BNT Desk: बिहार के पूर्वी चंपारण (मोतिहारी) में हुई जहरीली शराब की घटना ने एक बार फिर पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया है। इस दुखद हादसे पर बिहार के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) विनय कुमार ने एक सनसनीखेज बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पुलिस ने समय रहते जो कार्रवाई की, उसने एक बहुत बड़ी त्रासदी को होने से रोक लिया। अगर अवैध शराब और उसमें इस्तेमाल होने वाला रसायन जब्त नहीं होता, तो मरने वालों का आंकड़ा कल्पना से बाहर हो सकता था।
मौत का आंकड़ा और वर्तमान स्थिति
मोतिहारी में जहरीली शराब पीने से अब तक 9 लोगों की मौत हो चुकी है। कई अन्य लोग अभी भी विभिन्न अस्पतालों में अपनी जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं। इनमें से कुछ की हालत काफी नाजुक बनी हुई है। घटना की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह अलर्ट पर है।
डीजीपी का बयान: “बड़ी त्रासदी टली”
डीजीपी विनय कुमार ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि मोतिहारी में जो हुआ वह बेहद दुखद है, लेकिन पुलिस की तत्परता ने इसे ‘नरसंहार’ बनने से रोक लिया। उन्होंने कहा:
“अगर समय रहते पुलिस छापेमारी कर शराब की खेप जब्त नहीं करती, तो मौतों का तांडव मच जाता। जितनी मात्रा में जहरीला सामान बरामद हुआ है, वह हजारों लोगों की जान लेने के लिए काफी था।”
1500 लीटर मेथेनॉल की बरामदगी: एक डरावना सच
जांच के दौरान पुलिस के हाथ सबसे बड़ी कामयाबी तब लगी जब उन्होंने करीब 1500 लीटर मेथेनॉल बरामद किया।
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खतरा: मेथेनॉल की यह मात्रा हजारों लीटर जहरीली शराब बनाने के लिए पर्याप्त थी।
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पुलिस की सक्रियता: यदि यह रसायन बाजार में पहुंच जाता और इससे शराब तैयार कर दी जाती, तो मोतिहारी के घर-घर में मातम पसर सकता था।
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जब्ती: पुलिस ने न केवल तैयार शराब, बल्कि इसके कच्चे माल के पूरे नेटवर्क पर चोट की है।
पुलिस का ‘एक्शन मोड’ और SIT का गठन
घटना के तुरंत बाद मुख्यमंत्री के निर्देश पर बिहार पुलिस पूरी तरह एक्शन मोड में आ गई है।
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एसआईटी (SIT) का गठन: मामले की तह तक जाने और इसके पीछे के मास्टरमाइंड को पकड़ने के लिए एक विशेष जांच दल का गठन किया गया है।
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गिरफ्तारियां: डीजीपी ने बताया कि मुख्य आरोपियों को हिरासत में ले लिया गया है और उनसे पूछताछ जारी है।
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राज्यव्यापी छापेमारी: मोतिहारी ही नहीं, बल्कि आसपास के जिलों और पूरे बिहार में अवैध शराब के ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की जा रही है।
मेथेनॉल: आखिर क्यों यह बन जाता है “धीमा जहर”?
इस पूरी घटना के केंद्र में ‘मेथेनॉल’ नामक रसायन है। आम तौर पर औद्योगिक कार्यों में इस्तेमाल होने वाला यह केमिकल शराब में मिलते ही उसे जहर बना देता है। इसके खतरनाक प्रभाव कुछ इस प्रकार हैं:
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लीवर पर हमला: शरीर में जाते ही लीवर इसे ‘फॉर्मिक एसिड’ में बदल देता है, जो कोशिकाओं के लिए विनाशकारी है।
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अंधापन: इसकी थोड़ी सी भी मात्रा आंखों की रोशनी हमेशा के लिए छीन सकती है।
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अंगों का फेल होना: यह शरीर के महत्वपूर्ण अंगों जैसे किडनी और फेफड़ों को तुरंत निष्क्रिय कर देता है।
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लक्षण: सेवन के कुछ घंटों बाद सिरदर्द, धुंधला दिखना, उल्टी और अंततः कोमा या मौत हो जाती है।
प्रशासन की अपील और भविष्य की रणनीति
डीजीपी विनय कुमार ने साफ कर दिया है कि इस मामले में किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। चाहे वह शराब माफिया हो या ड्यूटी में लापरवाही बरतने वाला कोई अधिकारी। साथ ही, पुलिस ने आम जनता से भी अपील की है कि वे अवैध शराब की जानकारी तुरंत साझा करें ताकि ऐसी घटनाओं को दोबारा होने से रोका जा सके।