नीतीश के बाद कौन संभालेगा बिहार की कमान? CM-Deputy CM का फॉर्मूला लगभग तय

बिहार की राजनीति में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के संभावित इस्तीफे और सत्ता परिवर्तन की चर्चा तेज हो गई है। सूत्रों के अनुसार अप्रैल में नेतृत्व बदलाव की संभावना जताई जा रही है। नए मुख्यमंत्री के लिए सम्राट चौधरी का नाम चर्चा में है, हालांकि अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

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BNT Desk: कहते हैं कि “जब हाथी चलेला, त रस्ता अपने आप बन जाला।” नीतीश कुमार पिछले दो दशकों से बिहार की राजनीति के वही ‘हाथी’ रहे हैं। लेकिन अब खबर है कि यह हाथी अपनी जगह से उठने वाला है। सूत्रों की मानें तो 8 या 9 अप्रैल को नीतीश कुमार न केवल मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देंगे, बल्कि विधान परिषद की सदस्यता भी छोड़ देंगे। यह बिहार की राजनीति में एक युग के समापन की शुरुआत है।

सत्ता का नया समीकरण: अब ‘बड़े भाई’ की भूमिका में BJP

इस बार सत्ता की नाव वही है, लेकिन पतवार बदल गई है। अब तक जेडीयू बड़े भाई की भूमिका में थी, लेकिन नई सरकार में भाजपा ड्राइविंग सीट पर होगी। गृह विभाग और विधानसभा अध्यक्ष जैसे शक्तिशाली पद भाजपा के पास रहेंगे। जेडीयू को दो डिप्टी सीएम और 15 मंत्री पद मिलने की चर्चा है। चिराग पासवान, मांझी और कुशवाहा गुट को भी कैबिनेट में जगह देकर एनडीए के कुनबे को एकजुट रखने की पूरी तैयारी है।

निशांत कुमार की एंट्री: विरासत का नया चेहरा

राजनीति से दूर रहने वाले नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार अब मैदान में उतरने को तैयार हैं। पिता की खाली हुई सीट पर उपचुनाव लड़कर वे सदन पहुँचेंगे और उन्हें डिप्टी सीएम बनाया जा सकता है। धीरे-धीरे जेडीयू की पूरी कमान उन्हें सौंपने की योजना है, ताकि नीतीश के बाद भी पार्टी का भविष्य उनके परिवार के इर्द-गिर्द सुरक्षित रहे।

सम्राट चौधरी: बिहार के अगले ‘कप्तान’?

मुख्यमंत्री की रेस में सबसे आगे सम्राट चौधरी का नाम चल रहा है। भाजपा और जेडीयू यहाँ ‘लव-कुश’ (कुर्मी-कुशवाहा) समीकरण को साधने की कोशिश में हैं। सम्राट चौधरी का नेतृत्व और निशांत कुमार का साथ इस गठबंधन को नई मजबूती दे सकता है। नीतीश कुमार ने भी संकेत दिए हैं कि दूसरे डिप्टी सीएम के रूप में कोई महिला चेहरा सामने आ सकता है।

आधिकारिक घोषणा का इंतजार

फिलहाल इन सभी बातों को राजनीतिक चर्चा और संभावनाओं के तौर पर ही देखा जा रहा है। जब तक किसी तरह की आधिकारिक घोषणा नहीं होती, तब तक इसे अंतिम फैसला नहीं माना जा सकता।

 

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