BNT Desk: पटना में सोमवार को छात्र, युवा, किसान, मजदूर और विभिन्न जनसंगठनों के लोग कई मुद्दों को लेकर सड़क पर उतरे। गांधी मैदान के गेट नंबर-10 से राजभवन की ओर मार्च निकाला गया। आयोजकों की ओर से इस मार्च के जरिए महंगाई, बेरोजगारी, किसानों की जमीन, भूमि अधिग्रहण, बाढ़ और राहत व्यवस्था, महिला सुरक्षा, अपराध, शिक्षा और रोजगार जैसे मुद्दे उठाए गए। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी और उससे जुड़े विभिन्न जनसंगठनों की ओर से 28 सितंबर को राजभवन मार्च की पहले से तैयारी की जा रही थी। मार्च में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग से जुड़ा मुद्दा भी उठाया गया। CPI की ओर से उनकी बर्खास्तगी की मांग को लेकर राज्यव्यापी आंदोलन की बात भी कही गई है।
गांधी मैदान से शुरू हुआ मार्च
प्रदर्शनकारी गांधी मैदान के गेट नंबर-10 से मार्च लेकर राजभवन की ओर बढ़े। इसमें छात्र, युवा, किसान, खेत मजदूर, श्रमिक और महिलाओं से जुड़े संगठनों के कार्यकर्ता शामिल हुए। अलग-अलग संगठनों के बैनर और पोस्टर के साथ प्रदर्शनकारी अपनी मांगों को लेकर सड़क पर दिखाई दिए। आयोजकों के मुताबिक, मार्च का उद्देश्य अलग-अलग वर्गों से जुड़े मुद्दों को सरकार और राजभवन तक पहुंचाना है। इससे पहले बिहार के अलग-अलग जिलों में CPI और उससे जुड़े संगठनों ने बैठकें कर 28 सितंबर के कार्यक्रम में भाग लेने की तैयारी की थी।
बेरोजगारी और महंगाई का मुद्दा प्रमुख
मार्च में बेरोजगारी और महंगाई को प्रमुख मुद्दों में शामिल किया गया। छात्र और युवा संगठनों की ओर से रोजगार और शिक्षा से जुड़े सवाल उठाए गए। संगठनों का कहना है कि युवाओं के रोजगार से जुड़े सवालों पर सरकार को जवाब देना चाहिए। वहीं महंगाई को लेकर भी प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगें रखीं। CPI से जुड़े संगठनों की बैठकों में महंगाई, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों को लगातार मार्च का हिस्सा बताया गया था।
किसानों की जमीन और भूमि अधिग्रहण पर भी प्रदर्शन
राजभवन मार्च में किसानों और खेत मजदूरों से जुड़े मुद्दों को भी प्रमुखता दी गई। भूमि अधिग्रहण और किसानों की जमीन से जुड़े मामलों को लेकर प्रदर्शनकारियों ने सरकार के सामने अपनी मांग रखने की कोशिश की। आयोजकों की ओर से बुलडोजर कार्रवाई और कमजोर वर्गों से जुड़े जमीन के मामलों पर भी सवाल उठाने की बात कही गई थी। किसान संगठनों ने कृषि संकट और ग्रामीण मजदूरों के रोजगार से जुड़े मुद्दों को भी आंदोलन में शामिल किया है।
बाढ़-सूखा और राहत व्यवस्था का सवाल
बिहार में बाढ़ और सूखे की समस्या भी मार्च के प्रमुख मुद्दों में रही। जन संगठनों की ओर से बाढ़-सूखा के स्थायी समाधान की मांग की गई है। साथ ही बाढ़ प्रभावित इलाकों में पर्याप्त राहत और पुनर्वास व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए गए। CPI से जुड़े संगठनों ने बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए उचित मुआवजा और आपदा से निपटने के स्थायी उपायों की मांग को लेकर आंदोलन की बात कही है।
महिला सुरक्षा और अपराध पर भी सवाल
प्रदर्शन में महिलाओं और युवतियों के खिलाफ अपराध तथा हिंसा का मुद्दा भी उठाया गया। आयोजकों की ओर से महिला सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को लेकर सरकार से कार्रवाई की मांग की गई। इसके अलावा अपराध, भ्रष्टाचार और आम लोगों के अधिकारों से जुड़े मुद्दे भी मार्च में शामिल रहे। अलग-अलग संगठनों ने कहा कि आंदोलन का उद्देश्य किसी एक मुद्दे तक सीमित नहीं है, बल्कि विभिन्न वर्गों की समस्याओं को एक मंच से सामने रखना है।
मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार का मुद्दा भी उठा
मार्च के दौरान मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे या बर्खास्तगी की मांग से जुड़ा मुद्दा भी सामने आया। CPI बिहार के राज्य सचिव रामनरेश पाण्डेय ने पहले कहा था कि ज्ञानेश कुमार की बर्खास्तगी की मांग को लेकर राज्यव्यापी आंदोलन चलाया जाएगा। 28 सितंबर का राजभवन मार्च भी इसी आंदोलन के प्रमुख कार्यक्रमों में बताया गया था। हालांकि, इस मांग के पीछे लगाए गए राजनीतिक और चुनावी आरोप प्रदर्शनकारियों के दावे हैं। उन्हें स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य के रूप में नहीं माना जा सकता।
अलग-अलग जनसंगठनों की भागीदारी
इस मार्च में किसान सभा, खेत मजदूर यूनियन, ट्रेड यूनियन, महिला संगठन, युवा और छात्र संगठनों की भागीदारी बताई गई है। बिहार के अलग-अलग जिलों में हुई बैठकों में कार्यकर्ताओं को पटना पहुंचने और मार्च में शामिल होने की अपील की गई थी। कुछ संगठनों ने अपने स्तर पर बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं के पटना पहुंचने की तैयारी की थी। समस्तीपुर में हुई CPI की बैठक में 500 से अधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने की बात कही गई थी।
प्रशासन ने की सुरक्षा की तैयारी
मार्च को देखते हुए प्रशासन की ओर से भी सुरक्षा व्यवस्था की गई। गांधी मैदान से राजभवन की ओर जाने वाले मार्ग पर पुलिस की तैनाती और बैरिकेडिंग की व्यवस्था की गई, ताकि भीड़ को नियंत्रित किया जा सके और यातायात व्यवस्था प्रभावित न हो। पटना में इससे पहले भी गांधी मैदान से राजभवन की ओर छात्र मार्च के दौरान पुलिस की बैरिकेडिंग सामने आ चुकी है। इसलिए इस बार भी प्रशासन की ओर से प्रदर्शनकारियों की गतिविधियों पर नजर रखी गई।
अब आगे क्या होगा?
गांधी मैदान से शुरू हुआ मार्च राजभवन की ओर बढ़ा। प्रदर्शनकारी अपनी मांगों और मुद्दों को संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। दूसरी ओर प्रशासन की प्राथमिकता कानून-व्यवस्था और यातायात को नियंत्रित रखना है। आज के प्रदर्शन में बेरोजगारी और महंगाई से लेकर किसानों की जमीन, भूमि अधिग्रहण, बाढ़ राहत, महिला सुरक्षा, अपराध, शिक्षा और रोजगार तक कई मुद्दे एक साथ सामने आए। इसके साथ ही मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़ी मांग भी प्रदर्शन का हिस्सा रही। अब देखना होगा कि प्रदर्शनकारी अपनी मांगें किस स्तर तक पहुंचा पाते हैं और प्रशासन की ओर से इन मुद्दों पर क्या प्रतिक्रिया सामने आती है।