पटना: बेउर जेल में आधी रात ‘मेगा रेड’, सिटी एसपी के नेतृत्व में भारी पुलिस बल ने खंगाली बैरकें, हड़कंप

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BNT Desk: बिहार की राजधानी पटना से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। पटना की सबसे सुरक्षित और हाई-प्रोफाइल मानी जाने वाली आदर्श केंद्रीय कारा, बेउर में देर रात अचानक प्रशासन ने धावा बोल दिया। सिटी एसपी और अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) के नेतृत्व में की गई इस मेगा छापेमारी से जेल प्रशासन और कैदियों के बीच हड़कंप मच गया। भारी पुलिस बल की मौजूदगी में घंटों तक जेल के चप्पे-चप्पे को खंगाला गया।

आधी रात को अचानक पहुंचा भारी पुलिस बल

जब पूरा शहर सो रहा था, तब पटना पुलिस की दर्जनों गाड़ियां बेउर जेल के मुख्य गेट पर जा रुकीं। सिटी एसपी भानु प्रताप सिंह के नेतृत्व में शुरू हुई इस कार्रवाई में केवल एक थाना नहीं, बल्कि कई थानों की पुलिस फोर्स शामिल थी। इस ऑपरेशन की गोपनीयता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि छापेमारी शुरू होने तक जेल के निचले स्तर के कर्मचारियों को भी इसकी भनक नहीं थी।

इस मेगा रेड में जिला पुलिस के साथ-साथ बीएमपी (BMP) के महिला और पुरुष जवान बड़ी संख्या में शामिल रहे। सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच पुलिस की टीम सीधे कैदियों के वार्डों में दाखिल हुई।

चप्पे-चप्पे की तलाशी: बैरक-बैरक पहुंची पुलिस

पुलिस की टीमों ने जेल के अंदर अलग-अलग ग्रुप बनाकर सर्च ऑपरेशन चलाया। सूत्रों के मुताबिक, जेल के अंदर संदिग्ध गतिविधियों और प्रतिबंधित सामान के इस्तेमाल की गुप्त सूचना मिली थी। इसी आधार पर पुलिस की टीम एक-एक बैरक में गई और कैदियों के सामान की सघन तलाशी ली।

  • मोबाइल और सिम की तलाश: जेल से रंगदारी और आपराधिक साजिशों की खबरों के बीच मुख्य फोकस मोबाइल फोन और सिम कार्ड पर रहा।

  • नशीले पदार्थ: वार्डों के कोनों और बिस्तर के नीचे नशीले पदार्थों की तलाश की गई।

  • प्रतिबंधित हथियार: जेल के अंदर नुकीली चीजों या अन्य किसी भी हथियार की संभावना को देखते हुए मेटल डिटेक्टर का भी उपयोग किया गया।

महिला SDO ने खुद संभाली मॉनिटरिंग की कमान

इस पूरी कार्रवाई के दौरान अनुमंडल पदाधिकारी (सदर), पटना खुद मौके पर मौजूद रहीं। उन्होंने जेल के अंदर चल रहे सर्च ऑपरेशन की पल-पल की मॉनिटरिंग की। सिटी एसपी और एसडीओ की मौजूदगी ने यह साफ कर दिया कि शासन जेल की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बेहद गंभीर है। महिला पुलिसकर्मियों ने महिला वार्डों की तलाशी ली, ताकि किसी भी स्तर पर कोई कमी न रह जाए।

जेल में हड़कंप: क्या हुई बरामदगी?

देर रात तक चले इस तलाशी अभियान के दौरान जेल के अंदर अफरा-तफरी का माहौल रहा। कैदियों के बीच खलबली मच गई। हालांकि, देर रात तक चली इस रेड में क्या-क्या सामान बरामद हुआ है, इसको लेकर अभी तक कोई आधिकारिक सूची (Official Confirmation) जारी नहीं की गई है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि बरामद सामानों की लिस्ट तैयार की जा रही है और जल्द ही इस पर प्रेस ब्रीफिंग की जा सकती है।

क्यों पड़ी छापेमारी की जरूरत?

बेउर जेल में कई बड़े अपराधी, नेता और आतंकी बंद हैं। अक्सर यह खबरें आती रहती हैं कि जेल के अंदर से ही मोबाइल के जरिए गैंग संचालित किए जा रहे हैं। हाल के दिनों में मिली कुछ इनपुट के बाद प्रशासन ने यह तय किया कि एक बड़ा सर्च ऑपरेशन चलाया जाए ताकि अपराधियों के नेटवर्क को तोड़ा जा सके।

“यह एक रूटीन चेकिंग के साथ-साथ विशेष इनपुट पर आधारित कार्रवाई थी। जेल के अंदर अनुशासन बनाए रखना और अवैध गतिविधियों को रोकना हमारी प्राथमिकता है।” – प्रशासनिक सूत्र

अपराधियों के नेटवर्क पर करारी चोट

इस मेगा छापेमारी ने यह स्पष्ट संदेश दे दिया है कि जेल की दीवारें अब अपराधियों के लिए सुरक्षित ठिकाना नहीं रहीं। पटना पुलिस और जिला प्रशासन की इस संयुक्त कार्रवाई ने जेल के अंदर चल रहे ‘अवैध साम्राज्य’ पर बड़ी चोट की है। अब सबकी निगाहें पुलिस की आधिकारिक रिपोर्ट पर टिकी हैं कि इस रेड में कौन-कौन से प्रतिबंधित सामान पकड़े गए हैं।

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