पटना/बिहटा: बिहार में रियल एस्टेट और प्लॉटिंग के नाम पर धोखाधड़ी का जाल लगातार फैलता जा रहा है। हाल ही में ‘बिहार न्यूज़ टुडे’ के एक खुलासे में शीतल बिलटेक प्राइवेट लिमिटेड (Sheetal Buildtech Pvt Ltd) और उनकी योजना ‘शीतल ग्रीन सिटी’ (Shital Green City) की पोल खुली है। निवेशक अपनी गाढ़ी कमाई फंसाकर दर-दर भटकने को मजबूर हैं। सालों बीत जाने के बाद भी न तो जमीन का कब्जा मिला है और न ही कंपनी पैसा वापस करने को तैयार है।
क्या है पूरा मामला?
बिहार में राजधानी पटना और बिहटा के आसपास के इलाकों में प्लॉट डेवलपमेंट के नाम पर बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आ रहा है। शीतल बिलटेक प्राइवेट लिमिटेड नामक कंपनी ने निवेशकों को एक आलीशान टाउनशिप का सपना दिखाकर करोड़ों रुपये जमा कराए। निवेशकों का आरोप है कि कंपनी के मालिक अब फोन तक नहीं उठा रहे हैं और ऑफिस जाने पर बाउंसरों और गनमैन के जरिए उन्हें डराया-धमकाया जा रहा है।
एक निवेशक की आपबीती: ₹11 लाख फंसे, अब हाथ में कुछ नहीं
समस्तीपुर जिले के रोसरा निवासी प्रशांत भारद्वाज इस धोखाधड़ी के मुख्य भुक्तभोगियों में से एक हैं। उन्होंने बताया कि 2018 में उन्होंने बिहटा प्रोजेक्ट (पटना सिटी प्रोजेक्ट के तहत) में 2800 स्क्वायर फीट जमीन लेने का सौदा किया था।
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सपना और वादा: कंपनी ने वादा किया था कि 2022 तक रोड, बिजली, पानी और नाली जैसी सुविधाओं के साथ टाउनशिप विकसित कर दी जाएगी।
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भुगतान: प्रशांत ने अब तक कुल 11 लाख रुपये कंपनी को दिए हैं। इसमें इनिशियल बुकिंग अमाउंट के साथ-साथ 4 साल तक दी गई EMI भी शामिल है।
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धोखाधड़ी का तरीका: कंपनी ने 6 जून 2018 को जमीन की रजिस्ट्री तो कर दी, लेकिन दाखिल-खारिज (Mutation) आज तक नहीं हुआ। सबसे बड़ी चौकाने वाली बात यह है कि 2022 में दाखिल-खारिज के नाम पर कंपनी ने प्रशांत से उनकी ओरिजिनल रजिस्ट्री के कागजात भी ऑफिस में जमा करा लिए और बदले में सिर्फ एक रिसीविंग थमा दी।
आज स्थिति यह है कि प्रशांत के पास न तो जमीन है, न पैसा और न ही जमीन के असली कागज।

साइट पर विकास के नाम पर ‘जीरो’
जब निवेशक साइट पर जाकर देखते हैं, तो वहां किसी भी प्रकार का विकास कार्य नहीं दिखता। प्रशांत के अनुसार, “2026 चल रहा है, लेकिन साइट पर आज भी सिर्फ खाली खेत है। न कोई सड़क बनी है, न बिजली के पोल लगे हैं। सिर्फ एक मुख्य गेट लगा दिया गया है ताकि नए ग्राहकों को फंसाया जा सके।”
मैनेजमेंट का अड़ियल रवैया और गनमैन का खौफ
निवेशकों का कहना है कि शीतल बिलटेक के निदेशक अब किसी से मिलते नहीं हैं। कंपनी का पुराना स्टाफ काम छोड़ चुका है और नए कर्मचारी कोई जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं हैं।
प्रशांत भारद्वाज ने वीडियो इंटरव्यू के दौरान बताया कि “कंपनी के डायरेक्टर गनमैन और बॉडीगार्ड्स के साथ चलते हैं। एक आम आदमी के लिए उनसे मिलना या अपनी बात रखना नामुमकिन हो गया है। वे एक तरह से डर का माहौल बनाकर रखते हैं।”
निवेशकों की मांग: ‘ब्याज समेत पैसा वापस मिले’
सालों तक इंतजार करने और मानसिक प्रताड़ना झेलने के बाद अब निवेशक जमीन की उम्मीद छोड़ चुके हैं। प्रशांत का कहना है कि उन्हें अब केवल अपना पैसा चाहिए। उन्होंने मांग की है कि बैंक के वर्तमान ब्याज दर (5-6%) के साथ उनकी मूल राशि वापस की जाए ताकि वे अपने भविष्य के बारे में सोच सकें।
प्रशासन और सरकार से अपील
यह मामला सिर्फ एक निवेशक का नहीं है, बल्कि सैकड़ों लोग शीतल ग्रीन सिटी के इस जाल में फंसे हो सकते हैं।
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रेरा (RERA Bihar): क्या इस प्रोजेक्ट का रेरा में रजिस्ट्रेशन है? अगर है, तो रेरा इस पर कार्रवाई क्यों नहीं कर रहा?
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बिहार सरकार: निवेशकों ने मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री से अपील की है कि वे इस तरह की फर्जी प्लॉटिंग कंपनियों पर नकेल कसें ताकि बिहार के आम नागरिक अपनी मेहनत की कमाई न गंवाएं।
सावधान रहें: जमीन खरीदने से पहले इन बातों का ध्यान रखें
अगर आप भी पटना या बिहार के किसी अन्य हिस्से में प्लॉट खरीद रहे हैं, तो इन बिंदुओं की जांच जरूर करें:
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RERA रजिस्ट्रेशन: सुनिश्चित करें कि प्रोजेक्ट रेरा से अप्रूव्ड है।
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दाखिल-खारिज: केवल रजिस्ट्री काफी नहीं है, दाखिल-खारिज की प्रक्रिया तुरंत पूरी करें।
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ओरिजिनल पेपर: कभी भी अपनी ओरिजिनल रजिस्ट्री कंपनी को वापस न सौंपें।
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साइट विजिट: विज्ञापनों पर भरोसा करने के बजाय खुद साइट पर जाकर हकीकत देखें।
शीतल ग्रीन सिटी का मामला बिहार में रियल एस्टेट सेक्टर की काली सच्चाई को उजागर करता है। यदि समय रहते प्रशासन ने हस्तक्षेप नहीं किया, तो प्रशांत जैसे सैकड़ों निवेशक सड़क पर आ जाएंगे। ‘बिहार न्यूज़ टुडे’ इस मामले को लगातार उठाता रहेगा।
पटना से परमबीर सिंह की रिपोर्ट
यहां आप पूरा इंटरव्यू देख सकते हैं –