बिहार: पटना में जाम और जलजमाव से मिलेगी राहत? 6 बड़े नालों को ढंककर बनाई जाएगी सड़क, एक महीने में तैयार होगी DPR

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BNT Desk: राजधानी पटना में बारिश के दौरान होने वाले जलजमाव और सड़कों पर लगने वाले जाम की समस्या से राहत दिलाने के लिए छह प्रमुख नालों के विकास की योजना पर काम शुरू हो गया है। इस योजना के तहत पहाड़ी, मोहनपुर, सिटी मोट, खनुआ, बादशाही पईन और योगीपुर नालों को विकसित करने की तैयारी है। बिहार शहरी आधारभूत संरचना विकास निगम लिमिटेड (बुडको) इन परियोजनाओं के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट यानी DPR तैयार करा रहा है।

योजना का मुख्य उद्देश्य शहर की जलनिकासी व्यवस्था को बेहतर बनाना और नालों को ढंककर उनके ऊपर सड़क निर्माण की संभावनाओं का आकलन करना है। इससे संबंधित इलाकों में आवागमन के लिए अतिरिक्त जगह उपलब्ध हो सकती है। पटना में बारिश के दौरान कई जगहों पर पानी जमा होने और सड़कों पर वाहनों का दबाव बढ़ने की समस्या सामने आती है। ऐसे में नालों की क्षमता, उनके बीच संपर्क और पानी की निकासी के रास्तों को दुरुस्त करना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

बुडको की ओर से कराए जा रहे अध्ययन में केवल नालों को ढंकने की योजना ही नहीं, बल्कि पूरे जलनिकासी नेटवर्क की स्थिति को समझने पर भी जोर दिया जाएगा। इसके तहत यह पता लगाया जाएगा कि किन स्थानों पर पानी का बहाव बाधित होता है, कहां सहायक नालों के बीच संपर्क अधूरा है और किन जगहों पर सुधार की जरूरत है।

हालांकि, अभी परियोजना की विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया चल रही है। इसलिए छहों नालों पर निर्माण कार्य की लागत, सड़क की लंबाई, चौड़ाई और काम शुरू होने की तारीख जैसी जानकारियां अंतिम रूप से स्पष्ट नहीं हैं। इन पहलुओं का निर्धारण DPR तैयार होने और तकनीकी जांच के बाद किया जाएगा।

 

छह नालों को विकसित करने की योजना

इस परियोजना में पटना के छह प्रमुख नालों को शामिल किया गया है। इनमें पहाड़ी नाला, मोहनपुर नाला, सिटी मोट, खनुआ नाला, बादशाही पईन और योगीपुर नाला शामिल हैं। इन नालों की मौजूदा स्थिति, पानी के बहाव, आसपास की आबादी और जुड़े हुए ड्रेनेज नेटवर्क का तकनीकी अध्ययन किया जाएगा।

नालों को ढंककर सड़क बनाने की योजना का एक उद्देश्य उन इलाकों में आवागमन के लिए अतिरिक्त जगह उपलब्ध कराना है, जहां सड़क पर यातायात का दबाव अधिक रहता है। यदि तकनीकी जांच में किसी हिस्से पर ऐसा निर्माण उपयुक्त पाया जाता है, तो इससे सड़क के उपयोग की संभावनाएं बढ़ सकती हैं। साथ ही, जलनिकासी की व्यवस्था को भी बेहतर बनाए रखने की जरूरत होगी, ताकि निर्माण के बाद नालों की सफाई और रखरखाव प्रभावित न हो।

शहर में जलजमाव की समस्या केवल नालों के खुले होने से नहीं होती। पानी की निकासी की क्षमता, नालों की गहराई, सहायक नालों का जुड़ाव, कचरे से होने वाली रुकावट और अंतिम निकासी स्थल तक पानी पहुंचने की व्यवस्था भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसी कारण इस योजना में पूरे ड्रेनेज नेटवर्क का अध्ययन किए जाने की बात कही गई है।

छहों नालों की अलग-अलग परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए सुधार की जरूरत तय की जाएगी। इसके बाद ही स्पष्ट होगा कि किस नाले में किस तरह का निर्माण किया जा सकता है और किस हिस्से में जलनिकासी संबंधी सुधार पहले जरूरी हैं।

 

