BAT-BMS App से ई-रिक्शा बंद करना पड़ सकता है भारी, साइबर अपराध में हो सकती है 3 साल तक की जेल

BiharNewsAuthor
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BNT Desk: सोशल मीडिया पर इन दिनों BAT-BMS App की काफी चर्चा हो रही है। दावा किया जा रहा है कि इस ऐप की मदद से कुछ लोग ई-रिक्शा को बीच रास्ते में बंद कर रहे हैं। कई मामलों में शातिर लोग पहले ई-रिक्शा को बंद कर देते हैं और फिर उसे दोबारा चालू कराने के नाम पर चालक से पैसे वसूलने की कोशिश करते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कोई व्यक्ति बिना अनुमति किसी दूसरे के ई-रिक्शा के डिजिटल सिस्टम में हस्तक्षेप करता है, तो यह मजाक नहीं बल्कि गंभीर साइबर अपराध हो सकता है।

 

क्या है BAT-BMS App?

BAT-BMS एक बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (Battery Management System) ऐप है। इसे SHENZHEN GRENERGY TECHNOLOGY ने विकसित किया है। यह ऐप ब्लूटूथ के जरिए आधुनिक लिथियम बैटरियों से कनेक्ट होकर उनकी स्थिति की निगरानी करने के लिए बनाया गया है। इसकी मदद से बैटरी का तापमान, वोल्टेज, करंट और चार्जिंग जैसी जानकारियां देखी जा सकती हैं। जिन बैटरियों में Bluetooth Low Energy (BLE) की सुविधा होती है, उनमें कुछ सेटिंग्स को नियंत्रित भी किया जा सकता है।

 

कैसे हो रहा है दुरुपयोग?

रिपोर्टों के अनुसार, कुछ लोग इस ऐप का कथित रूप से दुरुपयोग कर ई-रिक्शा की बैटरी से अनधिकृत रूप से कनेक्ट होने और उसे बंद करने की कोशिश कर रहे हैं। इसके बाद चालक से वाहन दोबारा चालू कराने के नाम पर पैसे मांगने की घटनाएं भी सामने आई हैं। हालांकि, यह तभी संभव हो सकता है जब संबंधित बैटरी और उसकी सुरक्षा सेटिंग्स अनधिकृत कनेक्शन की अनुमति दें। सभी ई-रिक्शा या सभी बैटरियां इस तरह प्रभावित हों, ऐसा मान लेना सही नहीं होगा।

 

साइबर अपराध की श्रेणी में आ सकता है मामला

साइबर कानून विशेषज्ञों का कहना है कि आधुनिक ई-रिक्शा केवल एक वाहन नहीं, बल्कि डिजिटल कंट्रोल सिस्टम से लैस इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस भी है। ऐसे में बिना अनुमति उसके सॉफ्टवेयर या बैटरी सिस्टम में हस्तक्षेप करना सूचना प्रौद्योगिकी कानून के तहत अपराध माना जा सकता है। यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर किसी दूसरे के डिजिटल सिस्टम में अनधिकृत प्रवेश करता है या उससे छेड़छाड़ करता है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

 

हो सकती है जेल और जुर्माना

विशेषज्ञों के अनुसार, यदि जांच में यह साबित होता है कि किसी व्यक्ति ने धोखाधड़ी या बेईमानी की नीयत से ई-रिक्शा के डिजिटल सिस्टम में हस्तक्षेप किया, तो सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई हो सकती है। ऐसे मामलों में 3 साल तक की जेल और 5 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। वास्तविक सजा मामले के तथ्यों, जांच और अदालत के निर्णय पर निर्भर करेगी।

 

मजाक नहीं, बन सकता है हादसे की वजह

विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि चलते हुए ई-रिक्शा को अचानक बंद करना न केवल गैरकानूनी हो सकता है, बल्कि इससे सड़क दुर्घटना का खतरा भी बढ़ सकता है। इसलिए सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो या ट्रेंड देखकर इस तरह के प्रयोग करने से बचना चाहिए। यदि किसी ई-रिक्शा चालक को संदेह हो कि उसके वाहन के साथ डिजिटल छेड़छाड़ की गई है, तो उसे तुरंत स्थानीय पुलिस या साइबर क्राइम हेल्पलाइन पर शिकायत करनी चाहिए।

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