BNT Desk: शहर को जाम से मुक्ति दिलाने और यात्रियों को बेहतर सुविधाएं देने के लिए पटना जंक्शन के पास बनाया गया ‘मल्टी मॉडल हब’ अपनी उपयोगिता साबित करने में विफल रहा है। करोड़ों की लागत से तैयार इस हब के बाहर और भीतर की अव्यवस्था से न केवल कार चालकों को परेशानी हो रही है, बल्कि शहर की ट्रैफिक व्यवस्था भी बदतर हो गई है।
हब के अंदर की बदहाली
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ब्लॉक रास्ते: मल्टी मॉडल हब के दूसरे फ्लोर पर जाने वाले रास्ते पर हमेशा जाम रहता है। इसका मुख्य कारण फर्स्ट फ्लोर पर ऑटो की बेतरतीब पार्किंग है।
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साझा रास्ता: हब में कार और ऑटो के लिए कोई अलग लेन नहीं है। एक ही रास्ते पर ऑटो का कब्जा रहने के कारण कार चालकों को अंदर जाने की जगह नहीं मिलती।
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खाली रहती है पार्किंग: अंदर प्रवेश करने में होने वाली परेशानी के कारण कार चालक वहां गाड़ी ले जाने से कतराते हैं, जिससे वहां फोर-व्हीलर की पार्किंग खाली पड़ी रहती है और गाड़ियाँ सड़कों पर खड़ी होती हैं।
प्रशासनिक दावों पर सवाल
इस हब का निर्माण जीपीओ गोलंबर, बुद्धमार्ग और जंक्शन के आसपास के इलाके को ‘नो-जाम जोन’ बनाने के लिए किया गया था। लेकिन, सुरक्षाकर्मियों और ट्रैफिक पुलिस की लचर मॉनिटरिंग के कारण चालक अपनी मर्जी से गाड़ियाँ कहीं भी खड़ी कर देते हैं। जीपीओ गोलंबर के पास बनी नई पार्किंग के बावजूद ऑटो चालक फ्लाईओवर के नीचे और गोलंबर के पास ही गाड़ियाँ खड़ी कर रहे हैं, जिससे हर समय जाम की स्थिति बनी रहती है।
क्या हैं सुधार के सुझाव?
परेशान वाहन चालकों और यात्रियों ने प्रशासन से निम्नलिखित कदम उठाने की मांग की है:
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अलग-अलग लेन: कार और ऑटो के लिए एंट्री और एग्जिट का रूट पूरी तरह अलग किया जाए।
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नो-पार्किंग जोन: हब के रैंप को ‘नो-पार्किंग जोन’ घोषित कर वहां सख्त निगरानी की जाए।
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पुलिस की तैनाती: यातायात को सुचारू रखने के लिए नियमित रूप से ट्रैफिक पुलिस की तैनाती हो।
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सख्ती: जीपीओ गोलंबर के आसपास ऑटो के मनमाने परिचालन पर रोक लगाई जाए ताकि यात्री सुरक्षित आवाजाही कर सकें।
करोड़ों का निवेश और भविष्य की योजना, फिलहाल पटना की सड़कों पर दम तोड़ती नजर आ रही है। यदि प्रशासन ने समय रहते इस हब का प्रबंधन दुरुस्त नहीं किया, तो यह केवल एक सफेद हाथी बनकर रह जाएगा।