बिहार के शहरों में सस्ती हुई बिजली: 1 अप्रैल से बदलेगा बिल का हिसाब, 125 यूनिट के बाद भी मिलेगी राहत; 27 लाख उपभोक्ताओं को फायदा
बिहार विद्युत विनियामक आयोग ने शहरी घरेलू उपभोक्ताओं के लिए एक स्लैब लागू करने का फैसला किया, बिजली कंपनी का 35 पैसे बढ़ोतरी का प्रस्ताव खारिज; 225 यूनिट खर्च करने वाले परिवार को हर महीने 153 रुपये की बचत
पटना, 18 मार्च। बिहार के शहरों में रहने वाले करोड़ों बिजली उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत की खबर आई है। बिहार विद्युत विनियामक आयोग ने एक ऐतिहासिक फैसले में शहरी घरेलू उपभोक्ताओं के लिए बिजली दरों में बड़ा बदलाव किया है। अब शहरों में रहने वाले लोगों को भी गांवों जैसी दर पर बिजली मिलेगी। यह नई व्यवस्था 1 अप्रैल 2026 से पूरे राज्य में लागू हो जाएगी। इससे पहले बिजली कंपनियों ने दरें बढ़ाने का प्रस्ताव रखा था, लेकिन आयोग ने उसे सिरे से खारिज कर दिया।
दो स्लैब की उलझन खत्म, अब एक ही दर
अब तक शहरी उपभोक्ताओं को दो अलग-अलग स्लैब के हिसाब से बिजली बिल देना पड़ता था। पहले 100 यूनिट तक एक दर से और उसके बाद अलग और अधिक दर से बिल लिया जाता था। इस दोहरी व्यवस्था के कारण अधिक बिजली खर्च करने वाले परिवारों पर बोझ ज्यादा पड़ता था। आयोग ने इस जटिल व्यवस्था को पूरी तरह खत्म करते हुए एक समान स्लैब लागू करने का फैसला किया है। नई दर लागू होने के बाद उपभोक्ताओं को प्रति यूनिट 1.53 रुपये तक की राहत मिलेगी। इसका सबसे अधिक फायदा उन परिवारों को होगा जो हर महीने 125 यूनिट की मुफ्त सीमा से अधिक बिजली का उपयोग करते हैं।
बिजली कंपनी का बढ़ोतरी का प्रस्ताव खारिज
आयोग के इस फैसले से पहले बिजली कंपनियों ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 35 पैसे प्रति यूनिट दर बढ़ाने का प्रस्ताव रखा था। लेकिन सुनवाई के दौरान जब यह सामने आया कि कंपनियां पहले से मुनाफे में चल रही हैं, तो आयोग ने दरें बढ़ाने की मांग को अस्वीकार कर दिया। आयोग के अध्यक्ष आमिर सुबहानी और अन्य सदस्यों की मौजूदगी में यह निर्णय लिया गया। आयोग ने स्पष्ट किया कि जब कंपनी घाटे में न हो तो उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ डालना उचित नहीं है।
125 यूनिट तक मुफ्त, उसके बाद भी राहत
राज्य में पहले से लागू योजना के तहत 125 यूनिट तक बिजली मुफ्त दी जा रही है और इसका लाभ ग्रामीण व शहरी दोनों क्षेत्रों के उपभोक्ताओं को मिल रहा है। हालांकि शहरों में औसत बिजली खपत अधिक होती है और एक सामान्य शहरी परिवार हर महीने 200 से 225 यूनिट तक बिजली इस्तेमाल करता है। नई दर लागू होने के बाद यदि कोई परिवार 225 यूनिट बिजली खर्च करता है तो उसे 125 यूनिट का कोई भुगतान नहीं करना होगा और बाकी 100 यूनिट पर भी पहले के मुकाबले काफी कम बिल देना होगा।
जानें आपको कितने रुपये की होगी बचत
आयोग के इस फैसले का असर सीधे आपकी जेब पर दिखेगा। जो परिवार हर महीने 225 यूनिट बिजली खर्च करते हैं उन्हें लगभग 153 रुपये की मासिक बचत होगी। वहीं जो परिवार 300 यूनिट तक बिजली इस्तेमाल करते हैं उन्हें हर महीने करीब 268 रुपये तक की राहत मिल सकती है। यह बचत सीधे बिजली बिल में दिखाई देगी और किसी अलग आवेदन या प्रक्रिया की जरूरत नहीं होगी।
व्यावसायिक उपभोक्ताओं को भी मिलेगा फायदा
इस फैसले का असर सिर्फ घरेलू उपभोक्ताओं तक सीमित नहीं रहेगा। ग्रामीण क्षेत्रों के व्यावसायिक उपभोक्ताओं को प्रति यूनिट 42 पैसे की राहत मिलेगी, जिससे छोटे दुकानदारों और कारोबारियों को फायदा होगा। वहीं शहरी व्यावसायिक उपभोक्ताओं को 1.20 रुपये प्रति यूनिट तक सस्ती बिजली मिलेगी। इससे शहरों में छोटे और मझोले व्यापारियों के मासिक खर्च में भी उल्लेखनीय कमी आएगी। कुल मिलाकर पूरे राज्य में करीब 27 लाख उपभोक्ता इस फैसले से सीधे लाभान्वित होंगे।
मध्यम वर्ग के लिए सबसे बड़ी राहत
महंगाई के इस दौर में जहां हर चीज की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, बिजली दरों में यह कटौती शहरों में रहने वाले मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए किसी राहत से कम नहीं है। बिजली बिल हर घर का एक बड़ा मासिक खर्च होता है और इसमें सीधी बचत परिवार के बजट पर सकारात्मक असर डालेगी। उपभोक्ता संगठनों ने भी इस फैसले का स्वागत करते हुए आयोग की सराहना की है। 1 अप्रैल से लागू होने वाली इस नई व्यवस्था का असर अप्रैल के बिजली बिल से ही दिखने लगेगा।