नालंदा: महज 10 साल में जर्जर हुआ सकरी नदी का पुल, दोनों तरफ दीवार उठाकर रास्ता बंद, दर्जनों गांवों का संपर्क टूटा

BiharNewsAuthor
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BNT Desk: बिहार के नालंदा जिले से एक बेहद चिंताजनक लेकिन बड़ी खबर सामने आ रही है। यहां निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और सरकारी दावों की पोल एक बार फिर खुल गई है। बिहारशरीफ-कतरीसराय मुख्य मार्ग पर दरियापुर गांव के पास सकरी नदी पर बना एक प्रमुख पुल महज दस साल के भीतर ही ढहने की कगार पर पहुंच गया है। पुल की जर्जर स्थिति और मंडराते खतरे को देखते हुए जिला प्रशासन ने बेहद सख्त कदम उठाया है।

किसी भी अप्रिय घटना या बड़े हादसे को रोकने के लिए प्रशासन ने एहतियातन इस पुल को पूरी तरह से बंद कर दिया है। सुरक्षा के लिहाज से पुल के दोनों छोर पर ईंट की ऊंची और मजबूत दीवारें खड़ी कर दी गई हैं, ताकि वाहनों और लोगों की आवाजाही को पूरी तरह रोका जा सके।

क्यों खतरनाक हुई पुल की स्थिति?

स्थानीय सूत्रों और तकनीकी जांच से पता चला है कि पुल की यह दुर्दशा अचानक नहीं हुई, बल्कि लंबे समय से अनदेखी का परिणाम है। पुल के जर्जर होने के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:

  • मिट्टी का भारी कटाव: सकरी नदी के तेज बहाव के कारण पुल के नीचे की मिट्टी का लगातार कटाव हो रहा था, जिससे इसकी नींव बेहद कमजोर हो गई है।

  • पीलरों का झुकना: नींव कमजोर होने की वजह से पुल के कई पायों (पीलरों) में झुकाव आ गया है और कई हिस्सों में बड़ी-बड़ी दरारें साफ देखी जा सकती हैं।

  • बाहर निकले लोहे के सरिए: पुल की कैपिंग में लगा कंक्रीट झड़ चुका है और उसके अंदर इस्तेमाल हुए लोहे के सरिए बाहर आ गए हैं, जिससे जंग लगने का खतरा बढ़ गया है।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि वे पिछले कई दिनों से पुल की बिगड़ती हालत को लेकर आशंकित थे। समय रहते मरम्मत न होने के कारण अब स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि यह पुल कभी भी भरभराकर ध्वस्त हो सकता है।

NIT की टीम ने जांच में क्या पाया?

मामले की गंभीरता को देखते हुए हाल ही में एनआईटी (NIT) और बिहार राज्य पुल निर्माण निगम की एक संयुक्त तकनीकी टीम ने मौके पर पहुंचकर पुल का विस्तृत निरीक्षण किया था।

तकनीकी टीम की रिपोर्ट: जांच के बाद टीम ने अपनी तकनीकी रिपोर्ट में साफ तौर पर कहा कि पुल का आंतरिक ढांचा (स्ट्रक्चर) पूरी तरह जवाब दे चुका है। यह पुल अब किसी भी तरह का भार उठाने के लिए सुरक्षित नहीं है। विशेषज्ञों ने इस पुराने पुल को तत्काल प्रभाव से ‘खतरनाक’ घोषित करते हुए, इसके स्थान पर एक नए मजबूत पुल के निर्माण की सिफारिश की है। इसी तकनीकी रिपोर्ट के आधार पर जिला प्रशासन ने त्वरित फैसला लेते हुए पुल को ब्लॉक कर दिया।

दो जिलों का संपर्क टूटा

इस महत्वपूर्ण पुल के अचानक बंद हो जाने से नालंदा और पड़ोसी जिले शेखपुरा के बीच का सीधा सड़क संपर्क बुरी तरह प्रभावित हो गया है। इस मार्ग से गुजरने वाले हजारों लोगों को अब भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है:

