BNT Desk: बिहार के भागलपुर में रविवार देर रात जो मंजर दिखा, उसने पूरे राज्य को चिंता में डाल दिया है। उत्तर और दक्षिण बिहार को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण विक्रमशिला सेतु अचानक क्षतिग्रस्त होकर गिर गया। इस बड़े संकट के बाद बिहार सरकार और पुल निर्माण निगम पूरी तरह एक्शन मोड में है। सोमवार को पटना में आयोजित एक आपात प्रेस कॉन्फ्रेंस में बिहार राज्य पुल निर्माण निगम के अध्यक्ष डॉ. चंद्रशेखर ने पुल की वर्तमान स्थिति और भविष्य की योजना पर विस्तार से जानकारी साझा की।
मरम्मत में लगेंगे 3 महीने:
पुल निगम के अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि पिलर नंबर 133 के पास हुए इस नुकसान की भरपाई कोई साधारण मरम्मत कार्य नहीं है।
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तकनीकी मदद: पुल के स्पैन को फिर से खड़ा करने और उसे सुरक्षित बनाने के लिए IIT पटना के विशेषज्ञों की टीम बुलाई गई है।
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सेना से संपर्क: मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से फोन पर बात की है। बिहार सरकार ने बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन (BRO) से तकनीकी सहयोग और भारी मशीनरी की मांग की है ताकि काम में तेजी लाई जा सके। रक्षा मंत्री ने हर संभव मदद का आश्वासन दिया है।
लापरवाही पर गिरी गाज:
हादसे के बाद प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। यह बात सामने आई है कि पिलर नंबर 133 में पहले भी खामियां पाई गई थीं, लेकिन भारी ट्रैफिक के कारण काम लटका रहा। इस लापरवाही की जिम्मेदारी तय करते हुए पुल निगम के कार्यपालक अभियंता (Executive Engineer) को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। अध्यक्ष ने साफ किया कि सुरक्षा मानकों से समझौता करने वाले किसी भी अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा।
दिसंबर तक मिलेगा ‘नया पुल’ का उपहार
भागलपुर और सीमांचल के लोगों के लिए इस संकट के बीच एक उम्मीद की किरण भी जगी है। डॉ. चंद्रशेखर ने घोषणा की कि गंगा नदी पर विक्रमशिला सेतु के बगल में बन रहे समानांतर नए पुल का काम युद्ध स्तर पर चल रहा है।
“इस साल दिसंबर तक नए पुल पर वाहनों का परिचालन हर हाल में शुरू कर दिया जाएगा।”
नया पुल शुरू होने से पुराने विक्रमशिला सेतु पर से ट्रैफिक का दबाव खत्म हो जाएगा और भविष्य में ऐसे हादसों का डर भी नहीं रहेगा।
प्रशासन की मुस्तैदी:
रविवार रात करीब 12:30 बजे जब पुल का स्लैब गिरना शुरू हुआ, तो वहां तैनात स्थानीय प्रशासन ने अद्भुत सूझबूझ दिखाई। रात 12 बजे के आसपास ही खतरे को भांपते हुए ट्रैफिक को पूरी तरह रोक दिया गया था। यदि पुलिस और प्रशासन ने कुछ मिनटों की भी देरी की होती, तो कई गाड़ियां गंगा में समा सकती थीं। इस त्वरित कार्रवाई के कारण किसी की जान नहीं गई।
यात्रियों के लिए जरूरी सूचना:
पुल टूटने के कारण अब यातायात व्यवस्था पूरी तरह बदल गई है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे इन वैकल्पिक रास्तों का चुनाव करें:
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मुंगेर रूट: खगड़िया और नवगछिया की ओर से आने वाले वाहनों को मुंगेर के श्रीकृष्ण सिंह सेतु की ओर मोड़ दिया गया है।
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नहीं बनेगा पीपा पुल: मानसून के आने की संभावना को देखते हुए प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि गंगा में पीपा पुल बनाना मुमकिन नहीं है क्योंकि पानी का स्तर बढ़ सकता है।
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स्टीमर सेवा: यात्रियों की सुविधा के लिए जल्द ही भागलपुर और नवगछिया के बीच स्टीमर और नाव सेवा शुरू की जाएगी ताकि लोग कम समय में गंगा पार कर सकें।
सुरक्षा सर्वोपरि
विक्रमशिला सेतु का टूटना बिहार की कनेक्टिविटी के लिए एक बड़ा झटका है, लेकिन सरकार की प्राथमिकता अब इसे स्थायी रूप से सुरक्षित बनाने की है। अगले तीन महीने भागलपुर के लिए चुनौतीपूर्ण होंगे, लेकिन नए पुल के वादे ने लोगों को भविष्य के लिए राहत जरूर दी है।