नालंदा में कोहराम के बाद बड़ी कार्रवाई: शीतला मंदिर भगदड़ मामले में थानाध्यक्ष सस्पेंड, सुरक्षा में भारी लापरवाही उजागर

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BNT Desk: बिहार के नालंदा जिले के दीपनगर थाना क्षेत्र स्थित मधड़ा शीतला मंदिर में चैत्र माह के अंतिम मंगलवार को हुई हृदयविदारक घटना ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया है। मंदिर परिसर में मची भीषण भगदड़ में 8 महिलाओं की मौत के बाद प्रशासन अब पूरी तरह एक्शन मोड में है। सुरक्षा व्यवस्था में अक्षम्य लापरवाही बरतने के आरोप में नालंदा एसपी भारत सोनी ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दीपनगर थानाध्यक्ष राजमणि को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है।

प्रशासनिक स्तर पर की गई यह कार्रवाई उन सवालों का जवाब है जो इस हादसे के बाद सुरक्षा इंतजामों पर खड़े हो रहे थे।

चौकीदार के भरोसे था हजारों का रेला: जांच में चौंकाने वाले खुलासे

हादसे के बाद हुई शुरुआती जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, वे बेहद चौंकाने वाले और विचलित करने वाले हैं। जांच रिपोर्ट के अनुसार:

  • सुरक्षा में चूक: जिस समय मंदिर में हजारों श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही थी, उस वक्त वहां की सुरक्षा व्यवस्था केवल एक चौकीदार के भरोसे छोड़ दी गई थी।

  • सूचना का अभाव: भीड़ के बेकाबू होने और स्थिति बिगड़ने के बावजूद थानाध्यक्ष ने समय रहते अपने वरीय अधिकारियों को इसकी जानकारी नहीं दी।

  • भीड़ नियंत्रण की विफलता: चैत्र माह के अंतिम मंगलवार का धार्मिक महत्व देखते हुए पुलिस को पहले से अंदाजा होना चाहिए था कि भारी भीड़ जुटेगी, लेकिन मौके पर पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती नहीं की गई थी।

इसी लापरवाही का नतीजा यह हुआ कि मंदिर परिसर में अचानक भगदड़ मची और देखते ही देखते 8 महिलाओं की जान चली गई, जबकि दर्जनों लोग घायल हो गए।

आक्रोश के बीच एक्शन: परिजनों ने लगाए थे गंभीर आरोप

घटना के बाद से ही मृतकों के परिजनों और स्थानीय ग्रामीणों में भारी गुस्सा देखा जा रहा था। लोगों का सीधा आरोप था कि पुलिस और प्रशासन ने इस आयोजन को हल्के में लिया। आक्रोशित भीड़ ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की थी। जनता के इसी भारी दबाव और प्राथमिक जांच में मिली खामियों को देखते हुए एसपी ने थानाध्यक्ष पर गाज गिराई है।

SIT करेगी मामले की तहकीकात

प्रशासन इस मामले को केवल निलंबन तक ही सीमित नहीं रखना चाहता। पूरे घटनाक्रम की गहराई से जांच के लिए डीएसपी के नेतृत्व में एक विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया गया है।

  • उच्च स्तरीय मुआयना: आईजी (IG) स्तर के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी घटनास्थल का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया है और साक्ष्य जुटाए हैं।

  • जवाबदेही तय: एसआईटी यह पता लगाएगी कि मंदिर समिति और स्थानीय प्रशासन के बीच समन्वय की कमी कहाँ रही और क्या इस हादसे को रोका जा सकता था।

मुआवजे और घायलों का हाल

राज्य सरकार और जिला प्रशासन की ओर से मृतकों के परिजनों के लिए मुआवजे की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। वहीं, विभिन्न अस्पतालों में भर्ती घायलों की स्थिति पर भी नजर रखी जा रही है। जिला प्रशासन ने भविष्य में ऐसे धार्मिक आयोजनों के लिए नई गाइडलाइन्स जारी करने की बात कही है ताकि दोबारा मधड़ा जैसी त्रासदी न दोहराई जाए।

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