रक्सौल की अक्षरा गुप्ता बनीं बिहार की ‘फीमेल वैभव सूर्यवंशी’, 126 गेंदों में ठोके नाबाद 306 रन

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BNT Desk: बिहार के क्रिकेट जगत में वैभव सूर्यवंशी के बाद अब एक और नाम तेजी से उभर रहा है—अक्षरा गुप्ता। महज 15 साल की उम्र में अक्षरा ने अपनी बल्लेबाजी से देशभर का ध्यान अपनी ओर खींचा है। रक्सौल जैसे छोटे शहर से आने वाली अक्षरा ने सुविधाओं के अभाव के बावजूद अपने खेल को जिस ऊँचाई पर पहुँचाया है, वह उनकी कड़ी मेहनत और जुनून को दर्शाता है।

रिकॉर्डतोड़ बल्लेबाजी और अद्भुत स्ट्राइक रेट

अक्षरा की चर्चा का मुख्य कारण उनका हालिया प्रदर्शन है। बिहार विमेंस अंडर-19 वनडे ट्रॉफी के दौरान, उन्होंने भागलपुर में 126 गेंदों पर नाबाद 306 रनों की ऐतिहासिक पारी खेली। इस दौरान उनका स्ट्राइक रेट 242.86 रहा और उन्होंने अपनी पारी में 55 चौके व 8 छक्के जड़े। एक ही सीजन में बीसीसीआई के चारों आयु वर्ग (U-15, U-19 T20, U-19 वनडे और U-23) के टूर्नामेंट खेलने वाली वे बिहार की पहली महिला क्रिकेटर बनीं।

संघर्ष और सफलता की कहानी

अक्षरा की सफलता का ग्राफ 2024 में तेजी से बढ़ा। बिहार अंडर-19 टीम में चयन के कुछ ही समय बाद, महज 14 साल की उम्र में उन्हें कप्तानी सौंप दी गई। उन्होंने हरियाणा और पंजाब जैसी मजबूत टीमों के खिलाफ शानदार अर्धशतक जड़कर अपनी पहचान बनाई। इसका परिणाम उन्हें फरवरी 2026 में मिला, जब वे बिहार की सीनियर महिला टीम के लिए खेलने वाली सबसे कम उम्र की खिलाड़ी बनीं।

क्यों कहा जा रहा है ‘फीमेल वैभव सूर्यवंशी’?

अक्षरा को सोशल मीडिया पर ‘फीमेल वैभव सूर्यवंशी’ का खिताब दिया गया है। इसके पीछे के प्रमुख कारण ये हैं:

  • प्रांत: दोनों बिहार से ताल्लुक रखते हैं।

  • शैली: दोनों बाएं हाथ के बल्लेबाज हैं।

  • दृष्टिकोण: दोनों ही पहली गेंद से गेंदबाजों पर हावी होने और आक्रामक बल्लेबाजी करने में विश्वास रखते हैं।

 

प्रेरणा और भविष्य का सपना

अक्षरा की सबसे बड़ी प्रेरणा स्मृति मंधाना की बेहतरीन टाइमिंग और विराट कोहली की आक्रामक मानसिकता है। रक्सौल में अपने घर के पीछे बनी पिच पर प्रतिदिन 5 घंटे का कड़ा अभ्यास करने वाली अक्षरा का सपना अब भारतीय महिला टीम की नीली जर्सी पहनना है। अभावों से लड़कर शिखर तक पहुँचने की उनकी यह कहानी साबित करती है कि दृढ़ इच्छाशक्ति हो तो मंजिल को पाना निश्चित है।

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