एक महीने में तैयार होगी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट

बुडको ने चयनित तकनीकी एजेंसी को काम शुरू होने के 30 दिनों के भीतर विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश दिया है। इस रिपोर्ट में परियोजना से जुड़े तकनीकी और वित्तीय पहलुओं का विवरण शामिल होगा। निर्माण में इस्तेमाल होने वाली सामग्री, काम की मात्रा का ब्योरा यानी BOQ, निर्माण योग्य नक्शे और अनुमानित लागत इसके प्रमुख हिस्से होंगे।

DPR किसी बड़ी आधारभूत संरचना परियोजना को आगे बढ़ाने से पहले तैयार की जाने वाली महत्वपूर्ण रिपोर्ट होती है। इसके जरिए यह आकलन किया जाता है कि प्रस्तावित निर्माण तकनीकी रूप से कितना उपयुक्त है, उसे पूरा करने के लिए किन संसाधनों की जरूरत होगी और संभावित खर्च कितना हो सकता है।

पटना के इन छह नालों के मामले में भी रिपोर्ट तैयार होने के बाद परियोजना के स्वरूप को लेकर अधिक स्पष्टता आने की उम्मीद है। रिपोर्ट में यह भी आकलन किया जाएगा कि नालों को विकसित करने के लिए कौन-से निर्माण कार्य जरूरी होंगे और उन्हें किस तरह से पूरा किया जा सकता है।

रिपोर्ट को सक्षम तकनीकी संस्थान से जांच कराने के बाद सौंपना होगा। इसके अंतर्गत शुरुआती संभाव्यता अध्ययन, तकनीकी आकलन, लागत निर्धारण और अंतिम निविदा दस्तावेज तैयार करने जैसे चरण शामिल हैं। इन प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद निर्माण से जुड़े अगले फैसले लिए जा सकेंगे।

अभी DPR तैयार करने का निर्देश दिया गया है। इसका अर्थ यह नहीं है कि सभी छह नालों पर निर्माण कार्य शुरू हो चुका है। निर्माण की समय-सीमा और लागत संबंधी जानकारी रिपोर्ट की जांच तथा आगे की स्वीकृतियों के बाद ही स्पष्ट होगी।

 

6.55 किलोमीटर लंबा है पहाड़ी नाला

योजना में शामिल पहाड़ी नाला नेटवर्क की लंबाई करीब 6.55 किलोमीटर बताई गई है। इस नाले के जलग्रहण क्षेत्र, सहायक नालों और सर्विस ड्रेनों का अध्ययन किया जाएगा। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि पानी किन रास्तों से नाले तक पहुंचता है और किन स्थानों पर उसकी निकासी में बाधाएं पैदा होती हैं।

किसी बड़े नाले की जलनिकासी क्षमता का आकलन करते समय केवल मुख्य नाले की स्थिति देखना पर्याप्त नहीं होता। उससे जुड़े छोटे नालों और आसपास के ड्रेनेज नेटवर्क की स्थिति भी महत्वपूर्ण होती है। यदि सहायक नालों का संपर्क ठीक नहीं है या पानी के बहाव में कहीं रुकावट है, तो मुख्य नाले की क्षमता होने के बावजूद जलजमाव की समस्या बनी रह सकती है।

इसी वजह से पहाड़ी नाले के साथ जुड़े सर्विस ड्रेनों और जलग्रहण क्षेत्र का अध्ययन योजना का अहम हिस्सा होगा। तकनीकी एजेंसी यह आकलन करेगी कि किन स्थानों पर सुधार की जरूरत है और पानी की निकासी को सुचारु बनाने के लिए कौन-से उपाय किए जा सकते हैं।

पहाड़ी नाले से जुड़े कार्यों की अंतिम रूपरेखा DPR तैयार होने के बाद स्पष्ट होगी। इसमें निर्माण की जरूरत, अनुमानित लागत और जलनिकासी व्यवस्था में किए जाने वाले सुधारों का विवरण शामिल किया जाएगा।

 

मोहनपुर नाले में जलनिकासी की बाधाएं दूर करने पर जोर

मोहनपुर नाले की लंबाई करीब 700 मीटर बताई गई है। यह पुनाईचक से ऊर्जा पार्क के पास गांधी चौक तक फैला हुआ है। इस नाले के रास्ते में जलनिकासी की बाधाओं और अलग-अलग नालों के बीच छूटे संपर्क को दुरुस्त करने की योजना है।

