पटना: बिहार में ऐसे लाखों परिवार हैं, जिनके दादा-परदादा या पुश्तैनी जमीन के मूल मालिक का निधन हो चुका है, लेकिन आज तक जमीन का दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) उत्तराधिकारियों के नाम पर नहीं हो पाया है। ऐसे मामलों में वर्षों तक पारिवारिक विवाद, मुकदमेबाजी और सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में दिक्कतें आती रही हैं। अब बिहार सरकार ने इस समस्या के समाधान के लिए बड़ा कदम उठाया है।
सरकार ने फैसला किया है कि अब मृत जमाबंदी धारकों के मामलों में पहल खुद प्रशासन करेगा। यानी लोगों को बार-बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे, बल्कि राजस्व कर्मचारी स्वयं गांव-गांव जाकर ऐसे मामलों की पहचान करेंगे और उत्तराधिकारियों के नाम पर दाखिल-खारिज की प्रक्रिया पूरी कराएंगे।
हर महीने कम-से-कम 5 मामलों का होगा निपटारा
नई व्यवस्था के तहत प्रत्येक राजस्व कर्मचारी को अपने क्षेत्र के प्रत्येक मौजा में हर महीने कम-से-कम पांच मृत जमाबंदी धारकों की जमाबंदी अद्यतन करना अनिवार्य होगा। यह अभियान तब तक जारी रहेगा, जब तक संबंधित मौजा के सभी लंबित मृत जमाबंदी मामलों का निपटारा नहीं हो जाता।
इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी और लक्ष्य पूरा कराने की जिम्मेदारी संबंधित अंचल अधिकारी (सीओ) की होगी।
अब खुद गांव पहुंचेंगे राजस्व कर्मचारी
सरकार के निर्देश के अनुसार अब पुश्तैनी जमीन के उत्तराधिकारियों को दाखिल-खारिज के लिए आवेदन देने और दफ्तरों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं होगी। राजस्व कर्मचारी गांव-गांव जाकर ऐसे रैयतों की पहचान करेंगे, जिनकी मृत्यु हो चुकी है।
इसके बाद वे मृतक के वारिसों से संपर्क करेंगे, आवश्यक दस्तावेज प्राप्त करेंगे और उनके नाम पर जमाबंदी एवं म्यूटेशन की प्रक्रिया पूरी कराएंगे।
विभाग ने जारी किए निर्देश
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव जय सिंह ने इस संबंध में सभी प्रमंडलीय आयुक्तों और जिलाधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी कर दिए हैं।
वहीं, राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री दिलीप कुमार जायसवाल ने कहा कि सरकार की मंशा है कि कोई भी परिवार केवल जानकारी के अभाव या प्रशासनिक देरी के कारण अपने वैधानिक अधिकार से वंचित न रहे।
पूरे बिहार में चलेगा विशेष अभियान
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह अभियान पूरे बिहार में तब तक जारी रहेगा, जब तक सभी लंबित मृत जमाबंदी मामलों का निपटारा नहीं हो जाता।
प्रखंड स्तर पर तैनात राजस्व कर्मचारी स्वतः संज्ञान लेकर हर महीने कम-से-कम पांच मामलों का निस्तारण करेंगे।
पूरी प्रक्रिया होगी ऑनलाइन
मंत्री दिलीप कुमार जायसवाल के अनुसार पूरी प्रक्रिया बिहार भूमि पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन संपन्न होगी।
- अंचल अधिकारी (सीओ) हर महीने लक्ष्य तय करेंगे।
- अपर समाहर्ता और भूमि सुधार उप समाहर्ता प्रत्येक माह के पहले सप्ताह में अंचलवार समीक्षा करेंगे।
- साप्ताहिक समीक्षा बैठकों में भी इन मामलों की प्रगति की अनिवार्य समीक्षा की जाएगी।
कैसे होगी मृत जमाबंदी धारकों की पहचान?
राजस्व कर्मचारियों को स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए गए हैं कि वे निम्न स्रोतों के आधार पर मृत जमाबंदी धारकों की पहचान करेंगे—
- जन्म-मृत्यु निबंधन अभिलेख
- चौकीदारी रिपोर्ट
- स्थानीय जनप्रतिनिधियों से प्राप्त जानकारी
- ग्रामीणों द्वारा दी गई सूचना
जांच पूरी होने के बाद संबंधित उत्तराधिकारियों से संपर्क कर आवश्यक दस्तावेज लिए जाएंगे।
दस्तावेज नहीं होने पर भी होगी कार्रवाई
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित समय के भीतर बंटवारे से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध नहीं हो पाते हैं, तब भी केवल उत्तराधिकार के आधार पर नामांतरण (म्यूटेशन) की प्रक्रिया शुरू की जाएगी, ताकि लोगों को अनावश्यक देरी का सामना न करना पड़े।
लापरवाही पर होगी कार्रवाई
सरकार ने इस अभियान को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। यदि किसी स्तर पर लापरवाही, उदासीनता या निर्धारित लक्ष्य पूरा नहीं किया गया, तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
सरकार का क्या है उद्देश्य?
राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री दिलीप कुमार जायसवाल ने कहा कि यह पहल केवल दाखिल-खारिज तक सीमित नहीं है, बल्कि बिहार के भूमि अभिलेखों को अद्यतन, विवाद-मुक्त और अधिक विश्वसनीय बनाने की दिशा में एक बड़ा सुधार है।
सरकार का मानना है कि इस अभियान से लाखों रैयत परिवारों को समय पर उनका वैधानिक अधिकार मिलेगा, भूमि विवाद कम होंगे और सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में भी लोगों को आसानी होगी।