BNT Desk : विजयादशमी के मौके पर दिल्ली में रावण दहन कार्यक्रम में शामिल हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में है। कार्यक्रम के दौरान पीएम मोदी ने धनुष-बाण चलाकर रावण दहन की रस्म निभाई। हालांकि, भगवान राम का किरदार निभाने वाले कलाकार की मौजूदगी में प्रधानमंत्री के तीर चलाने के दृश्य पर कुछ यूजर्स ने व्यंग्य किया। वहीं, कई लोगों ने इसे धार्मिक आयोजनों में निभाई जाने वाली पुरानी परंपरा बताते हुए उनका बचाव भी किया।
‘भगवान राम बैठे रहें और रावण का वध कोई और करे’
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक यूजर @Jyotsna51400 ने इस दृश्य पर तंज कसते हुए लिखा कि भगवान राम बैठे रहे और मोदी जी ने रावण को मार दिया। पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर प्रतिक्रियाएं आने लगीं।कुछ यूजर्स ने कार्यक्रम के तरीके पर सवाल उठाए, तो कुछ ने इसे लेकर मजाकिया टिप्पणियां कीं। एक अन्य यूजर ने व्यंग्य करते हुए लिखा कि रावण दहन की भी चोरी कर ली।कुछ लोगों ने यह भी टिप्पणी की कि अगर इसी तरह कार्यक्रम होते रहे, तो भविष्य में रामायण की कहानी भी बदलकर पेश की जाएगी। हालांकि, ये प्रतिक्रियाएं सोशल मीडिया यूजर्स की व्यक्तिगत राय और व्यंग्य का हिस्सा हैं।
‘लेकिन तीर किसे लगा?’ यूजर्स ने किए सवाल
वायरल वीडियो पर कुछ यूजर्स ने सवाल उठाया कि जब भगवान राम का किरदार निभाने वाला कलाकार मंच पर मौजूद था, तो तीर चलाने की रस्म प्रधानमंत्री ने क्यों निभाई।एक यूजर ने नेताओं को भगवान की तरह देखने की प्रवृत्ति पर सवाल उठाया। वहीं, कुछ लोगों ने इसके उलट पूछा कि इस रस्म में आखिर गलत क्या है।
पीएम मोदी के समर्थन में भी प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कुछ यूजर्स ने कहा कि दशहरे के अवसर पर आयोजित रामलीला और रावण दहन कार्यक्रमों में मुख्य अतिथियों को प्रतीकात्मक रूप से तीर चलाने के लिए आमंत्रित किया जाता रहा है। उनके मुताबिक, इसे धार्मिक परंपरा के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
दिल्ली के किस कार्यक्रम में शामिल हुए थे पीएम मोदी?
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 20 अक्टूबर को दिल्ली के आईपी एक्सटेंशन स्थित डीडीए उत्सव ग्राउंड में आयोजित विजयादशमी समारोह में शामिल हुए थे। इस दौरान उन्होंने रावण के पुतले की ओर प्रतीकात्मक तीर चलाया।कार्यक्रम का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ लोगों ने इसे सामान्य परंपरा माना, जबकि दूसरे यूजर्स ने भगवान राम के किरदार और प्रधानमंत्री की भूमिका को लेकर व्यंग्य किया।
परंपरा या आलोचना, क्यों चर्चा में है वीडियो?
रावण दहन विजयादशमी का प्रमुख हिस्सा है। कई जगहों पर धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में राजनीतिक नेताओं, जनप्रतिनिधियों या अन्य अतिथियों को प्रतीकात्मक रूप से रावण दहन करने के लिए आमंत्रित किया जाता है।इस मामले में भी बहस का केंद्र यही है कि धार्मिक आयोजन में प्रधानमंत्री की भूमिका को कुछ लोग परंपरा के रूप में देख रहे हैं, जबकि कुछ यूजर्स ने इसे व्यंग्य का विषय बनाया है।
फिलहाल, वायरल वीडियो पर सोशल मीडिया पर अलग-अलग राय सामने आ रही हैं। यह विवाद मुख्य रूप से कार्यक्रम के दृश्य और उसकी व्याख्या को लेकर है।