BNT Desk: बिहार के बुनियादी ढांचे (Infrastructure) के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। पटना और वैशाली को जोड़ने वाला बहुप्रतीक्षित कच्ची दरगाह-बिदुपुर सिक्सलेन पुल आगामी जून महीने तक आम जनता के लिए खोल दिया जाएगा। रविवार को इस महासेतु के निर्माण में एक मील का पत्थर तब स्थापित हुआ, जब पाया नंबर 61 पर पुल का अंतिम सेगमेंट सफलतापूर्वक चढ़ा दिया गया।
इस पुल के शुरू होने से उत्तर बिहार और दक्षिण बिहार के बीच न केवल व्यापारिक संबंध मजबूत होंगे, बल्कि लाखों लोगों का सफर भी घंटों से घटकर मिनटों में सिमट जाएगा।
आखिरी सेगमेंट का काम हुआ पूरा: जश्न का माहौल
रविवार की सुबह इस ऐतिहासिक क्षण की गवाह बनी। निर्माण कार्य के अंतिम फेज को पूरा करने के लिए निर्माण एजेंसी एलएंडटी (L&T), कोरियाई कंपनी देबू ज्वाइंट वेंचर और बीएसआरडीसी (BSRDC) के आला अधिकारी मौके पर मौजूद थे।
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अधिकारियों की टीम एक विशेष ‘बाज जहाज’ (Barge) पर सवार होकर गंगा के बीचों-बीच पाया नंबर 61 तक पहुँची।
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जिस जहाज पर अंतिम सेगमेंट लोड था, उसे फूलों और गुब्बारों से भव्य रूप से सजाया गया था।
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इंजीनियरों की देखरेख में सेगमेंट को सफलतापूर्वक स्थापित किया गया, जिसके साथ ही पुल का ढांचा अब पूरी तरह जुड़ चुका है।
पुल की खासियत: लंबाई और लागत
यह सिक्सलेन महासेतु अपनी इंजीनियरिंग और भव्यता के लिए जाना जाएगा। इसके मुख्य आंकड़े इस प्रकार हैं:
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कुल लंबाई: लगभग 22.76 किलोमीटर (यह देश के सबसे लंबे पुलों में से एक होगा)।
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कुल पाए (Pillars): इस विशाल पुल को टिकाने के लिए कुल 67 पाए बनाए गए हैं।
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निर्माण लागत: इस प्रोजेक्ट को तैयार करने में लगभग 4988.4 करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि इस प्रोजेक्ट के पहले फेज (कच्ची दरगाह से राघोपुर तक) का उद्घाटन 23 जुलाई 2024 को ही किया जा चुका है, जिससे राघोपुर दियारा के लोगों को बड़ी राहत मिली थी।
कोरियाई डिजाइन और आधुनिक तकनीक
इस सिक्सलेन ब्रिज की सबसे बड़ी विशेषता इसका अंतरराष्ट्रीय स्तर का डिजाइन है। इसे दक्षिण कोरिया की कंपनी ने तैयार किया है। एलएंडटी और देबू ज्वाइंट वेंचर मिलकर इसे अत्याधुनिक तकनीक से बना रहे हैं, ताकि यह दशकों तक गंगा की लहरों के बीच अडिग खड़ा रहे।
उत्तर बिहार के लिए ‘गेम चेंजर’ साबित होगा यह पुल
वर्तमान में पटना से उत्तर बिहार जाने के लिए लोगों को मुख्य रूप से महात्मा गांधी सेतु या जेपी सेतु पर निर्भर रहना पड़ता है। भारी ट्रैफिक के कारण इन पुलों पर अक्सर भीषण जाम लगा रहता है। इस नए सिक्सलेन पुल के शुरू होने से निम्नलिखित जिलों को सीधा लाभ होगा:
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वैशाली
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समस्तीपुर
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दरभंगा
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मधुबनी
महासेतु के चालू होते ही पटना से इन जिलों की दूरी काफी घट जाएगी और लोगों को जाम के झाम से हमेशा के लिए मुक्ति मिल जाएगी।
परियोजना पर एक नज़र
| विवरण | जानकारी |
| प्रोजेक्ट का नाम | कच्ची दरगाह-बिदुपुर सिक्सलेन पुल |
| संभावित शुरुआत | जून 2026 |
| कुल लंबाई | 22.76 किलोमीटर |
| लागत | ₹4988.4 करोड़ |
| डिजाइन | कोरियाई कंपनी द्वारा निर्मित |
| प्रमुख कनेक्टिविटी | पटना से वैशाली, समस्तीपुर, दरभंगा |
कच्ची दरगाह-बिदुपुर सिक्सलेन पुल बिहार के विकास की नई पहचान बनने जा रहा है। जून में इसके उद्घाटन के बाद यह न केवल यातायात को सुगम बनाएगा, बल्कि उत्तर बिहार में आर्थिक गतिविधियों और निवेश के नए रास्ते भी खोलेगा। सरकार अब फिनिशिंग टच और एप्रोच रोड के काम को जल्द से जल्द पूरा करने में जुटी है।