BNT Desk: बिहार पुलिस इन दिनों अपनी “वर्दी” और “सोशल मीडिया आचरण” को लेकर चर्चा में है। हाल ही में पुलिसकर्मियों द्वारा वर्दी पहनकर रील्स बनाने और वीडियो वायरल करने के मामलों ने मुख्यालय को सख्त रुख अपनाने पर मजबूर कर दिया है। सोशल मीडिया पर फैल रही विभिन्न अफवाहों के बीच पुलिस मुख्यालय ने अपना स्टैंड पूरी तरह साफ कर दिया है: ड्यूटी में ड्रामा नहीं चलेगा, केवल अनुशासन चलेगा।
मुख्यालय ने स्पष्ट किया है कि वर्दी की गरिमा से खिलवाड़ करना अब भारी पड़ सकता है और इसके लिए किसी नए आदेश की जरूरत नहीं है, बल्कि पुराने नियमों को ही सख्ती से लागू किया जा रहा है।
क्या कोई नया फरमान जारी हुआ है?
सोशल मीडिया पर पिछले कुछ दिनों से यह खबर वायरल हो रही थी कि बिहार पुलिस ने अचानक से बहुत कड़े नए नियम लागू कर दिए हैं। इस पर मुख्यालय ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि कोई भी नया आदेश या ‘कड़क’ फरमान जारी नहीं किया गया है। दरअसल, सोशल मीडिया पर चल रही खबरें भ्रामक हैं। मुख्यालय का कहना है कि उन्होंने सिर्फ पहले से मौजूद नियमों यानी ‘पुलिस मैनुअल’ की याद दिलाई है। हाल के दिनों में कई पुलिसकर्मी ड्यूटी के दौरान या वर्दी में आपत्तिजनक रील्स बनाते दिखे थे, जिसके बाद यह चेतावनी जारी की गई थी।
बिहार पुलिस हस्तक 1978 का नियम-1061
पुलिस मुख्यालय ने उन अफवाहों का भी खंडन किया जिनमें इसे नया कानून बताया जा रहा था। असल में, बिहार पुलिस के कामकाज और अनुशासन का आधार बिहार पुलिस हस्तक 1978 है। इसका नियम-1061 वर्दी की गरिमा, पहनावे और आचरण को लेकर बहुत ही स्पष्ट दिशा-निर्देश देता है।
मुख्यालय ने इन्हीं पुराने नियमों का हवाला देते हुए साफ किया कि:
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वर्दी के साथ किसी भी प्रकार के अनावश्यक आभूषण या गहने पहनना मना है।
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वर्दी पर कोई भी जाति-सूचक चिह्न या धार्मिक निशान प्रदर्शित नहीं किया जा सकता।
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ड्यूटी के दौरान स्टाइलबाजी, अजीबोगरीब हेयरस्टाइल या चेहरे पर किसी भी तरह का लेप लगाना प्रतिबंधित है।
सोशल मीडिया और रील्स पर ‘नो टॉलरेंस’
मुख्यालय ने यह साफ कर दिया है कि रील्स बनाना अपने आप में गुनाह नहीं है, लेकिन वर्दी की गरिमा को दांव पर लगाकर वीडियो बनाना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। केंद्रीय गृह मंत्रालय और BPR&D (पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो) द्वारा जारी गाइडलाइंस का पालन करना हर पुलिसकर्मी के लिए अनिवार्य है।
अक्सर देखा गया है कि कुछ पुलिसकर्मी ‘आधी वर्दी और आधा सादे कपड़े’ (मिक्स लुक) में वीडियो पोस्ट करते हैं, जो पुलिस की पेशेवर छवि को धूमिल करता है। अब ऐसे ‘शो-ऑफ’ पर विभाग की पैनी नजर है।
ड्यूटी के दौरान आचरण पर भी सख्ती
केवल सोशल मीडिया ही नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर भी अनुशासन के दायरे तय किए गए हैं। मुख्यालय ने दोहराया है कि वर्दी पहनकर:
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सार्वजनिक स्थानों पर पान, गुटखा या धूम्रपान करना सख्त मना है।
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ड्यूटी के दौरान मोबाइल का गैर-जरूरी इस्तेमाल और वीडियो शूटिंग वर्जित है।
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जनता के साथ व्यवहार करते समय पुलिस मैनुअल के प्रोटोकॉल का पालन करना होगा।
अफवाहों से बचें
पुलिस मुख्यालय ने पुलिसकर्मियों और आम जनता से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर चल रही फेक न्यूज़ से गुमराह न हों। 20 अप्रैल को जो निर्देश जारी किए गए थे, वे केवल SOP (Standard Operating Procedure) का हिस्सा थे। इनका उद्देश्य पुलिस बल को अधिक अनुशासित और जवाबदेह बनाना है, न कि किसी पर जबरन पाबंदी थोपना।
बिहार पुलिस वर्दी गाइडलाइंस
| क्या प्रतिबंधित है? | क्यों? | संदर्भ नियम |
| गहने और स्टाइलबाजी | वर्दी की एकरूपता और गरिमा बनाए रखने के लिए। | नियम-1061 (1978) |
| जाति या धार्मिक चिह्न | पुलिस की धर्मनिरपेक्ष और निष्पक्ष छवि के लिए। | पुलिस हस्तक गाइडलाइंस |
| वर्दी में रील्स बनाना | ड्यूटी के प्रति गंभीरता और गोपनीयता बनाए रखने हेतु। | गृह मंत्रालय गाइडलाइंस |
| पान-गुटखा का सेवन | सार्वजनिक स्थलों पर पुलिस की छवि धूमिल होने से बचाने के लिए। | जनरल कंडक्ट रूल्स |
बिहार पुलिस मुख्यालय का यह कदम स्पष्ट करता है कि आधुनिक दौर में सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के बीच पुलिसिंग के पारंपरिक अनुशासन को बचाए रखना उनकी प्राथमिकता है। पुलिसकर्मियों को यह समझना होगा कि वर्दी पहनते ही वे एक व्यक्ति से अधिक एक संस्था के प्रतिनिधि बन जाते हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि मुख्यालय की इस सख्ती के बाद खाकी का ‘डिजिटल अवतार’ कितना बदलता है।