BNT Desk: बिहार में शिक्षा के नाम पर व्यापार चलाने वाले निजी स्कूलों के खिलाफ जिला प्रशासन ने मोर्चा खोल दिया है। कटिहार जिले में स्कूलों की मनमानी और अभिभावकों के आर्थिक शोषण की शिकायतों के बाद जिला प्रशासन ने एक बेहद सख्त रुख अपनाया है। सालों से री-एडमिशन, महंगी किताबें और ड्रेस के नाम पर हो रही अवैध वसूली पर अब जिलाधिकारी के आदेश के बाद लगाम लगने की उम्मीद है।
अभिभावकों का आक्रोश: सड़क से कलेक्ट्रेट तक गुहार
पिछले कुछ हफ्तों से कटिहार के कई बड़े निजी स्कूलों के खिलाफ अभिभावकों का गुस्सा उबल रहा था। ‘अभिभावक संघ’ के नेतृत्व में सैकड़ों माता-पिता ने अपनी आवाज बुलंद की। उनका सीधा आरोप था कि नया सत्र शुरू होते ही स्कूल प्रशासन ‘री-एडमिशन’ के नाम पर हजारों रुपये की डिमांड कर रहा है, जो कि पूरी तरह गैरकानूनी है। अभिभावकों का कहना था कि हर साल कक्षा बदलने पर भारी शुल्क देना उनकी कमर तोड़ रहा है।
सिंडिकेट का पर्दाफाश: ‘तय दुकान’ से ही सामान खरीदने का दबाव
शिकायत में सबसे गंभीर मुद्दा स्कूलों और दुकानदारों के बीच बने ‘नेक्सस’ (सिंडिकेट) का था। अभिभावकों ने जिलाधिकारी को बताया कि स्कूल प्रबंधन की ओर से उन्हें पर्चियां थमा दी जाती हैं, जिन पर खास दुकानों के नाम लिखे होते हैं। बच्चों की किताबें, कॉपियां, स्कूल बैग और यहाँ तक कि यूनिफॉर्म भी उन्हीं दुकानों से खरीदने का आदेश दिया जाता है। इन दुकानों पर सामान की कीमत बाजार से कई गुना ज्यादा होती है, लेकिन स्कूलों के दबाव के कारण अभिभावक कहीं और से सामान नहीं ले पाते।
जिलाधिकारी का कड़ा रुख: जारी हुए सख्त निर्देश
मामले की गंभीरता को भांपते हुए कटिहार जिलाधिकारी ने तुरंत उच्च स्तरीय बैठक बुलाई और स्पष्ट आदेश जारी कर दिए। जिलाधिकारी ने अपने आदेश में साफ कहा है कि:
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री-एडमिशन शुल्क पर पाबंदी: किसी भी छात्र से कक्षा प्रोन्नति (Promotion) के नाम पर दोबारा प्रवेश शुल्क नहीं लिया जाएगा।
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बाजार की आजादी: अभिभावक कहीं से भी किताबें और ड्रेस खरीदने के लिए स्वतंत्र हैं। कोई भी स्कूल किसी खास ब्रांड या दुकान का नाम अनिवार्य नहीं कर सकता।
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फीस पारदर्शिता: स्कूलों को अपनी फीस संरचना में पारदर्शिता लानी होगी और शिक्षा के अधिकार (RTE) के नियमों का पालन करना होगा।
RTE नियमों का उल्लंघन पड़ेगा भारी
प्रशासन ने चेतावनी दी है कि जो स्कूल इन नियमों की अनदेखी करेंगे, उनकी मान्यता रद्द करने तक की कार्रवाई की जा सकती है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे स्कूलों का औचक निरीक्षण करें और अभिभावकों से फीडबैक लें। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम (Right to Education Act) केवल कागजों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे धरातल पर उतारा जाएगा।
बिहार के अन्य जिलों में भी उठ रही मांग
कटिहार में हुई इस कार्रवाई के बाद बिहार के अन्य जिलों जैसे पटना, पूर्णिया और भागलपुर में भी अभिभावकों की उम्मीदें जाग गई हैं। सोशल मीडिया पर लोग कटिहार प्रशासन के इस फैसले की सराहना कर रहे हैं और मांग कर रहे हैं कि इसे पूरे राज्य में एक समान कानून के तौर पर लागू किया जाना चाहिए।
अभिभावकों को बड़ी राहत की उम्मीद
इस प्रशासनिक एक्शन के बाद कटिहार के हजारों परिवारों ने राहत की सांस ली है। अभिभावक संघ का कहना है कि यह उनकी एक बड़ी जीत है, लेकिन प्रशासन को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि स्कूल पिछले दरवाजे से किसी और नाम पर वसूली न शुरू कर दें। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि स्कूल प्रबंधन इन आदेशों को कितनी ईमानदारी से लागू करते हैं।