  1. लंबा वैकल्पिक रास्ता: बिहारशरीफ से कतरीसराय, महलपर और छबीलापुर जाने वाले स्थानीय लोगों और राहगीरों को अब कई किलोमीटर का लंबा चक्कर लगाकर जाना पड़ रहा है।

  2. यात्रियों की मुसीबत: गिरियक से शेखपुरा और बरबीघा की ओर जाने वाले यात्रियों की मुश्किलें भी बढ़ गई हैं। दोनों जिलों की सीमा पर स्थित दर्जनों गांवों के हजारों लोग अपनी दैनिक जरूरतों और व्यापार के लिए इसी पुल पर निर्भर थे, जो अब पूरी तरह अलग-थलग पड़ गए हैं।

 

घटिया निर्माण को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश

पुल की इस हालत ने बिहार में बुनियादी ढांचे के निर्माण की गुणवत्ता पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय ग्रामीणों में व्यवस्था के खिलाफ भारी नाराजगी देखी जा रही है।

ग्रामीण राजीव पांडेय, धर्मेंद्र सिंह और विकास कुमार ने खुले तौर पर आरोप लगाया है कि जब इस पुल का निर्माण किया जा रहा था, तब तय मानकों और क्वालिटी की जमकर अनदेखी की गई। घटिया निर्माण सामग्री के इस्तेमाल और विभागीय लापरवाही के कारण ही यह पुल अपनी तय अवधि से बहुत पहले जर्जर हो गया। आक्रोशित ग्रामीणों ने इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने और जिम्मेदार ठेकेदारों व अधिकारियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।

खतरे के बीच जान जोखिम में डाल रहे लोग

एक तरफ जहां प्रशासन ने सुरक्षा के लिए पुल के दोनों ओर दीवारें खड़ी कर दी हैं, वहीं दूसरी तरफ कुछ लोग अब भी लापरवाही बरतने से बाज नहीं आ रहे हैं। कई स्थानीय युवक और मोटरसाइकिल चालक अपनी जान जोखिम में डालकर ईंट की दीवार को पार करने की कोशिश कर रहे हैं और जर्जर पुल के ऊपर से गुजर रहे हैं।

इस खतरनाक हरकत की वजह से किसी भी वक्त कोई बड़ा हादसा हो सकता है। स्थिति को अनियंत्रित होते देख प्रशासन ने मौके पर पुलिस बल की तैनाती कर दी है, जो लोगों को लगातार सचेत कर रही है और पुल से दूर रहने की हिदायत दे रही है।

प्रशासनिक आश्वासन

इस पूरे संकट पर बिहारशरीफ के अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) क्रिसलय श्रीवास्तव ने बताया कि आम जनता की सुरक्षा प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। तकनीकी टीम की डरावनी रिपोर्ट के बाद ही पुल पर आवाजाही को पूरी तरह रोका गया है।

उन्होंने जनता को ढाढस बंधाते हुए कहा कि लोगों को हो रही असुविधा को लेकर प्रशासन गंभीर है। आवागमन को दोबारा अस्थायी रूप से बहाल करने के लिए अगले एक-दो दिनों के भीतर नदी के अंदर एक ‘अस्थायी डायवर्सन’ (वैकल्पिक रास्ता) तैयार कर दिया जाएगा। इस डायवर्सन के बनने से कम से कम छोटे वाहनों और पैदल यात्रियों की आवाजाही फिर से शुरू हो सकेगी।

फिलहाल, इस मुख्य मार्ग के ठप होने से पूरे इलाके की व्यापारिक और सामाजिक गतिविधियां धीमी पड़ गई हैं। ग्रामीणों को उम्मीद है कि प्रशासन डायवर्सन के साथ-साथ नए पुल के निर्माण की प्रक्रिया भी जल्द शुरू करेगा ताकि इस समस्या का स्थायी समाधान हो सके।

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