BNT Desk: राजधानी पटना से साइबर ठगी का एक बड़ा मामला सामने आया है। साइबर अपराधियों ने खुद को सरकारी जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर एक सेवानिवृत्त आयुष डॉक्टर और प्रोफेसर से 82 लाख 53 हजार रुपये की ठगी कर ली। ठगों ने उन्हें करीब 13 दिनों तक तथाकथित “डिजिटल अरेस्ट” में रखकर मानसिक दबाव बनाया और अलग-अलग खातों में पैसे ट्रांसफर करा लिए। पीड़ित ने अब पटना के साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है।
अनजान नंबर से आया था फोन
जानकारी के अनुसार, पीड़ित डॉ. मोहम्मद गयासुद्दीन हसन के पास 27 मार्च को एक अनजान नंबर से फोन आया। फोन करने वालों ने खुद को पुलिस और जांच एजेंसी का अधिकारी बताया। ठगों ने दावा किया कि उनके बैंक खाते का इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग और अन्य गैरकानूनी गतिविधियों में हुआ है। इसके बाद उन्हें गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई का डर दिखाया गया।
13 दिनों तक रखा ‘डिजिटल अरेस्ट’
पीड़ित के अनुसार, साइबर ठगों ने उन्हें करीब 13 दिनों तक लगातार अपने संपर्क में रखा। इस दौरान व्हाट्सएप ऑडियो और वीडियो कॉल के जरिए उन पर नजर रखी गई। ठगों ने उन्हें किसी से बात नहीं करने दी। यहां तक कि परिवार के लोगों से भी दूरी बनाए रखने के लिए कहा गया। लगातार डर और मानसिक दबाव के कारण पीड़ित उनकी बातों पर भरोसा करते रहे।
82.53 लाख रुपये कराए ट्रांसफर
डर और दबाव में आकर डॉ. हसन ने अलग-अलग बैंक खातों और यूपीआई के माध्यम से कुल 82 लाख 53 हजार रुपये साइबर अपराधियों के बताए खातों में ट्रांसफर कर दिए। कुछ दिनों बाद जब ठगों का संपर्क पूरी तरह टूट गया, तब उन्हें एहसास हुआ कि वे साइबर ठगी का शिकार हो चुके हैं।
साइबर थाने में दर्ज कराई शिकायत
इसके बाद पीड़ित ने पटना के साइबर थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने पुलिस से मामले की जांच करने और ठगी गई रकम वापस दिलाने की मांग की है। पुलिस ने शिकायत के आधार पर जांच शुरू कर दी है और लेन-देन से जुड़े सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।
क्या होता है ‘डिजिटल अरेस्ट’?
साइबर अपराधी फोन या वीडियो कॉल के जरिए खुद को पुलिस, सीबीआई, ईडी, एटीएस या किसी अन्य सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताते हैं। वे किसी फर्जी केस, मनी लॉन्ड्रिंग, पार्सल या बैंक खाते से जुड़े मामले का डर दिखाकर लोगों को घंटों या कई दिनों तक अपने नियंत्रण में रखते हैं। इसके बाद डर का फायदा उठाकर उनसे पैसे ट्रांसफर करा लिए जाते हैं। वास्तव में कोई भी सरकारी एजेंसी फोन या वीडियो कॉल पर किसी व्यक्ति को “डिजिटल अरेस्ट” नहीं करती।
ऐसे बचें साइबर ठगी से
अगर किसी अनजान नंबर से फोन आए और खुद को पुलिस, सीबीआई, ईडी, एटीएस या किसी सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर पैसे मांगें या गिरफ्तारी की धमकी दें, तो घबराएं नहीं।
- तुरंत कॉल काट दें।
- किसी भी अनजान खाते में पैसे ट्रांसफर न करें।
- अपनी बैंक या ओटीपी की जानकारी साझा न करें।
- परिवार या किसी विश्वसनीय व्यक्ति से तुरंत बात करें।
- तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करें।
- नजदीकी साइबर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराएं।
लगातार बढ़ रहे हैं ऐसे मामले
पिछले कुछ समय में “डिजिटल अरेस्ट” के नाम पर साइबर ठगी के मामलों में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है। पुलिस लोगों से अपील कर रही है कि ऐसे किसी भी फोन कॉल या वीडियो कॉल पर भरोसा न करें और सतर्क रहें।