BNT Desk: भोजपुर में पुलिस कार्रवाई को लेकर जारी राजनीतिक बयानबाजी के बीच केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने पुलिस की कार्रवाई का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि मामले की न्यायिक जांच के आदेश दिए जा चुके हैं, इसलिए जांच पूरी होने से पहले किसी भी तरह की टिप्पणी करना उचित नहीं होगा।
चिराग पासवान के दौरे पर क्या बोले?
केंद्रीय मंत्री और लोजपा (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान के भोजपुर जाकर पीड़ित परिवार से मिलने के सवाल पर मांझी ने कहा कि हर नेता का अपना तरीका होता है। उन्होंने कहा, “चिराग जो करेंगे, क्या वही हम भी करेंगे? हमारा दृष्टिकोण बिल्कुल स्पष्ट है। पुलिस ने जो कार्रवाई की है, वह सही है। अगर पुलिस कार्रवाई नहीं करती, तो पुलिसकर्मी ही मारे जाते।”
‘पुलिस की मंशा मारने की नहीं थी’
मांझी ने कहा कि यदि संबंधित व्यक्ति पूरी तरह निर्दोष थे, तो उनके खिलाफ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (SC/ST) अधिनियम के तहत मामला क्यों दर्ज था। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जिस रिवॉल्वर का जिक्र किया जा रहा है, उसके लिए वैध लाइसेंस था या नहीं। उन्होंने कहा, “अगर पुलिस मारना चाहती तो सीने में गोली मारती। पुलिस ने नियमों के अनुसार कमर के नीचे गोली चलाई। उसका उद्देश्य केवल रोकना और घायल करना था, मारना नहीं। उनकी मृत्यु हो गई, यह अलग बात है, लेकिन पुलिस की मंशा उन्हें मारने की नहीं थी।”
पदोन्नति पर उठे सवालों का दिया जवाब
एनकाउंटर मामले में शामिल अधिकारियों को पदोन्नति दिए जाने पर उठ रहे सवालों पर मांझी ने कहा कि किसी के खिलाफ एफआईआर दर्ज होना और दोषी साबित होना, दोनों अलग-अलग बातें हैं। उन्होंने कहा कि फिलहाल न्यायिक जांच चल रही है। यदि जांच में अधिकारी दोषी पाए जाते हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई होगी। वहीं यदि वे दोषी नहीं पाए जाते हैं, तो कार्रवाई का कोई आधार नहीं रहेगा। मांझी ने यह भी कहा कि पुलिस बल में कर्मियों की कमी है, इसलिए अधिकारियों को बिना कारण लंबे समय तक बैठाकर रखना उचित नहीं था।
महापंचायत में शामिल नहीं होने की बताई वजह
महापंचायत में शामिल नहीं होने के सवाल पर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कुछ लोग बिहार सरकार और सम्राट चौधरी के नेतृत्व में चल रही व्यवस्था को बाधित करना चाहते हैं। उन्होंने कहा, “हमें पता था कि यदि हम वहां जाते तो 50 हजार से अधिक लोग जुटते। ऐसी स्थिति में अगर कुछ लोग माहौल बिगाड़ने की कोशिश करते, तो हमारे समर्थक भी प्रतिक्रिया देते और कानून-व्यवस्था की स्थिति प्रभावित हो सकती थी।” मांझी ने कहा कि शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से उन्होंने महापंचायत में नहीं जाने का फैसला किया। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी प्राथमिकता बिहार में शांति बनाए रखना और सरकार को सुचारु रूप से काम करने देना है।