किसी इलाके में जलजमाव की समस्या तब भी हो सकती है, जब आसपास के नाले एक-दूसरे से ठीक तरह से नहीं जुड़े हों। पानी को मुख्य निकासी मार्ग तक पहुंचाने में बाधा आने पर बारिश के दौरान सड़क और निचले हिस्सों में पानी जमा हो सकता है। इसलिए मोहनपुर नाले के अध्ययन में उसके मार्ग और उससे जुड़े ड्रेनेज नेटवर्क पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

DPR तैयार करने के दौरान यह देखा जाएगा कि नाले में पानी का बहाव किस तरह होता है और किन स्थानों पर सुधार की जरूरत है। यदि किसी हिस्से में सहायक नाले का संपर्क अधूरा है या निकासी मार्ग में रुकावट है, तो उसे दूर करने के लिए तकनीकी समाधान तैयार किया जा सकता है।

इस नाले के विकास से संबंधित निर्माण की लागत और कार्यों की वास्तविक सीमा अभी तय नहीं है। इनका निर्धारण तकनीकी अध्ययन और रिपोर्ट की जांच के बाद किया जाएगा।

योगीपुर और बादशाही पईन से जुड़े इलाकों पर भी ध्यान

परियोजना में योगीपुर नाले को भी शामिल किया गया है। यह योगीपुर से बहादुरपुर टावर होते हुए भूतनाथ मेट्रो स्टेशन तक जाता है। इस नाले के मार्ग और आसपास के ड्रेनेज नेटवर्क का अध्ययन करके जलनिकासी से जुड़ी समस्याओं की पहचान की जाएगी।

इसी तरह बादशाही पईन नंदलाल छपरा से माधोपुर तक घनी आबादी वाले इलाकों से होकर गुजरता है। ऐसे क्षेत्रों में नाले की क्षमता और पानी के बहाव की स्थिति का आकलन महत्वपूर्ण होगा। घनी आबादी वाले इलाकों में जलनिकासी की व्यवस्था प्रभावित होने पर लोगों के दैनिक आवागमन और आसपास की सड़कों पर भी असर पड़ सकता है।

योगीपुर और बादशाही पईन के लिए तैयार की जाने वाली रिपोर्ट में नालों की मौजूदा स्थिति, उनसे जुड़े सहायक मार्ग और पानी की निकासी में आने वाली संभावित बाधाओं को शामिल किया जाएगा। इसके आधार पर जरूरत के अनुसार सुधार की योजना बनाई जा सकेगी।

दोनों नालों के संबंध में भी अभी अंतिम निर्माण योजना और लागत का विवरण उपलब्ध नहीं है। रिपोर्ट तैयार होने के बाद यह स्पष्ट होगा कि किन हिस्सों को विकसित किया जाएगा और नालों को ढंककर सड़क बनाने की योजना कहां तक लागू की जा सकती है।

 

सिटी मोट और खनुआ नालों का भी होगा तकनीकी आकलन

छह नालों की प्रस्तावित योजना में सिटी मोट और खनुआ नालों को भी शामिल किया गया है। इन दोनों नालों की वर्तमान स्थिति, पानी के बहाव और आसपास के ड्रेनेज नेटवर्क का अध्ययन किया जाएगा। इसका उद्देश्य उन स्थानों की पहचान करना है, जहां जलनिकासी में सुधार की जरूरत है।

तकनीकी जांच के दौरान यह देखा जाएगा कि नालों की मौजूदा संरचना पानी के बहाव के लिए पर्याप्त है या नहीं। साथ ही, उनके बीच संपर्क और पानी को अंतिम निकासी स्थल तक पहुंचाने की व्यवस्था का भी आकलन किया जाएगा।

नालों को ढंककर सड़क बनाने का प्रस्ताव तैयार करते समय यह सुनिश्चित करना जरूरी होगा कि निर्माण से जलनिकासी बाधित न हो। नालों के ऊपर सड़क या अन्य संरचना बनने के बाद भी सफाई, निरीक्षण और रखरखाव के लिए उचित व्यवस्था की जरूरत होगी। इन तकनीकी पहलुओं पर DPR में विचार किया जाएगा।

सिटी मोट और खनुआ नालों के लिए भी निर्माण का अंतिम स्वरूप और लागत रिपोर्ट तैयार होने के बाद ही सामने आएगी। फिलहाल योजना का प्रमुख चरण सर्वेक्षण और तकनीकी आकलन है।

