Hero pilot : 34 हजार फीट की ऊंचाई पर जिंदगी और मौत के बीच फंसी 174 जिंदगियां, पायलट पर हुआ कुल्हाड़ी से हमला; घायल होकर भी खोला कॉकपिट का दरवाजा

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Hero pilot : जब आसमान में जिंदगी और मौत के बीच रह गया था फासला

BNT Desk: 30 सितंबर को दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की उड़ान में अचानक ऐसा कुछ हुआ, जिसकी किसी यात्री ने कल्पना भी नहीं की थी।करीब 34 हजार फीट की ऊंचाई पर उड़ रहे विमान में 174 लोग सवार थे। सफर सामान्य चल रहा था, लेकिन कुछ ही पलों में विमान के भीतर जिंदगी और मौत के बीच का फासला बेहद कम हो गया।

 

अचानक बदल गया सब कुछ

संयुक्त अरब अमीरात की जांच के अनुसार, उड़ान के दौरान सहायक विमान चालक ने मुख्य विमान चालक स्मित मच्छार पर आपातकालीन कुल्हाड़ी से हमला किया और विमान के नियंत्रण पर कब्जा करने की कोशिश की।हमले में स्मित गंभीर रूप से घायल हो गए। इसी दौरान विमान तेजी से नीचे जाने लगा और कुछ ही सेकंड में हजारों फीट की ऊंचाई खो बैठा।उस समय स्मित के सामने सिर्फ अपनी जान बचाने की चुनौती नहीं थी।उनके पीछे सैकड़ों लोग थे।

 

घायल थे, फिर भी उठे…

बाद में अस्पताल से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हुई बातचीत में स्मित ने उस पल को याद किया।उन्होंने बताया कि वह बुरी तरह घायल हो चुके थे। वह नीचे गिर गए थे और उन्हें अपने जीवन के लिए संघर्ष करना पड़ रहा था।लेकिन तभी उन्हें एक बात का एहसास हुआ।अगर वह उठकर कुछ नहीं करते, तो विमान में मौजूद दूसरे लोगों की जान भी खतरे में पड़ सकती थी।इसके बाद उन्होंने वह दरवाजा खोल दिया, जो उस समय विमान में मौजूद बाकी लोगों और चालक कक्ष के बीच सबसे बड़ी कड़ी बन गया।

 

एक दरवाजा खुला और लोग आगे बढ़े

दरवाजा खुलते ही यात्रियों और विमान के अन्य सदस्यों को अंदर पहुंचने का रास्ता मिला।कुछ यात्रियों ने आगे बढ़कर हमलावर को काबू करने में मदद की। विमान में मौजूद अन्य अनुभवी विमान चालकों ने स्थिति संभाली और विमान को सुरक्षित उतारने की जिम्मेदारी संभाली।विमान का रास्ता बदला गया और उसे सऊदी अरब के ताबूक हवाई अड्डे पर सुरक्षित उतारा गया।वहां से शुरू हुई राहत की एक नई कहानी।सभी यात्रियों को सुरक्षित बचा लिया गया।

 

यह सिर्फ एक व्यक्ति की कहानी नहीं थी

इस घटना के बाद स्मित मच्छार को उनकी भूमिका के लिए दुनिया भर में सराहना मिली।लेकिन इस पूरे घटनाक्रम में सिर्फ एक व्यक्ति की बहादुरी नहीं थी।घायल होने के बावजूद स्मित ने रास्ता खोला।यात्रियों ने आगे बढ़कर मदद की।विमान के अन्य सदस्यों ने स्थिति को संभाला और विमान में मौजूद दूसरे विमान चालकों ने उसे सुरक्षित जमीन तक पहुंचाया।संयुक्त अरब अमीरात के नागरिक उड्डयन प्राधिकरण ने भी स्मित, विमान दल और यात्रियों के साहस और त्वरित प्रतिक्रिया की सराहना की है। प्राधिकरण के अनुसार, स्मित अब संयुक्त अरब अमीरात लौट चुके हैं और उनकी हालत अच्छी है।

 

Hero pilot ने अस्पताल के बिस्तर से सुनाई दी उस रात की कहानी

2 अक्टूबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अस्पताल में भर्ती स्मित मच्छार से वीडियो बातचीत की।उस बातचीत में स्मित ने अपने अनुभव साझा किए और बताया कि उस समय उनके मन में सबसे बड़ी चिंता विमान में मौजूद लोगों की सुरक्षा को लेकर थी।एक विमान चालक के लिए हर उड़ान में यात्रियों की सुरक्षा सबसे बड़ी जिम्मेदारी होती है।लेकिन उस दिन यह जिम्मेदारी सिर्फ एक पेशेवर कर्तव्य नहीं रह गई थी।वह एक बेहद निजी और कठिन फैसला बन चुकी थी।

 

जांच में सामने आई नई जानकारी

घटना के बाद संयुक्त अरब अमीरात ने इसकी विस्तृत जांच शुरू की थी। 3 अक्टूबर को संयुक्त अरब अमीरात के महान्यायवादी ने कहा कि शुरुआती जांच में सहायक विमान चालक द्वारा आतंकवादी कृत्य को अंजाम देने की कोशिश सामने आई है।अधिकारियों के अनुसार, उसने पहले से बनाई गई योजना के तहत विमान चालक पर हमला किया और विमान के नियंत्रण पर कब्जा करने की कोशिश की। हालांकि घटना के पीछे उसका उद्देश्य क्या था और उसके किसी अन्य व्यक्ति या संगठन से संबंध थे या नहीं, इसकी जांच अभी जारी है। भौतिक और डिजिटल साक्ष्यों की भी जांच की जा रही है।

 

आखिर में बची एक तस्वीर

उस दिन ताबूक में जब विमान सुरक्षित जमीन पर उतरा होगा, तब शायद उसमें बैठे हर व्यक्ति ने राहत की सांस ली होगी।कुछ देर पहले तक जो लोग एक सामान्य यात्रा पर थे, वे अचानक एक ऐसी घटना का हिस्सा बन चुके थे, जिसे वे शायद पूरी जिंदगी नहीं भूल पाएंग और इस पूरी कहानी के बीच एक घायल विमान चालक था, जिसने अपने डर से पहले उन लोगों के बारे में सोचा जो उसके पीछे बैठे थे। कभी-कभी बहादुरी किसी बड़े भाषण में नहीं दिखाई देती। वह बस एक कठिन पल में लिया गया एक फैसला होती है।

एक घायल विमान चालक का दरवाजा खोलना।कुछ यात्रियों का मदद के लिए आगे बढ़ना।और 174 लोगों का सुरक्षित जमीन तक पहुंच जाना। शायद स्मित मच्छार की कहानी को याद रखने का सबसे सही तरीका यही है। एक ऐसे इंसान की कहानी के रूप में, जिसने सबसे मुश्किल पल में भी अपनी जिम्मेदारी से मुंह नहीं मोड़ा।

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