बिहार: जमुई छेड़खानी केस में बड़ा एक्शन, नाबालिग का वीडियो शेयर करने पर 120 अकाउंट पर FIR; पुलिस ने 2 दर्जन से ज्यादा वीडियो हटवाए

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BNT Desk: जमुई में नाबालिग छात्रा से छेड़खानी की घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद बिहार पुलिस ने सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। पुलिस मुख्यालय ने मामले से जुड़े आपत्तिजनक वीडियो को अलग-अलग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से हटवाने की कार्रवाई की है। पुलिस के अनुसार, फेसबुक और एक्स समेत विभिन्न प्लेटफॉर्म से दो दर्जन से अधिक वीडियो टेकडाउन कराए गए हैं। वहीं, नाबालिग की पहचान उजागर करने और उससे संबंधित वीडियो प्रसारित करने के आरोप में 120 सोशल मीडिया अकाउंट संचालकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है।

 

नाबालिग से जुड़े वीडियो को वायरल करने पर पुलिस की सख्ती

जमुई में नाबालिग छात्रा के साथ कथित छेड़खानी की घटना का वीडियो सामने आने के बाद इसे सोशल मीडिया पर तेजी से शेयर और रीपोस्ट किया गया। इसके बाद मामला पुलिस मुख्यालय तक पहुंचा और पुलिस ने वीडियो के प्रसार को रोकने के लिए कार्रवाई शुरू की। बिहार पुलिस के अनुसार, घटना से जुड़े दो दर्जन से अधिक आपत्तिजनक वीडियो फेसबुक और एक्स से हटवाए गए हैं। इसके साथ ही ऐसे अकाउंट संचालकों की पहचान की जा रही है, जिन्होंने वीडियो या उससे जुड़ी सामग्री को पोस्ट या प्रसारित किया। पुलिस का कहना है कि नाबालिग से जुड़ी संवेदनशील सामग्री को सोशल मीडिया पर साझा करना केवल वीडियो वायरल करने तक सीमित मामला नहीं है। इससे पीड़िता की पहचान उजागर होने का खतरा रहता है और उसकी निजता प्रभावित होती है।

 

120 सोशल मीडिया अकाउंट संचालकों पर दर्ज हुई FIR

पुलिस मुख्यालय की कार्रवाई में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि नाबालिग की पहचान उजागर करने और उसका वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित करने के आरोप में 120 अकाउंट संचालकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस अब ऐसे अन्य अकाउंट, पेज और वेबसाइट की भी पहचान कर रही है, जहां नाबालिग से संबंधित आपत्तिजनक सामग्री पोस्ट या प्रसारित की गई है। इसका उद्देश्य वीडियो के आगे प्रसार को रोकना और संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करना है। पुलिस ने आम लोगों से भी अपील की है कि वे ऐसे वीडियो को डाउनलोड कर दोबारा पोस्ट न करें और न ही किसी दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर शेयर करें। अगर किसी व्यक्ति को ऐसा वीडियो दिखाई देता है, तो उसे खुद प्रसारित करने के बजाय संबंधित पुलिस या साइबर एजेंसी को इसकी जानकारी देनी चाहिए।

 

पीड़िता की पहचान उजागर करना भी गंभीर मामला

नाबालिग से जुड़े मामलों में उसकी पहचान को सार्वजनिक करना कानून के तहत गंभीर विषय है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि नाबालिग का नाम, चेहरा, पता, स्कूल, परिवार, मोहल्ला या ऐसी कोई भी जानकारी साझा नहीं की जानी चाहिए, जिससे उसकी पहचान का पता चल सके। स्रोत के अनुसार, POCSO एक्ट की धारा 23 के तहत मीडिया में बच्चे की पहचान उजागर करने वाली जानकारी प्रकाशित करने पर रोक है। इसमें नाम, पता, फोटो, परिवार, स्कूल, पड़ोस और पहचान सामने लाने वाली अन्य जानकारी शामिल हो सकती है। इसलिए किसी वायरल वीडियो को केवल इसलिए आगे शेयर करना उचित नहीं है कि वह पहले से सोशल मीडिया पर मौजूद है। वीडियो के पहले से वायरल होने के बावजूद उसे दोबारा शेयर करने से उसका प्रसार और बढ़ सकता है।

 

वीडियो सामने आए तो क्या करें?

बिहार पुलिस की अपील के मुताबिक, अगर किसी नाबालिग से जुड़ा आपत्तिजनक वीडियो या फोटो सोशल मीडिया पर दिखाई देता है तो उसे आगे शेयर, रीपोस्ट या किसी दूसरे प्लेटफॉर्म पर अपलोड नहीं करना चाहिए। संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के रिपोर्ट विकल्प का इस्तेमाल करके पोस्ट की शिकायत की जा सकती है। जरूरत पड़ने पर पुलिस या साइबर सेल को भी इसकी जानकारी दी जा सकती है। पुलिस ने कहा है कि वीडियो को सार्वजनिक रूप से दोबारा पोस्ट करने के बजाय संबंधित अकाउंट, पोस्ट या पेज की जानकारी जांच एजेंसी को देना ज्यादा उचित है। इससे पुलिस को डिजिटल साक्ष्यों की जांच करने में मदद मिल सकती है।

 

खतरा होने पर 112 पर कर सकते हैं कॉल

यदि किसी महिला या बच्चे को तत्काल खतरा हो या घटना उसी समय हो रही हो, तो पुलिस सहायता के लिए 112 पर संपर्क किया जा सकता है। स्रोत में महिला हेल्पलाइन के लिए 181, चाइल्ड प्रोटेक्शन हेल्पलाइन के लिए 1098 और साइबर क्राइम हेल्पलाइन के लिए 1930 का उल्लेख किया गया है। किसी बच्चे के साथ बदसलूकी की घटना होने पर उसे अकेले स्थिति संभालने के लिए मजबूर नहीं करना चाहिए। माता-पिता, अभिभावक या किसी भरोसेमंद वयस्क को तुरंत जानकारी देना जरूरी है। पुलिस के अनुसार, घटना की जल्द सूचना मिलने से उपलब्ध साक्ष्यों और डिजिटल सामग्री की जांच में मदद मिल सकती है।

 

घटना की जानकारी पुलिस को दें, वीडियो वायरल न करें

जमुई मामले के बाद बिहार पुलिस ने एक बार फिर लोगों को सोशल मीडिया इस्तेमाल करते समय सावधानी बरतने की सलाह दी है। पुलिस का कहना है कि किसी अपराध का वीडियो सामने आने पर उसे वायरल करना या रीपोस्ट करना समाधान नहीं है। इससे पीड़िता की निजता प्रभावित हो सकती है और संवेदनशील सामग्री का प्रसार बढ़ सकता है। पुलिस अब उन अन्य सोशल मीडिया अकाउंट, पेज और वेबसाइट की भी पहचान कर रही है, जिन्होंने नाबालिग से संबंधित आपत्तिजनक सामग्री को पोस्ट या प्रसारित किया है। इस पूरे मामले में पुलिस की कार्रवाई का फोकस दो स्तरों पर है—एक तरफ मूल घटना की जांच और आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई, वहीं दूसरी तरफ नाबालिग से संबंधित वीडियो के प्रसार को रोकना। पुलिस ने लोगों से स्पष्ट रूप से कहा है कि ऐसे वीडियो को शेयर या रीपोस्ट करने के बजाय संबंधित एजेंसियों को इसकी सूचना दें।

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