BNT Desk: बिहार के लोगों के लिए बुनियादी ढांचे (Infrastructure) के मोर्चे पर एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। पटना से सासाराम के बीच होने वाला घंटों का थकाऊ सफर अब बीते दिनों की बात होने वाली है। सरकार ने बहुप्रतीक्षित पटना-भोजपुर-सासाराम फोरलेन सड़क परियोजना को हरी झंडी दे दी है। इस प्रोजेक्ट के शुरू होने से न केवल दक्षिण बिहार की कनेक्टिविटी सुधरेगी, बल्कि व्यापार और रोजगार के नए रास्ते भी खुलेंगे।
विदेशी कंपनी से करार: सितंबर से गूंजेंगी मशीनों की आवाज
इस विशाल प्रोजेक्ट के निर्माण की जिम्मेदारी ओमान की मशहूर कंपनी ‘गल्फर इंजीनियरिंग एंड कंस्ट्रक्शन’ को सौंपी गई है। कंपनी और सरकार के बीच आधिकारिक एग्रीमेंट (Agreement) की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है।
वर्तमान में कंपनी बैंकों से फंड यानी वित्तीय मदद लेने की कागजी कार्रवाई में जुटी है। जानकारों का मानना है कि इस प्रक्रिया में करीब 4 महीने का समय लगेगा। अगर सब कुछ योजना के अनुसार रहा, तो सितंबर 2026 से जमीन पर सड़क निर्माण का काम शुरू हो जाएगा।
120 किमी का सफर, अब सिर्फ 2 घंटे में
अभी पटना से सासाराम जाने के लिए लोगों को खराब रास्तों और जाम की वजह से लगभग 4 घंटे का समय लग जाता है। 120 किलोमीटर लंबी इस नई फोरलेन सड़क के बनने के बाद यह दूरी महज 2 घंटे में तय की जा सकेगी।
-
समय की बचत: सफर का समय आधा रह जाएगा।
-
खर्च में कटौती: बेहतर सड़क होने के कारण वाहनों के पेट्रोल और डीजल की खपत कम होगी।
-
मेंटेनेंस: गाड़ियों के रखरखाव का खर्च भी घटेगा।
दो चरणों में पूरा होगा प्रोजेक्ट
प्रशासनिक सुविधा और काम की रफ्तार को देखते हुए इस परियोजना को दो हिस्सों में बांटा गया है:
-
पहला चरण: पटना से आरा (भोजपुर) तक, जिसकी लंबाई लगभग 46 किलोमीटर होगी।
-
दूसरा चरण: आरा से सासाराम तक, जिसकी लंबाई करीब 74 किलोमीटर होगी।
देरी की वजह और नया लक्ष्य
हालांकि, इस प्रोजेक्ट के लिए टेंडर की प्रक्रिया काफी पहले पूरी हो गई थी, लेकिन कंपनी के विदेशी होने के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कुछ जरूरी मंजूरियों में देरी हुई। इस वजह से काम शुरू होने में करीब 6 महीने का विलंब हुआ। पहले इस सड़क को 2028 तक पूरा करने की योजना थी, लेकिन अब निर्माण शुरू होने की नई तारीख को देखते हुए इसका लक्ष्य वर्ष 2029 रखा गया है।
‘एक्सेस-कंट्रोल’ डिजाइन: सुरक्षित और स्मार्ट यात्रा
यह सड़क कोई आम हाईवे नहीं होगी, बल्कि इसे एक्सेस-कंट्रोल (Access-Controlled) तकनीक पर बनाया जा रहा है। इसका मतलब है कि सड़क पर कहीं से भी कोई भी वाहन प्रवेश नहीं कर सकेगा।
-
प्रवेश और निकास के लिए खास ‘एंट्री और एग्जिट पॉइंट्स’ बनाए जाएंगे।
-
इससे मुख्य सड़क पर अचानक आने वाले स्थानीय ट्रैफिक और मवेशियों का खतरा कम होगा।
-
दुर्घटनाओं की संभावना न्यूनतम होगी और वाहन अपनी तय गति सीमा में चल सकेंगे।
इन शहरों और कस्बों की बदलेगी किस्मत
इस फोरलेन का सबसे बड़ा लाभ पटना, भोजपुर, अरवल और रोहतास जिले के निवासियों को मिलेगा। इसके अलावा इसके रूट में आने वाले छोटे शहरों जैसे पीरो, नोबतपुर, सहार, हसन बाजार, संझौली और नोखा के लोगों के लिए राजधानी पटना पहुंचना बेहद आसान हो जाएगा।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह सड़क सासाराम के रास्ते बनारस (वाराणसी) जाने वाले यात्रियों के लिए भी एक ‘शॉर्टकट’ का काम करेगी, जिससे यूपी और बिहार के बीच का व्यापारिक संबंध और मजबूत होगा।
आर्थिक विकास का नया गलियारा
यह फोरलेन सिर्फ एक सड़क नहीं, बल्कि एक ‘इकोनॉमिक कॉरिडोर’ की तरह काम करेगा।
-
व्यापार: सासाराम और रोहतास के इलाकों से अनाज और अन्य सामानों की पटना तक ढुलाई तेज होगी।
-
रोजगार: सड़क के किनारे नए पेट्रोल पंप, ढाबे, होटल और लॉजिस्टिक पार्क बनने से स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा।
-
नेटवर्क: यह सड़क कई अन्य नेशनल हाईवे (NH) को आपस में जोड़ेगी, जिससे पूरे इलाके का ट्रांसपोर्ट नेटवर्क मजबूत होगा।