बिहार पुलिस के लिए ‘यूनिफॉर्म कोड’ जारी: वर्दी पर न दिखेगी चेन, न जाति सूचक चिह्न; नियमों में कड़ाई

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BNT Desk: बिहार पुलिस मुख्यालय ने राज्य के पुलिस महकमे में अनुशासन और पेशेवर छवि को और अधिक मजबूत करने के लिए कड़ा रुख अपनाया है। रविवार को मुख्यालय की ओर से जारी एक आधिकारिक बयान में सभी पुलिस पदाधिकारियों और कर्मियों को वर्दी (यूनिफॉर्म) से जुड़े नियमों का अक्षरशः पालन करने का निर्देश दिया गया है।

मुख्यालय ने स्पष्ट किया है कि वर्दी केवल एक पहनावा नहीं, बल्कि अनुशासन और गरिमा का प्रतीक है। इसलिए, पुलिस मैनुअल में दर्ज नियमों की अनदेखी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

वर्दी के साथ गहनों और चेन पर पूर्ण प्रतिबंध

पुलिस मुख्यालय द्वारा जारी निर्देशों में सबसे प्रमुख बात आभूषणों को लेकर कही गई है। अब कोई भी पुलिसकर्मी ड्यूटी के दौरान अपनी वर्दी के ऊपर या बाहर दिखने वाली कोई भी सोने की चेन, अंगूठी या अन्य गहने नहीं पहन सकेगा।

  • साफ-सफाई: दाढ़ी बनाने वाले कर्मियों को अनिवार्य रूप से ‘क्लीन शेव’ रहना होगा।

  • बालों की कटिंग: पुलिसकर्मियों को अपने बाल छोटे और सलीके से रखने होंगे ताकि एक अनुशासित सैनिक की छवि झलके।

जाति चिह्न और चेहरे के लेप पर पाबंदी

बिहार पुलिस ने स्पष्ट संदेश दिया है कि पुलिस बल की कोई जाति नहीं होती। नए निर्देशों के अनुसार:

  • वर्दीधारी कर्मी अपनी ड्यूटी के दौरान किसी भी प्रकार का जाति सूचक चिह्न (जैसे तिलक, कलावा या अन्य पहचान) धारण नहीं करेंगे।

  • चेहरे पर किसी भी प्रकार का लेप, सौंदर्य प्रसाधन या विशिष्ट निशान लगाने पर भी मनाही है।

  • इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पुलिसकर्मी पूरी तरह से निष्पक्ष और पेशेवर नजर आएं।

सीआईडी और स्पेशल ब्रांच के लिए विशेष नियम

खुफिया और विशेष जांच शाखाओं (CID और Special Branch) के काम करने का तरीका सामान्य पुलिस से अलग होता है। इसे ध्यान में रखते हुए निर्देश दिया गया है कि:

  • इन विभागों के कर्मी बिना किसी ठोस कारण या विशेष आदेश के वर्दी पहनकर ड्यूटी पर नहीं जाएंगे।

  • उन्हें सादे लिबास में रहकर अपनी पहचान गुप्त रखते हुए कार्य करने की हिदायत दी गई है, जब तक कि वर्दी अनिवार्य न हो।

सार्वजनिक आचरण पर सख्ती: पान-गुटखा प्रतिबंधित

पुलिस की छवि अक्सर उनके सार्वजनिक व्यवहार से बनती है। मुख्यालय ने आदेश दिया है कि सार्वजनिक स्थानों पर वर्दी में रहते हुए कोई भी कर्मी धूम्रपान या पान/गुटखा नहीं खाएगा। इसे अनुशासनहीनता की श्रेणी में रखा जाएगा। इसके साथ ही ‘आधी वर्दी’ (जैसे सादे पैंट के साथ पुलिस की कमीज या सादी टी-शर्ट के साथ पुलिस पैंट) पहनकर बाहर निकलने या ड्यूटी करने पर भी पूरी तरह रोक लगा दी गई है।

ट्रैफिक पुलिस और अन्य विशेष निर्देश

यातायात व्यवस्था (Traffic Duty) को संभालने वाले पुलिसकर्मियों के लिए भी एक रोचक निर्देश जारी किया गया है। अब ट्रैफिक पुलिसकर्मी धूप या बारिश से बचने के लिए वर्दी के साथ छाते (Umbrella) का उपयोग नहीं करेंगे। उन्हें विभाग द्वारा निर्धारित रेनकोट या अन्य साधनों का ही इस्तेमाल करना होगा।

सोशल मीडिया की अफवाहों पर मुख्यालय का स्पष्टीकरण

पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर यह चर्चा थी कि बिहार पुलिस ने वर्दी को लेकर कोई ‘नए’ और ‘कठोर’ नियम बनाए हैं। इस पर सफाई देते हुए पुलिस मुख्यालय ने कहा कि ये कोई नए नियम नहीं हैं। ये तमाम बातें पुलिस मैनुअल में पहले से ही मौजूद हैं। समय-समय पर कर्मियों को उनकी जिम्मेदारी और अनुशासन की याद दिलाने के लिए ऐसे निर्देश दोहराए जाते हैं।

बिहार पुलिस का ‘ड्रेस कोड’ एक नज़र में:

विषय क्या करें / क्या न करें
आभूषण वर्दी के ऊपर चेन या कीमती गहने पहनना वर्जित है।
बाल और दाढ़ी बाल छोटे होने चाहिए और चेहरा साफ-सुथरा (क्लीन शेव) होना चाहिए।
पहचान किसी भी प्रकार के जाति सूचक चिह्न का प्रयोग प्रतिबंधित है।
नशा ड्यूटी के दौरान और वर्दी में धूम्रपान या पान खाना वर्जित है।
मिश्रित पहनावा सादे कपड़ों और वर्दी को मिलाकर पहनना अनुशासनहीनता है।

बिहार पुलिस मुख्यालय का यह कदम राज्य में कानून-व्यवस्था के साथ-साथ पुलिस की ‘ब्रांड वैल्यू’ को सुधारने की एक कोशिश है। अनुशासन के इन छोटे लेकिन महत्वपूर्ण नियमों का पालन करने से आम जनता के बीच पुलिस का विश्वास बढ़ेगा और बल के भीतर एकरूपता आएगी। सभी जिला कप्तानों (SP) को निर्देश दिया गया है कि वे अपने क्षेत्रों में इन नियमों का पालन सुनिश्चित कराएं।

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