BNT Desk: बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों में अब अपनी मर्जी से बहुमंजिली इमारतें या अपार्टमेंट खड़ा करना आसान नहीं होगा। राज्य सरकार ग्रामीण इलाकों में बढ़ते शहरीकरण और बेतरतीब निर्माण पर अंकुश लगाने के लिए एक नई नियमावली लागू करने जा रही है। इसके तहत अब गाँवों में भी मकान बनाने से पहले उसका नक्शा पास कराना अनिवार्य होगा। पंचायती राज विभाग ने इसका प्रारूप तैयार कर लिया है और जल्द ही इसे कानूनी अमलीजामा पहनाया जाएगा।
नियमों की जरूरत क्यों पड़ी?
शहरों से सटे ग्रामीण इलाकों में तेजी से नई कॉलोनियां विकसित हो रही हैं। शहरी क्षेत्रों में अपार्टमेंट और इमारतों की निगरानी के लिए ‘रेरा’ (RERA) जैसी संस्था है, लेकिन गाँवों में फिलहाल ऐसी कोई व्यवस्था नहीं थी।
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सुरक्षा और सुव्यवस्था: गाँवों में कम चौड़ी सड़कों पर बड़ी इमारतों के निर्माण से भविष्य में जाम और सुरक्षा की समस्या हो सकती है।
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अवैध निर्माण पर रोक: इस नए प्रावधान से अनियोजित तरीके से बन रही इमारतों पर अंकुश लगेगा और खरीदारों के हितों की रक्षा होगी।
रेरा की तर्ज पर बनेगा नया प्राधिकरण
गाँवों के लिए बनने वाली इस नियमावली में ‘रेरा’ की तर्ज पर एक विशेष प्राधिकरण (Authority) गठित करने का प्रावधान है।
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नक्शा स्वीकृति: यह प्राधिकरण ग्रामीण क्षेत्रों में बनने वाली बहुमंजिली इमारतों के नक्शे को मंजूरी देगा।
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बिल्डरों पर नकेल: 500 वर्गमीटर से अधिक क्षेत्र में प्रोजेक्ट बनाने वाले बिल्डरों को खुद को रजिस्टर करना होगा।
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पैसे की सुरक्षा: खरीदार द्वारा दी गई राशि का 70 फीसदी हिस्सा एक अलग खाते में रखना होगा, जिसका इस्तेमाल केवल उसी प्रोजेक्ट के निर्माण में किया जा सकेगा।
दो मंजिला मकान और आम लोगों को राहत
सरकार ने छोटे मकान बनाने वाले आम ग्रामीणों का भी ध्यान रखा है।
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छोटे निर्माण के लिए छूट: ग्रामीण इलाकों में 500 वर्गमीटर से कम क्षेत्र में बनने वाले भवन के लिए नक्शा पास कराना जरूरी नहीं होगा।
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एनओसी (NOC) की जरूरत: हालांकि, दो मंजिल से ऊंचे मकान बनाने के लिए संबंधित संस्था से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) लेना अनिवार्य होगा।
बिल्डर की जिम्मेदारी और खरीदारों के अधिकार
नई नियमावली में बिल्डरों को जवाबदेह बनाया गया है ताकि वे खरीदारों के साथ धोखाधड़ी न कर सकें।
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समय पर कब्जा: यदि बिल्डर समय पर मकान का कब्जा नहीं देता है, तो उसे खरीदार को ब्याज सहित हर्जाना देना पड़ सकता है।
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5 साल की गारंटी: निर्माण के 5 वर्षों के भीतर यदि भवन में कोई ढांचागत या तकनीकी कमी पाई जाती है, तो उसे ठीक करने की पूरी जिम्मेदारी बिल्डर की होगी और वह इसके लिए खरीदार से पैसे नहीं वसूल सकेगा।
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पारदर्शिता: बिल्डर को प्रोजेक्ट का लेआउट, सरकारी मंजूरी और काम की प्रगति की जानकारी सार्वजनिक करनी होगी।
कैसे लागू होगा नया नियम?
पंचायती राज निदेशक नवीन कुमार सिंह के अनुसार, नियमावली का प्रारूप मुख्यमंत्री के समक्ष प्रस्तुत किया जा चुका है। अब इसे विधि विभाग और उच्च स्तरीय कमेटी से मंजूरी मिलने के बाद राज्य मंत्रिपरिषद (कैबिनेट) को भेजा जाएगा। वहां से हरी झंडी मिलने के बाद इसे विधानमंडल से पारित कराकर पूरे राज्य में लागू कर दिया जाएगा।
खरीदारों की बढ़ेगी सुरक्षा
इस कदम से बिहार के गाँवों में होने वाले निर्माण कार्यों में पारदर्शिता आएगी। जहाँ एक ओर बिल्डरों की मनमानी रुकेगी, वहीं दूसरी ओर आम लोगों को सुरक्षित और बेहतर बुनियादी सुविधाओं के साथ मकान मिल सकेंगे।