 

ड्रोन सर्वे और GIS मैपिंग से तैयार होगा डिजिटल नक्शा

इन छह नालों की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने के लिए तकनीकी एजेंसी ड्रोन सर्वे, स्थलाकृतिक सर्वेक्षण और बारिश के पानी के बहाव का अध्ययन करेगी। इन तकनीकों की मदद से नालों की मौजूदा स्थिति, आसपास की जमीन की बनावट और पानी की निकासी से जुड़ी समस्याओं का आकलन किया जा सकेगा।

स्थलाकृतिक सर्वेक्षण के जरिए जमीन की ऊंचाई और ढलान जैसी जानकारियां जुटाई जा सकती हैं। बारिश के पानी के बहाव का अध्ययन यह समझने में मदद करेगा कि पानी किस दिशा में जाता है और किन स्थानों पर जमा होने या उलटे बहाव की समस्या पैदा हो सकती है।

इसके अलावा भूमिगत सीवरेज नेटवर्क और नालों के बीच तालमेल की भी जांच की जाएगी। यदि जलनिकासी के अलग-अलग नेटवर्क के बीच उचित संपर्क नहीं है, तो पानी को अंतिम निकासी स्थल तक पहुंचाने में परेशानी हो सकती है। ऐसे स्थानों की पहचान परियोजना की योजना तैयार करने में महत्वपूर्ण होगी।

पूरे ड्रेनेज नेटवर्क का GIS आधारित डिजिटल नक्शा भी तैयार किया जाएगा। इससे नालों के मार्ग, सहायक ड्रेनों, पुलियों और निकासी बिंदुओं की स्थिति को एक साथ समझने में मदद मिल सकती है। डिजिटल मैपिंग से उन जगहों की पहचान करना आसान हो सकता है, जहां संपर्क अधूरा है या सुधार की जरूरत है।

 

DPR के बाद स्पष्ट होगी निर्माण की लागत और अगली प्रक्रिया

पटना के छह प्रमुख नालों को विकसित करने की योजना से जलनिकासी और आवागमन दोनों से जुड़ी समस्याओं के समाधान की उम्मीद की जा रही है। हालांकि, इसका वास्तविक असर परियोजना के तकनीकी स्वरूप, निर्माण की गुणवत्ता और रखरखाव की व्यवस्था पर निर्भर करेगा।

बुडको की ओर से DPR तैयार कराने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद परियोजना की लागत, जरूरी निर्माण कार्यों और आगे की निविदा प्रक्रिया के बारे में स्पष्टता आएगी। फिलहाल नालों की मौजूदा स्थिति का अध्ययन करना और जलनिकासी की बाधाओं की पहचान करना प्राथमिक चरण है।

यदि रिपोर्ट में प्रस्तावित सुधारों को स्वीकृति मिलती है और निर्माण कार्य आगे बढ़ता है, तो संबंधित इलाकों में आवागमन के लिए अतिरिक्त जगह उपलब्ध कराने की संभावना बन सकती है। साथ ही, नालों की क्षमता और उनके बीच संपर्क सुधारने से बारिश के दौरान पानी की निकासी को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।

लेकिन अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि सभी इलाकों में जलजमाव और ट्रैफिक जाम की समस्या पूरी तरह खत्म हो जाएगी। परियोजना के परिणाम इस बात पर भी निर्भर करेंगे कि नालों का नेटवर्क कितना प्रभावी बनाया जाता है, पानी की निकासी के रास्ते कितने सुचारु रहते हैं और निर्माण के बाद सफाई तथा रखरखाव कैसे किया जाता है।

फिलहाल पटना के पहाड़ी, मोहनपुर, सिटी मोट, खनुआ, बादशाही पईन और योगीपुर नालों की DPR तैयार करने की प्रक्रिया इस योजना का पहला महत्वपूर्ण कदम है। रिपोर्ट तैयार होने और तकनीकी जांच पूरी होने के बाद ही निर्माण की लागत, समय-सीमा और अंतिम स्वरूप की तस्वीर साफ हो सकेगी।

मैं खबर को संक्षिप्त और कम दोहराव वाली बनाऊंमैं छहों नालों की जानकारी तालिका में व्यवस्थित करूं
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