बिहार में राजस्व अधिकारियों की हड़ताल पर सख्ती: 25 मार्च शाम 5 बजे तक अल्टीमेटम, नहीं लौटे तो नौकरी पर खतरा

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BNT Desk: बिहार में पिछले कई दिनों से चल रही राजस्व अधिकारियों की सामूहिक छुट्टी अब एक बड़े प्रशासनिक संकट में बदल गई है। 9 मार्च से अपनी मांगों को लेकर अड़े अधिकारियों को नीतीश सरकार ने अब ‘करो या मरो’ वाली स्थिति में खड़ा कर दिया है। उपमुख्यमंत्री और राजस्व मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने साफ कर दिया है कि अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सरकार ने घोषणा की है कि जो अधिकारी 25 मार्च की शाम 5 बजे तक अपने कार्यालय नहीं लौटेंगे, उनके खिलाफ सेवा समाप्ति तक की कार्रवाई की जा सकती है।

9 मार्च से ठप है काम: आखिर क्या हैं मांगें?

बिहार राजस्व सेवा के अधिकारी अपनी सेवा शर्तों में सुधार, पदोन्नति (Promotion) के स्पष्ट रास्ते और कार्यस्थल पर सुरक्षा जैसे मुद्दों को लेकर सामूहिक अवकाश पर चले गए थे। अधिकारियों का तर्क है कि उन पर काम का बोझ अत्यधिक है और संसाधन सीमित। हालांकि, सरकार ने इस विरोध के तरीके को शुरू से ही ‘अवैध’ करार दिया है। विभाग के अपर सचिव आजीव वत्सराज द्वारा जारी पत्र में स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि अनुपस्थित रहने वालों पर “सेवा टूट” (Break in Service) की कार्रवाई होगी, जिससे उनकी वरिष्ठता और पेंशन पर सीधा असर पड़ेगा।

आम बिहारी की बढ़ी मुश्किलें: जमीन के काम अटके

बिहार जैसे राज्य में, जहाँ 60% से अधिक दीवानी मामले जमीन विवाद से जुड़े होते हैं, वहाँ राजस्व कार्यालयों का बंद होना किसी आपदा से कम नहीं है।

  • दाखिल-खारिज (Mutation): हजारों आवेदन लंबित पड़े हैं।

  • जमीन की मापी और प्रमाण पत्र: एलपीसी (LPC) और अन्य जरूरी कागजातों के लिए लोग प्रखंड मुख्यालयों के चक्कर काट रहे हैं। पटना से लेकर पूर्णिया और सीतामढ़ी तक, हर जिले में आम जनता इस खींचतान के बीच पिस रही है। जमीन की खरीद-बिक्री से लेकर बैंक लोन तक के काम रुक गए हैं।

सरकार का दावा: 50% अधिकारी अभी भी काम पर

हड़ताल के बीच सरकार ने अपनी मजबूती दिखाने के लिए आंकड़े भी पेश किए हैं। मंत्री विजय कुमार सिन्हा का कहना है कि विभाग पूरी तरह ठप नहीं हुआ है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, हड़ताल की अवधि के दौरान भी 12,163 दाखिल-खारिज के मामलों का निपटारा किया गया है। सरकार यह संदेश देना चाहती है कि वह हड़ताली अधिकारियों के आगे झुकने वाली नहीं है और वैकल्पिक व्यवस्था के जरिए जनता के काम किए जा रहे हैं।

अनुशासनिक कार्रवाई की तलवार: क्या है ‘सेवा टूट’?

सरकार ने जो ‘सेवा टूट’ की चेतावनी दी है, वह किसी भी सरकारी कर्मचारी के लिए सबसे डरावनी स्थिति होती है। इसका मतलब है कि कर्मचारी की पिछली पूरी सेवा को शून्य माना जा सकता है, जिससे भविष्य में मिलने वाले लाभ खत्म हो जाते हैं। इसके साथ ही:

  1. वेतन कटौती: काम नहीं तो वेतन नहीं (No Work No Pay) का नियम लागू होगा।

  2. विभागीय जांच: हड़ताल का नेतृत्व करने वालों पर विभागीय मुकदमा चलाया जाएगा।

  3. नई नियुक्तियां: सरकार ने संकेत दिए हैं कि जरूरत पड़ने पर संविदा या वैकल्पिक माध्यमों से रिक्तियों को भरा जाएगा।

राजनीतिक छवि का सवाल

बिहार में आगामी राजनीतिक बदलावों और बड़े सरकारी आयोजनों के बीच राजस्व विभाग का इस तरह बिखरना सरकार की छवि के लिए ठीक नहीं है। विपक्ष इस मुद्दे को ‘प्रशासनिक विफलता’ के तौर पर भुनाने की कोशिश कर रहा है। यही कारण है कि विजय कुमार सिन्हा और पूरी कैबिनेट ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाया है ताकि एक कड़ा संदेश दिया जा सके।

 25 मार्च की शाम तय करेगी भविष्य

अब सबकी नजरें 25 मार्च की शाम 5 बजे की डेडलाइन पर टिकी हैं। क्या अधिकारी नौकरी खोने के डर से झुकेंगे? या फिर बिहार में एक नया और बड़ा आंदोलन जन्म लेगा? इस पूरी लड़ाई में जीत चाहे जिसकी हो, लेकिन हार उस आम आदमी की हो रही है जो उम्मीद की पोटली बांधे सरकारी दफ्तर की चौखट पर बैठा है।

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