पप्पू पांडेय को बड़ी राहत: जमीन घोटाला मामले में कोर्ट ने गिरफ्तारी पर लगाई रोक, जानें क्या है पूरा विवाद

BiharNewsAuthor
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BNT Desk: बिहार की सियासत में ‘पावर गेम’ के लिए मशहूर गोपालगंज के कुचायकोट से जदयू विधायक अमरेंद्र कुमार पांडेय उर्फ पप्पू पांडेय के लिए राहत भरी खबर आई है। जमीन कब्जाने और भू-माफियाओं के साथ सांठगांठ के गंभीर आरोपों में घिरे विधायक को एमपी-एमएलए विशेष कोर्ट ने फिलहाल गिरफ्तारी से सुरक्षा दे दी है। इस फैसले ने न केवल पप्पू पांडेय बल्कि उनके सीए राहुल तिवारी को भी पुलिसिया कार्रवाई से तात्कालिक राहत पहुँचाई है।

कोर्ट में हुई जोरदार बहस

विधायक पप्पू पांडेय की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट में जबरदस्त गहमागहमी देखी गई। विधायक का पक्ष रखने के लिए बार काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष और दिग्गज वकील मनन मिश्रा खुद मैदान में उतरे। उन्होंने अदालत के सामने दलीलें पेश कीं, जिसके बाद कोर्ट ने अगली सुनवाई तक विधायक और उनके सीए की गिरफ्तारी पर स्टे (रोक) लगा दिया।

7 मई को होगा ‘अंतिम फैसला’

भले ही विधायक को अभी राहत मिल गई है, लेकिन यह कानूनी लड़ाई अभी लंबी चलने वाली है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 7 मई की तारीख मुकर्रर की है। इस दिन यह तय होगा कि विधायक को नियमित राहत मिलती है या पुलिस को उन्हें हिरासत में लेने की इजाजत दी जाएगी। जिला लोक अभियोजक देववंश गिरी ने पुष्टि की है कि फिलहाल गिरफ्तारी पर रोक प्रभावी रहेगी।

क्या है ‘जमीन घोटाला’ जिसने हिला दिया सिस्टम?

यह पूरा मामला गोपालगंज के मीरगंज थाना क्षेत्र के सेमराव गांव से जुड़ा है। गांव निवासी जितेंद्र कुमार राय ने एक प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई थी, जिसमें उन्होंने रसूखदार पांडेय परिवार पर गंभीर आरोप लगाए:

  • साजिश और जालसाजी: आरोप है कि विधायक पप्पू पांडेय, उनके भाई सतीश पांडेय और सीए राहुल तिवारी ने भू-माफियाओं के साथ मिलकर फर्जी कागजात तैयार किए।

  • जमीन कब्जा: सत्ता के रसूख का इस्तेमाल कर कीमती जमीनों को अवैध तरीके से हड़पने का इल्जाम है।

  • क्राइम और पॉलिटिक्स का कॉकटेल: पुलिस का मानना है कि इस खेल में सफेदपोशों और अपराधियों का एक बड़ा सिंडिकेट काम कर रहा है।

पुलिस की छापेमारी और ‘अंडरग्राउंड’ हुए विधायक

कोर्ट से राहत मिलने से पहले बिहार पुलिस इस मामले में काफी आक्रामक रुख अपनाए हुए थी। 14 अप्रैल की सुबह पुलिस ने एक बड़ा ऑपरेशन चलाया था।

  1. एक साथ कई शहरों में दबिश: गोपालगंज से लेकर पटना, वाराणसी और यहाँ तक कि गुरुग्राम (हरियाणा) तक पुलिस की टीमों ने छापेमारी की।

  2. पांच घंटे का सर्च ऑपरेशन: पुलिस ने विधायक के हर संभावित ठिकाने को खंगाला, लेकिन पप्पू पांडेय और उनके करीबी पहले ही अंडरग्राउंड (भूमिगत) हो चुके थे।

  3. एसपी का सख्त रुख: गोपालगंज के एसपी विनय तिवारी ने आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए विशेष टीमें बनाई थीं, लेकिन आरोपियों के फरार होने के कारण पुलिस के हाथ खाली रहे।

चार आरोपी पहले ही जा चुके हैं जेल

इस हाई-प्रोफाइल केस में पुलिस ने अब तक भोला पांडेय समेत चार लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। जेल में बंद इन आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर भी सुनवाई चल रही है, लेकिन फिलहाल उन्हें कोई राहत नहीं मिली है। विधायक के भाई सतीश पांडेय की अग्रिम जमानत याचिका पर भी सस्पेंस बना हुआ है।

7 मई का इंतजार

गोपालगंज का यह मामला अब सिर्फ एक कानूनी लड़ाई नहीं, बल्कि सियासी प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गया है। एक तरफ जहां विपक्ष इसे भ्रष्टाचार का बड़ा उदाहरण बता रहा है, वहीं विधायक समर्थकों का दावा है कि यह एक राजनीतिक साजिश है। अब सबकी निगाहें 7 मई की तारीख पर टिकी हैं, जब यह साफ होगा कि ‘पप्पू पांडेय’ की मुश्किलें बढ़ेंगी या उन्हें इस संकट से पूरी तरह मुक्ति मिल जाएगी।

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