बिहार: पटना की सड़कों पर TRE 4 अभ्यर्थियों का महाआंदोलन, शिक्षक बहाली को लेकर उबाल

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BNT Desk: बिहार में शिक्षक बनने का सपना देख रहे लाखों युवाओं के धैर्य का बांध अब टूट चुका है। BPSC TRE 4 (शिक्षक नियुक्ति परीक्षा चरण-4) के विज्ञापन में हो रही लगातार देरी के खिलाफ आज राजधानी पटना की सड़कें छात्रों के नारों से गूंज उठीं। हजारों की संख्या में अभ्यर्थी अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतर आए हैं, जिससे प्रशासन और शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है।

छात्र नेता दिलीप के नेतृत्व में ‘हुंकार’

इस महाआंदोलन का नेतृत्व छात्र नेता दिलीप कुमार कर रहे हैं। आंदोलन की शुरुआत ऐतिहासिक पटना कॉलेज के गेट से हुई, जहाँ राज्य के कोने-कोने से छात्र जमा हुए। यहां से छात्रों ने ‘पैदल मार्च’ शुरू किया, जिसका गंतव्य बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) का कार्यालय है। प्रदर्शनकारी छात्र हाथों में तख्तियां लिए सरकार और आयोग के खिलाफ जमकर नारेबाजी कर रहे हैं। छात्रों का कहना है कि अब केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा, उन्हें ठोस विज्ञापन चाहिए।

वादों की कसौटी पर फेल हुआ आयोग?

अभ्यर्थियों के इस गुस्से के पीछे आयोग द्वारा दी गई पिछली डेडलाइन्स (सीमा रेखा) हैं। छात्रों ने आरोप लगाया कि:

  • 16 अप्रैल को परीक्षा नियंत्रक ने भरोसा दिया था कि TRE 4 का विज्ञापन बहुत जल्द जारी कर दिया जाएगा।

  • आयोग की ओर से यह दावा भी किया गया था कि 25 या 26 अप्रैल से आवेदन की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।

  • आज 8 मई की तारीख आ चुकी है, लेकिन आधिकारिक वेबसाइट पर विज्ञापन का कहीं अता-पता नहीं है।

छात्रों का कहना है कि जब आयोग खुद अपनी तारीखों पर कायम नहीं रहता, तो युवाओं का भविष्य अंधकार में दिखने लगता है।

13 लाख अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में

बिहार में शिक्षक बहाली की प्रक्रिया पिछले कुछ वर्षों से सुर्खियों में रही है, लेकिन TRE 4 के मामले में पेच फंसता दिख रहा है। आंकड़ों के मुताबिक, करीब 13 लाख अभ्यर्थी इस भर्ती का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। इनमें वे छात्र भी शामिल हैं जिन्होंने हाल ही में पात्रता परीक्षाएं उत्तीर्ण की हैं।

अभ्यर्थियों का सीधा आरोप है कि पिछले दो साल से शिक्षा विभाग और BPSC केवल ‘आश्वासन का खेल’ खेल रहे हैं। बार-बार रिक्तियों की गणना और तकनीकी कारणों का हवाला देकर प्रक्रिया को टाला जा रहा है, जिससे कई छात्रों की उम्र सीमा (Age Limit) भी निकलती जा रही है।

नए शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी के लिए ‘अग्निपरीक्षा’

बिहार के नवनियुक्त शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने हाल ही में कार्यभार संभाला है। पद संभालते ही उनके सामने यह सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। एक तरफ जहां सरकार युवाओं को रोजगार देने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी तरफ सड़कों पर उतरे ये हजारों छात्र सरकार के दावों पर सवालिया निशान लगा रहे हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि इस आंदोलन को सही समय पर नहीं संभाला गया, तो यह सरकार के लिए बड़ी मुसीबत बन सकता है। छात्रों की मांग स्पष्ट है— “तुरंत विज्ञापन जारी करो और परीक्षा का कैलेंडर घोषित करो।”

सुरक्षा के कड़े इंतजाम, पुलिस छावनी में बदला इलाका

छात्रों के मार्च को देखते हुए पटना पुलिस पूरी तरह अलर्ट पर है। पटना कॉलेज से लेकर बेली रोड स्थित BPSC कार्यालय तक भारी पुलिस बल की तैनाती की गई है। जगह-जगह बैरिकेडिंग की गई है ताकि छात्रों को कार्यालय के मुख्य द्वार तक पहुंचने से रोका जा सके। कई मौकों पर पुलिस और प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली है।

कब खत्म होगा इंतजार?

फिलहाल, छात्रों का प्रदर्शन जारी है और वे इस बात पर अड़े हैं कि जब तक आयोग के वरिष्ठ अधिकारी या शिक्षा विभाग का कोई प्रतिनिधि आकर उनसे बात नहीं करता और विज्ञापन की पक्की तारीख नहीं बताता, वे पीछे नहीं हटेंगे।

क्या सरकार चुनाव और अन्य व्यस्तताओं के बीच इन 13 लाख युवाओं की पुकार सुनेगी? या फिर TRE 4 की यह भर्ती फाइलों और आश्वासनों में ही दबी रह जाएगी? यह आने वाले कुछ घंटे तय करेंगे। लेकिन एक बात साफ है— बिहार का युवा अब अपने हक के लिए सड़क पर उतरने से डरने वाला नहीं है।

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