Sheetal Buildtech Fraud: बिहार के हजारों निवेशकों के करोड़ों रुपये फंसे?

Parambir Singh
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Parambir Singh
Parambir Singh एक पत्रकार और डिजिटल मीडिया रणनीतिकार हैं, जो बिहार की राजनीति और जमीनी मुद्दों पर लिखते हैं। वे स्पष्ट और तथ्य आधारित विश्लेषण के...
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बिहार की मिट्टी में पसीने की कमाई को ‘सोना’ बनाने का सपना दिखाने वाली कंपनी शीतल बिल्डटेक (Sheetal Buildtech) आज विवादों के केंद्र में है। कंपनी पर आरोप है कि उसने पटना, सोनपुर और दरभंगा जैसे शहरों में ‘आलीशान शहर’ बसाने के नाम पर आम जनता से करोड़ों रुपये बटोरे, लेकिन बदले में उन्हें केवल तारीखें, कानूनी नोटिस और बाउंसरों की धमकियां मिलीं।

सपनों की मार्केटिंग: भव्य गेट और खोखले वादे

शीतल बिल्डटेक की कार्यशैली का एक तय पैटर्न रहा है। कंपनी ने सबसे पहले बिहटा, सोनपुर और दरभंगा में बड़े-बड़े होर्डिंग्स और रंगीन ब्रोशर के जरिए मध्यमवर्गीय परिवारों को लुभाया।

  • दावा: “यहाँ शहर बस रहा है, कल की सुनहरी सुबह यहीं होगी।”

  • हकीकत: आज बिहटा का प्रोजेक्ट (शीतल ग्रीन वाटिका) 2017 से ‘Ongoing’ है। सालों बीत जाने के बाद भी निवेशक अपने प्लॉट की पहचान तक नहीं कर पा रहे हैं।

दरभंगा ‘ग्रीन सिटी’: कागजों पर स्वर्ग, जमीन पर नर्क

सबसे चौंकाने वाला खुलासा दरभंगा के ‘ग्रीन सिटी’ प्रोजेक्ट (रेरा नंबर: BRERAP00954-1) को लेकर हुआ है।

  • कागजी जादूगरी: रेरा की वेबसाइट पर इस प्रोजेक्ट का स्टेटस ‘Completed’ दिखाया गया है। तकनीकी रूप से इसका मतलब है कि यहाँ बिजली, पानी, सड़क और ड्रेनेज जैसी बुनियादी सुविधाएं तैयार हैं।

  • ग्राउंड रिपोर्ट: मौके पर जाने पर सच्चाई इसके उलट है। चारों तरफ ईंटों के ढेर, जलजमाव और अधूरी सड़कें यह गवाही दे रही हैं कि निवेशकों के साथ ‘कागजी धोखाधड़ी’ की गई है। सवाल यह है कि सिस्टम की आँखों में धूल झोंककर इसे ‘पूरा’ कैसे घोषित कर दिया गया?

पीड़ितों की आपबीती: गहने गिरवी रखे, खेत बेचे पर घर न मिला

इस घोटाले के पीछे उन हजारों लोगों की सिसकियां हैं जिन्होंने अपना सब कुछ दांव पर लगा दिया:

  • प्रशांत भारद्वाज (बिहटा निवेशक): इन्होंने 11 लाख रुपये से ज्यादा का भुगतान किया, लेकिन आज भी खाली जमीन पर अपने हिस्से का टुकड़ा तलाश रहे हैं।

  • सोनपुर के दो भाई: 25 लाख और 10 लाख रुपये निवेश करने के बाद 2018 में रजिस्ट्री तो करा ली, लेकिन कब्जा आज भी एक सपना है।

  • कोतवाली FIR का मामला: पटना के कोतवाली थाने में दर्ज शिकायत के अनुसार, एक निवेशक ने 27 लाख रुपये देकर दरभंगा में दो प्लॉट खरीदे। जब काम बंद देखा और रिफंड मांगा, तो कंपनी ने पैसे देने के बजाय और पैसों की मांग शुरू कर दी।

 यासिर इमाम और साहिल रिज़वी: भरोसे से बाउंसर तक का सफर

निवेशकों का आरोप है कि शुरुआत में यासिर इमाम और साहिल रिज़वी जैसे नाम भरोसे के प्रतीक बनकर सामने आए थे। लेकिन जैसे ही निवेश की रकम करोड़ों में पहुँची, कंपनी का व्यवहार बदल गया।

“कल तक जो फोन उठाते थे, आज वे बाउंसरों के घेरे में रहते हैं। ऑफिस जाने पर निवेशकों को डराया-धमकाया जाता है।”

 सच की आवाज दबाने की कोशिश: 1 करोड़ का मानहानि नोटिस

जब इस पूरी धांधली को लेकर सवाल पूछे गए और पीड़ितों के दस्तावेजों को सार्वजनिक किया गया, तो शीतल बिल्डटेक ने अपनी गलतियां सुधारने के बजाय 9 अप्रैल 2026 को एक कानूनी नोटिस भेजा।

  • धमकी: “24 घंटे में खबर हटाओ, वरना 1 करोड़ का हर्जाना दो।” यह सीधे तौर पर प्रेस की आजादी और पीड़ितों की आवाज को कुचलने का प्रयास है। लेकिन सवाल फिर वही है—अगर कंपनी साफ-सुथरी है, तो वह जमीन पर काम पूरा क्यों नहीं दिखाती?

सिस्टम की खामोशी और आपका पैसा

यह रिपोर्ट केवल शीतल बिल्डटेक के खिलाफ नहीं है, बल्कि उस भ्रष्ट सिस्टम के खिलाफ है जो बिल्डरों को ‘रेरा’ के नियमों के साथ खेलने की अनुमति देता है।

निवेशकों के लिए चेतावनी:

  1. रेरा रजिस्ट्रेशन ही काफी नहीं: सिर्फ कागज न देखें, जमीन पर जाकर भौतिक सत्यापन करें।

  2. विज्ञापन के झांसे में न आएं: कंपनी के पुराने प्रोजेक्ट्स की हकीकत वहां के निवासियों से पूछें।

  3. चुप न रहें: अगर आप भी इस जाल में फंसे हैं, तो कानूनी रास्ता अपनाएं और संबंधित थानों व रेरा अथॉरिटी में शिकायत दर्ज करें।

यह लड़ाई उन लोगों की है जिनकी गाढ़ी कमाई को ‘शीतल बिल्डटेक’ जैसी कंपनियों ने अपनी तिजोरियों में दफन कर दिया है। सच को नोटिस से नहीं डराया जा सकता।

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Parambir Singh एक पत्रकार और डिजिटल मीडिया रणनीतिकार हैं, जो बिहार की राजनीति और जमीनी मुद्दों पर लिखते हैं। वे स्पष्ट और तथ्य आधारित विश्लेषण के लिए जाने जाते हैं और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर प्रभावी कंटेंट निर्माण का अनुभव रखते हैं।