बिहार में UCC को लेकर फिर बढ़ी सियासी हलचल, संतोष सुमन बोले- अमित शाह ने कहा है तो कुछ अच्छी बातें होंगी

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BNT Desk: बिहार में समान नागरिक संहिता यानी UCC को लेकर सियासी बयानबाजी तेज होती नजर आ रही है। जदयू की ओर से यह स्पष्ट किए जाने के बाद कि बिहार में UCC लागू नहीं होगा, अब एनडीए के घटक दल हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) के अध्यक्ष और बिहार सरकार में मंत्री संतोष कुमार सुमन ने इस मुद्दे पर अलग रुख सामने रखा है। संतोष सुमन ने कहा कि UCC को लेकर विचार-विमर्श के बाद ही कोई फैसला होना चाहिए। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने UCC को लेकर बात कही है तो इसमें कुछ अच्छी बातें जरूर होंगी और इसे लागू करने में क्या दिक्कत है।

 

UCC पर विचार-विमर्श के बाद फैसला

मंत्री संतोष सुमन ने UCC को लेकर पूछे गए सवाल पर कहा कि इस मामले में पहले विचार-विमर्श किया जाना चाहिए। उन्होंने सीधे तौर पर यह नहीं कहा कि बिहार में UCC निश्चित रूप से लागू किया जाएगा, लेकिन उनके बयान से यह संकेत जरूर मिला कि इस मुद्दे पर चर्चा और संभावनाओं को पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि अमित शाह ने इस विषय में बात कही है तो निश्चित रूप से इसमें कुछ अच्छी बातें होंगी। ऐसे में इसे लागू करने में क्या दिक्कत है, इस पर विचार किया जा सकता है। उनके इस बयान के बाद बिहार में UCC को लेकर एनडीए के भीतर अलग-अलग दलों के रुख को लेकर चर्चा तेज हो गई है। जदयू पहले ही कह चुका है कि संसद में UCC का समर्थन करने के बावजूद बिहार में इसे लागू नहीं किया जाएगा।

 

जदयू के 18 सितंबर के बैठक पर भी बोले

18 सितंबर को जदयू की प्रस्तावित बैठक को लेकर भी संतोष सुमन से सवाल किया गया। बैठक में पार्टी के नाम में बदलाव की चर्चा होने की बात पर उन्होंने इसे खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि ऐसी कोई बात नहीं है। यह जदयू की अपनी बैठक है। अगर जदयू संगठन को लेकर बैठक कर रहा है तो यह पूरी तरह उसका आंतरिक मामला है। संतोष सुमन ने साफ किया कि किसी राजनीतिक दल की संगठनात्मक बैठक को लेकर बाहर से अलग-अलग तरह की अटकलें लगाना उचित नहीं है। जदयू अपनी पार्टी और संगठन से जुड़े विषयों पर चर्चा कर सकता है।

 

नाम बदलने की चर्चा पर क्या कहा?

जदयू की बैठक में पार्टी का नाम बदलने की चर्चा से जुड़े सवाल पर संतोष सुमन ने कहा कि ऐसी कोई बात नहीं है। उन्होंने इसे जदयू की अपनी बैठक बताया। उनके बयान से साफ है कि वह जदयू की बैठक को लेकर किसी तरह की अंदरूनी जानकारी या संभावित फैसले की पुष्टि नहीं कर रहे हैं। उन्होंने इसे पूरी तरह जदयू के संगठनात्मक मामलों से जोड़कर देखा।

 

विधान परिषद चुनाव को लेकर RJD-कांग्रेस पर हमला

बिहार विधान परिषद चुनाव में कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल के बीच सीटों को लेकर सामने आ रही खींचतान पर भी संतोष सुमन ने तीखा हमला बोला। उन्होंने दोनों दलों के बीच गठबंधन के अस्तित्व पर ही सवाल खड़ा कर दिया। उन्होंने कहा कि आखिर इन दोनों का गठबंधन था कहां? उनके मुताबिक, दोनों दलों के बीच वास्तव में कोई गठबंधन नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि ये लोग दिल्ली में साथ तस्वीरें खिंचवाते हैं और पटना में भी साथ नजर आते हैं, लेकिन राजनीतिक स्तर पर इनका कोई स्थायी गठबंधन नहीं है।

 

‘स्वार्थ का गठबंधन’ बताया

संतोष सुमन ने कांग्रेस और RJD के संबंधों को ‘स्वार्थ का गठबंधन’ बताया। उन्होंने कहा कि दोनों दलों के बीच इस तरह की खींचतान कोई नई बात नहीं है। उन्होंने कहा कि इन लोगों की ‘नूरा कुश्ती’ इसी तरह चलती रहती है। उनके बयान का मतलब यह था कि कांग्रेस और RJD के बीच राजनीतिक मतभेद और सीटों को लेकर खींचतान पहले भी देखने को मिलती रही है और मौजूदा विवाद भी उसी राजनीति का हिस्सा है। विधान परिषद चुनाव को लेकर RJD की ओर से प्रत्याशियों की घोषणा के बाद कांग्रेस की ओर से भी अलग उम्मीदवार उतारने के संकेत दिए गए हैं। इसी को लेकर महागठबंधन के भीतर राजनीतिक समीकरणों पर चर्चा शुरू हुई है। हालांकि, संतोष सुमन ने इस पूरे घटनाक्रम को गंभीर राजनीतिक गठबंधन के बजाय आपसी स्वार्थ की राजनीति बताया।

 

UCC पर NDA में अलग-अलग राय

संतोष सुमन के बयान के बाद एक बार फिर यह सवाल उठ रहा है कि बिहार में UCC को लेकर एनडीए के घटक दलों की राय एक जैसी है या नहीं। जदयू की ओर से बिहार में इसे लागू नहीं करने की बात कही गई है, जबकि हम (सेक्युलर) के अध्यक्ष संतोष सुमन ने इसे पूरी तरह खारिज करने के बजाय विचार-विमर्श और संभावित फायदे की बात कही है। हालांकि, संतोष सुमन ने भी यह नहीं कहा कि बिहार सरकार ने UCC लागू करने का फैसला कर लिया है। उन्होंने केवल विचार-विमर्श के बाद निर्णय की बात कही है और अमित शाह के बयान का हवाला देते हुए कहा है कि इसमें कुछ अच्छी बातें हो सकती हैं। ऐसे में बिहार की राजनीति में UCC का मुद्दा आने वाले दिनों में एक बार फिर चर्चा का विषय बन सकता है। खासकर एनडीए के भीतर अलग-अलग सहयोगी दलों के बयानों पर राजनीतिक नजर बनी हुई है।

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