BNT Desk: बिहार के सहरसा जिले से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहाँ एक सात साल की मासूम बच्ची को हवस का शिकार बनाया गया। राज्य में महिला सुरक्षा और कानून व्यवस्था के दावों के बीच, अपराधी बेखौफ होकर मासूमों को अपना निशाना बना रहे हैं। सहरसा के काशनगर थाना क्षेत्र में हुई इस हैवानियत ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है।
पुलिस ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए त्वरित कार्रवाई की और घटना के कुछ ही घंटों के भीतर आरोपी को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है।
खेल-खेल में गई थी बहियार, मकई के खेत में हुई दरिंदगी
प्राप्त जानकारी के अनुसार, घटना रविवार की है। काशनगर थाना क्षेत्र के एक गांव की रहने वाली सात साल की मासूम बच्ची घर के पास के खेतों (बहियार) में जलावन के लिए सूखे पत्ते और लकड़ियाँ चुनने गई थी। इसी दौरान गांव के ही एक 27 वर्षीय युवक की नजर उस बच्ची पर पड़ी।
आरोपी युवक ने बच्ची को अकेला पाकर उसे बहला-फुसलाकर पास ही के एक ऊंचे मकई के खेत में ले गया। वहाँ उसने मासूम के साथ दुष्कर्म की जघन्य वारदात को अंजाम दिया। वारदात के बाद आरोपी बच्ची को लहूलुहान और रोती-बिलखती हालत में वहीं छोड़कर मौके से फरार हो गया।
मासूम की जुबानी सुनी आपबीती, तो कांप उठे परिजन
किसी तरह हिम्मत जुटाकर बच्ची अपने घर पहुँची। वह बहुत डरी हुई थी और लगातार रो रही थी। जब माता-पिता ने उसकी हालत देखी और पूछताछ की, तो बच्ची ने रोते हुए अपनी आपबीती सुनाई। मासूम की बात सुनकर परिजनों के पैरों तले जमीन खिसक गई। घटना की खबर जंगल में आग की तरह पूरे गांव में फैल गई, जिससे लोगों में भारी आक्रोश देखा गया।
पुलिस की त्वरित कार्रवाई
घटना की सूचना मिलते ही काशनगर थाना पुलिस सक्रिय हो गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस की एक विशेष टीम तुरंत घटनास्थल पर पहुँची और साक्ष्य जुटाए।
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मेडिकल जांच: पुलिस ने बिना देरी किए पीड़ित बच्ची को अपनी सुरक्षा में लिया और उसे मेडिकल परीक्षण के लिए सहरसा सदर अस्पताल भेज दिया है।
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गिरफ्तारी: पुलिस ने आरोपी की पहचान गांव के ही 27 वर्षीय युवक के रूप में की। छापेमारी के बाद पुलिस ने कुछ ही घंटों के भीतर आरोपी को उसके ठिकाने से गिरफ्तार कर लिया। फिलहाल पुलिस उससे कड़ी पूछताछ कर रही है।
इलाके में तनाव और सुरक्षा की मांग
इस घटना के बाद काशनगर इलाके में तनाव का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि अपराधियों के मन में पुलिस का खौफ खत्म होता जा रहा है। लोगों ने मांग की है कि आरोपी के खिलाफ पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) के तहत मामला दर्ज कर स्पीडी ट्रायल चलाया जाए, ताकि मासूम को जल्द से जल्द न्याय मिल सके और दोषी को कड़ी से कड़ी सजा मिले।
सहरसा की यह घटना समाज के लिए एक बड़ा कलंक है। जब सात साल की बच्ची अपने घर के पास भी सुरक्षित नहीं है, तो यह सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। हालांकि, सहरसा पुलिस की तत्परता ने आरोपी को भागने का मौका नहीं दिया, जो एक सराहनीय कदम है। अब सबकी निगाहें कानून की प्रक्रिया पर हैं कि इस हैवान को कब तक उसके किए की सजा मिलती है।