नई दिल्ली: दोपहर करीब डेढ़ बजे अचानक ढह गई पूरी इमारत; सत्य निकेतन में 5 मंजिला PG बिल्डिंग भरभराकर गिरी, 6 की मौत; अवैध निर्माण और बेसमेंट काम पर उठे सवाल

BNT
By
9 Min Read

BNT Desk: दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार दोपहर एक पांच मंजिला इमारत अचानक भरभराकर गिर गई। दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस के पास हुई इस घटना में अब तक 6 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 11 लोगों को मलबे से सुरक्षित बाहर निकाला गया है। घायलों में कई की हालत गंभीर बताई गई है और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। हादसे के बाद लगातार राहत और बचाव अभियान चलाया गया। मलबे में और लोगों के फंसे होने की आशंका के चलते बचाव दल ने काफी देर तक तलाशी अभियान जारी रखा।

 

दोपहर करीब डेढ़ बजे अचानक ढह गई पूरी इमारत

यह हादसा 6 सितंबर, रविवार को दोपहर करीब 1:30 बजे हुआ। पांच मंजिला यह इमारत लड़कों के लिए पेइंग गेस्ट यानी PG के तौर पर इस्तेमाल हो रही थी। स्थानीय स्तर पर इस संपत्ति को ‘हॉस्टल डेज’ के नाम से भी जाना जाता था। इमारत में बेसमेंट के साथ जमीन के ऊपर चार मंजिलें थीं।

इमारत गिरते ही आसपास के इलाके में अफरा-तफरी मच गई। देखते ही देखते पूरी इमारत मलबे में बदल गई और कई लोग उसके नीचे दब गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, गिरने से कुछ क्षण पहले तेज आवाज सुनाई दी थी। कुछ स्थानीय लोगों ने मलबे के नीचे से लोगों के मदद के लिए पुकारने की आवाज भी सुनने की बात कही।

 

NDRF समेत कई टीमें राहत-बचाव में जुटीं

हादसे की जानकारी मिलते ही दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल यानी NDRF, दिल्ली फायर सर्विस और दिल्ली पुलिस की टीमें मौके पर पहुंचीं। मलबा काफी ज्यादा होने के कारण बचाव अभियान बेहद सावधानी से चलाया गया।

NDRF की दो टीमें भी अभियान में लगाई गईं। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, करीब 70 NDRF कर्मियों के साथ डॉग स्क्वॉड को भी तलाश अभियान में लगाया गया। स्थानीय लोगों ने भी बचावकर्मियों के साथ मिलकर मलबा हटाने और दबे लोगों की तलाश में मदद की।

 

मलबे में फंसे लोगों तक पहुंचाया गया ऑक्सीजन

बचाव अभियान के दौरान मलबे में फंसे लोगों की तलाश के लिए विशेष प्रयास किए गए। NDRF के एक अधिकारी के अनुसार, मलबे के अंदर ऑक्सीजन सिलेंडर पहुंचाए गए, ताकि अगर कोई व्यक्ति अंदर जिंदा फंसा हो और सांस लेने में परेशानी हो रही हो तो उसे मदद मिल सके।

हादसे की गंभीरता का अंदाजा इस बात से भी लगाया गया कि मलबे में फंसे कुछ लोगों ने मोबाइल फोन के जरिए मदद मांगने की कोशिश की थी। बचाव दल ने ऐसे संकेतों के आधार पर भी तलाशी अभियान चलाया।

 

इमारत के निर्माण पर उठे गंभीर सवाल

हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल इमारत की संरचनात्मक सुरक्षा और निर्माण नियमों को लेकर उठ रहा है। नगर निगम के मुताबिक, जिस जमीन पर यह इमारत बनी थी, उसका क्षेत्रफल करीब 55 वर्ग गज था और यहां केवल ग्राउंड प्लस वन यानी दो स्तर तक निर्माण की अनुमति थी।

इसके बावजूद हादसे में गिरी इमारत में बेसमेंट के अलावा चार मंजिलें ऊपर थीं। एक वरिष्ठ नगर निगम अधिकारी ने भी इमारत को निर्माण नियमों के उल्लंघन में बताया है। अब जांच इस बात पर केंद्रित है कि अतिरिक्त मंजिलें कब बनाई गईं और उनके लिए जरूरी अनुमति ली गई थी या नहीं।

 

दो साल पहले अतिरिक्त मंजिल बनाने का दावा

स्थानीय लोगों के मुताबिक, करीब दो साल पहले इमारत में दो अतिरिक्त मंजिलें बनाई गई थीं। इसके बाद धीरे-धीरे इसे छात्रों के रहने के लिए PG में बदल दिया गया। कमरों को अलग-अलग छात्रों को बेड के हिसाब से किराए पर दिए जाने की बात भी सामने आई है।

