविधा मिलने की संभावना है। खासकर उन यात्रियों के लिए यह परियोजना उपयोगी हो सकती है, जिन्हें इन क्षेत्रों के बीच नियमित रूप से यात्रा करनी पड़ती है।
देवघर जाने वाले श्रद्धालुओं को भी मिलेगा विकल्प
परियोजना से धार्मिक पर्यटन को भी फायदा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। झारखंड के देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम जाने वाले श्रद्धालुओं को इस रेल संपर्क से एक अतिरिक्त मार्ग मिल सकता है। सीमांचल और कोसी क्षेत्र से देवघर जाने वाले यात्रियों के लिए भागलपुर और नवगछिया के रास्ते नया रेल विकल्प उपलब्ध हो सकता है। हालांकि, इस रूट से यात्रा का वास्तविक समय और दूरी ट्रेन परिचालन शुरू होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
निशिकांत दुबे ने टेंडर का किया स्वागत
गोड्डा सांसद निशिकांत दुबे ने परियोजना के लिए टेंडर जारी होने का स्वागत किया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि नई रेल परियोजना गंगा के दोनों किनारों के बीच कनेक्टिविटी को मजबूत करने में मदद करेगी। प्रस्तावित रेलवे पुल और नई रेल लाइन के जरिए नवगछिया, विक्रमशिला, सीमांचल और संताल परगना क्षेत्र के बीच रेल नेटवर्क का विस्तार किया जाना है।
टेंडर के बाद अब निर्माण की प्रक्रिया होगी शुरू
रेलवे की ओर से ई-टेंडर जारी होने के साथ परियोजना अब खरीद और निर्माण प्रक्रिया के महत्वपूर्ण चरण में पहुंच गई है। आगे बोली प्रक्रिया पूरी होने के बाद चयनित एजेंसी को निर्माण कार्य सौंपा जाएगा। परियोजना पूरी होने पर बिहार और झारखंड के बीच एक नया रेल संपर्क विकसित होगा। इससे क्षेत्रीय यात्रियों को अतिरिक्त रेल मार्ग मिलने के साथ सीमांचल, कोसी और संताल परगना के बीच कनेक्टिविटी बढ़ने की संभावना है। गंगा पर प्रस्तावित रेलवे पुल इस पूरी परियोजना का प्रमुख हिस्सा होगा।