BNT Desk: दिवंगत बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत का मामला एक बार फिर चर्चा में है। मुंबई के कूपर अस्पताल में उनकी पोस्टमार्टम प्रक्रिया से जुड़े रहे पूर्व मॉर्चरी कर्मचारी रूपकुमार शाह ने अभिनेता की मौत के कारण को लेकर गंभीर सवाल उठाए थे। शाह ने दावा किया था कि सुशांत के शरीर पर कुछ ऐसे निशान थे, जो उनके मुताबिक सामान्य फांसी के मामले से अलग दिखाई दे रहे थे। हालांकि, इन दावों के समर्थन में उन्होंने कोई स्वतंत्र फोरेंसिक सबूत पेश नहीं किया था।
सुशांत सिंह राजपूत 14 जून 2020 को मुंबई के बांद्रा स्थित अपने घर में मृत पाए गए थे। शुरुआती जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण फांसी से दम घुटना बताया गया था। बाद में मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई। मार्च 2025 में सीबीआई ने मामले में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करते हुए किसी आपराधिक साजिश या फाउल प्ले के सबूत नहीं मिलने की बात कही। ऐसे में शाह के पुराने दावों को आधिकारिक जांच के निष्कर्षों से अलग करके देखना जरूरी है।
पूर्व मॉर्चरी कर्मचारी ने क्या दावा किया था?
रूपकुमार शाह ने मीडिया से बातचीत में दावा किया था कि जब उन्होंने सुशांत के शव को देखा, तो उन्हें शरीर पर कुछ चोटों और निशानों को लेकर संदेह हुआ। उन्होंने कथित तौर पर कहा था कि अभिनेता की आंख के पास चोट के निशान थे और उनकी गर्दन पर मौजूद निशान उन्हें सामान्य फांसी जैसे नहीं लगे।
शाह ने यह भी दावा किया था कि सुशांत की गर्दन पर दबाव के निशान थे और उनकी राय में उन्हें गला दबाने की आशंका लगी। उन्होंने यह भी कहा था कि शरीर की कुछ हड्डियों में फ्रैक्चर के निशान दिखाई दिए थे। हालांकि, ये सभी बातें शाह के व्यक्तिगत दावे थे और उन्होंने इनके समर्थन में कोई स्वतंत्र मेडिकल या फोरेंसिक रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की थी।
डॉक्टरों की पहचान को लेकर भी दिया जवाब
जब शाह से पूछा गया कि कूपर अस्पताल में सुशांत का पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर कौन थे, तो वह उनके नाम नहीं बता सके। उन्होंने कहा था कि डॉक्टरों ने उस समय कोविड प्रोटोकॉल के तहत सुरक्षा किट पहनी हुई थी, इसलिए वह उन्हें पहचान नहीं पाए।
उनसे यह भी सवाल किया गया कि यदि शव पर इतने गंभीर निशान थे, तो सुशांत के परिवार के सदस्यों ने उन्हें लेकर सवाल क्यों नहीं उठाए। रिपोर्ट के मुताबिक, शाह इस सवाल का स्पष्ट जवाब नहीं दे सके। उन्होंने कहा कि संभव है कि परिवार को इन बातों की जानकारी नहीं रही हो और वह अपने लंबे अनुभव के आधार पर शरीर पर मौजूद निशानों को अलग तरीके से देख पा रहे थे।
शाह ने वरिष्ठ अधिकारी को बताने का भी दावा किया था
रिपोर्टों के मुताबिक, शाह ने यह भी दावा किया था कि उन्होंने अपने वरिष्ठ अधिकारी को उन निशानों के बारे में बताने की कोशिश की थी। उनका कहना था कि उन्हें मामला सामान्य आत्महत्या जैसा नहीं लगा था। हालांकि, उन्होंने यह दावा काफी समय बाद सार्वजनिक रूप से सामने रखा था। 2022 में उनके बयान सामने आने के बाद इस मामले को लेकर सोशल मीडिया और सार्वजनिक बहस में एक बार फिर कई सवाल उठे थे।
आधिकारिक जांच में क्या सामने आया?
सुशांत की मौत के बाद मुंबई पुलिस ने मामले की जांच की थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण फांसी से दम घुटना बताया गया था। बाद में मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई और अलग-अलग पहलुओं की जांच की गई।
सीबीआई ने मार्च 2025 में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की और उपलब्ध जांच के आधार पर किसी फाउल प्ले या आपराधिक साजिश का सबूत नहीं मिलने की बात कही। इसलिए रूपकुमार शाह के दावों को आधिकारिक जांच का निष्कर्ष नहीं माना जा सकता।
दावों और आधिकारिक निष्कर्षों में अंतर
सुशांत की मौत को लेकर वर्षों से कई तरह के दावे और सवाल सामने आते रहे हैं। रूपकुमार शाह का बयान भी इसी बहस का हिस्सा रहा है। लेकिन किसी व्यक्ति द्वारा शव को देखकर जताया गया संदेह और वैज्ञानिक फोरेंसिक जांच का निष्कर्ष एक ही चीज नहीं होते।
इसलिए शाह द्वारा गर्दन के निशान, आंख के पास चोट या गला दबाए जाने की आशंका से जुड़े दावों को तथ्य के रूप में पेश करना उचित नहीं होगा। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, उनके दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई थी। वहीं, आधिकारिक जांच में हत्या या आपराधिक साजिश के सबूत नहीं मिलने की बात कही गई है।
सुशांत सिंह राजपूत की मौत के छह साल बाद भी उनके प्रशंसकों और परिवार से जुड़े लोगों के बीच यह मामला भावनात्मक चर्चा का विषय बना हुआ है। हालांकि, किसी भी नए दावे का मूल्यांकन उपलब्ध मेडिकल रिकॉर्ड, फोरेंसिक साक्ष्य और जांच एजेंसियों के निष्कर्षों के आधार पर ही किया जाना चाहिए।