रिपोर्ट के अनुसार, इमारत में कई कमरे थे और बड़ी संख्या में छात्र वहां रह रहे थे। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इमारत में किए गए बदलावों से उस पर अतिरिक्त भार तो नहीं पड़ा और क्या ये सभी बदलाव निर्धारित नियमों के अनुसार किए गए थे।

 

बेसमेंट में चल रहा था काम, उसी पर सबसे ज्यादा सवाल

हादसे की जांच में बेसमेंट में चल रहे निर्माण या मरम्मत के काम को भी प्रमुखता से देखा जा रहा है। दिल्ली पुलिस के अनुसार, इमारत गिरने के समय बेसमेंट में मरम्मत का काम चल रहा था। स्थानीय लोगों ने भी बताया कि करीब एक सप्ताह से वहां काम जारी था।

कुछ स्थानीय लोगों ने बेसमेंट में पानी जमा होने, सीलन और जलभराव की समस्या होने की बात कही है। ऐसे में जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि बेसमेंट में चल रहे काम ने मौजूदा ढांचे की मजबूती को प्रभावित किया या नहीं। हालांकि, अधिकारियों ने अभी तक यह निष्कर्ष नहीं दिया है कि बेसमेंट का काम ही इमारत गिरने की वजह था।

 

जलभराव और दरारों की भी होगी जांच

स्थानीय लोगों ने दावा किया है कि बेसमेंट में पहले भी पानी जमा होता था। कुछ लोगों ने इमारत में सीलन और दरारें दिखाई देने की बात भी कही। हालांकि, प्रशासन की ओर से अभी तक यह आधिकारिक रूप से नहीं कहा गया है कि जलभराव के कारण इमारत कमजोर हुई और इसी वजह से वह गिरी।

इमारत की आपातकालीन सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, वहां दूसरा निकास रास्ता नहीं था, जिससे किसी आपात स्थिति में लोगों को बाहर निकलने में परेशानी हो सकती थी। PG में बड़ी संख्या में छात्रों के रहने के कारण यह चिंता और गंभीर हो गई है।

 

मालिक और निर्माण से जुड़े लोगों की भूमिका की जांच

जांच में इमारत के मालिक और निर्माण कार्य से जुड़े लोगों की भूमिका भी देखी जा रही है। रिपोर्ट के अनुसार, संपत्ति के मालिक गुरुग्राम निवासी भाइयों हरि राम बंसल, आनंद बंसल और आजाद बंसल बताए गए हैं। पुलिस मामले में आरोपियों की तलाश और पूछताछ कर रही है।

जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि इमारत में अवैध तरीके से कोई अतिरिक्त निर्माण हुआ था या नहीं, बेसमेंट में काम के लिए अनुमति ली गई थी या नहीं और PG के रूप में भवन के इस्तेमाल की अनुमति थी या नहीं।

 

पड़ोसी इमारत भी खाली कराई गई

हादसे के बाद आसपास की इमारतों की सुरक्षा को लेकर भी प्रशासन सतर्क हो गया। नगर निगम ने हादसे वाली इमारत से सटी एक इमारत को खाली कराकर सील कर दिया। इसे जर्जर हालत में बताया गया। वहां रहने वाले लोगों, जिसमें लड़कियों के PG में रहने वाली छात्राएं भी शामिल थीं, को पास के सामुदायिक भवन में भेजा गया।

सत्य निकेतन में बड़ी संख्या में छात्र PG में रहते हैं। दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस और अन्य शिक्षण संस्थानों के नजदीक होने के कारण यहां छात्रों के लिए किराए के आवास की मांग काफी ज्यादा है। यही वजह है कि हादसे के बाद पूरे इलाके में बने PG भवनों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

 

जांच के बाद ही सामने आएगी हादसे की असली वजह

फिलहाल सत्य निकेतन PG हादसे की सटीक वजह आधिकारिक तौर पर तय नहीं हुई है। जांच में यह देखा जा रहा है कि क्या इमारत में बिना अनुमति अतिरिक्त मंजिलें बनाई गई थीं, क्या बेसमेंट में निर्माण या मरम्मत का काम नियमों के मुताबिक था, क्या जलभराव और दरारों का ढांचे पर असर पड़ा और क्या PG के रूप में इस्तेमाल के दौरान पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था मौजूद थी।

छह लोगों की मौत के बाद अब जांच की अंतिम रिपोर्ट बेहद महत्वपूर्ण होगी। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि इमारत क्यों गिरी और क्या समय रहते सुरक्षा मानकों पर ध्यान देकर इस हादसे को रोका जा सकता था।

Share This Article