बिहार: पीएम मोदी की राह पर सीएम सम्राट चौधरी, पैदल ही पहुंचे सचिवालय

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पटना। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने आज अपनी सादगी और अनुशासन से सबको चौंका दिया। मुख्यमंत्री अपने सरकारी आवास से मुख्यमंत्री सचिवालय तक का सफर किसी लग्जरी गाड़ी के काफिले के बजाय पैदल चलकर तय किया। उनके इस कदम को सत्ता के गलियारों में ‘वीआईपी कल्चर’ को खत्म करने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सादगी भरी कार्यशैली के प्रभाव के रूप में देखा जा रहा है।

सादगी के साथ काम पर निकले मुख्यमंत्री

गुरुवार की सुबह जब मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी अपने आवास से बाहर निकले, तो सुरक्षा घेरे और गाड़ियों के काफिले के बजाय वे पैदल ही सड़क पर चल पड़े। उनके साथ सरकार के कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे। मुख्यमंत्री को सड़क पर पैदल चलते देख आम राहगीर भी हैरान रह गए। अधिकारियों के साथ बातचीत करते हुए वे सीधे मुख्यमंत्री सचिवालय पहुंचे और अपने कामकाज की शुरुआत की।

प्रधानमंत्री मोदी की कार्यशैली का असर

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जिस तरह से सादगी, समय की पाबंदी और जनता से जुड़ाव पर जोर देते हैं, उसका असर अब बीजेपी शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों में साफ दिखने लगा है। सम्राट चौधरी का यह कदम यह संदेश देता है कि सरकार जनता के करीब है और वह दिखावे की राजनीति के बजाय काम पर ध्यान केंद्रित कर रही है।

फिट बिहार और अनुशासन का संदेश

मुख्यमंत्री के इस कदम को दो बड़े नजरियों से देखा जा रहा है:

  1. अनुशासन: मुख्यमंत्री ने यह दिखाया कि सचिवालय और आवास के बीच की दूरी तय करने के लिए भारी-भरकम सुरक्षा काफिले की हमेशा जरूरत नहीं है।

  2. फिटनेस: पैदल चलकर उन्होंने राज्य के युवाओं और अधिकारियों को फिट रहने और सक्रिय रहने का संदेश भी दिया है।

अधिकारियों में मची खलबली

मुख्यमंत्री के इस औचक फैसले से सचिवालय के अधिकारियों और कर्मचारियों में भी हड़कंप मचा रहा। जब मुख्यमंत्री खुद समय पर और पैदल चलकर दफ्तर पहुंच रहे हों, तो बाकी अमले के लिए भी अनुशासन का पालन करना अनिवार्य हो जाता है। उनके साथ चल रहे अधिकारियों ने रास्ते में ही कई विभागीय मुद्दों पर चर्चा की, जिससे समय की बचत भी हुई।

सोशल मीडिया पर मिल रही सराहना

सम्राट चौधरी की इस तस्वीर और वीडियो के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोग उनकी तारीफ कर रहे हैं। यूज़र्स का कहना है कि बिहार जैसे राज्य में जहां राजनेताओं के काफिले से सड़कें जाम हो जाती थीं, वहां मुख्यमंत्री का यह व्यवहार एक सुखद बदलाव है।

सम्राट चौधरी ने पैदल चलकर न केवल जनता का दिल जीता है, बल्कि बिहार की नई कार्यसंस्कृति की झलक भी दिखाई है। अब देखना यह है कि क्या अन्य मंत्री और नेता भी सादगी के इस रास्ते को अपनाते हैं।

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