BNT Desk: बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की परीक्षा व्यवस्था को लेकर उठ रहे सवालों पर आयोग ने अपना पक्ष स्पष्ट किया है। आयोग ने कहा है कि परीक्षाओं को दो चरणों में कराने का फैसला केवल बिहार तक सीमित नहीं है। देश के कई प्रमुख लोक सेवा आयोग पहले से ही दो या तीन चरणों में परीक्षाएं आयोजित करते हैं। वहीं नेगेटिव मार्किंग को लेकर भी आयोग ने कहा कि यह व्यवस्था सभी अभ्यर्थियों के लिए समान रूप से लागू होती है।
दो चरणों में परीक्षा कराने पर आयोग की सफाई
BPSC ने कहा कि परीक्षा को कम से कम दो चरणों में कराने का निर्णय कई पहलुओं पर विचार करने के बाद लिया गया है। आयोग के मुताबिक संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के अलावा उत्तर प्रदेश, गुजरात, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों में भी अलग-अलग परीक्षाओं के लिए मल्टी-स्टेज परीक्षा व्यवस्था लागू है। आयोग का कहना है कि दो या तीन चरणों में परीक्षा कराने का उद्देश्य परीक्षा प्रक्रिया को व्यवस्थित और पारदर्शी बनाना है। अभ्यर्थियों की संख्या अधिक होने की स्थिति में एक ही दिन सभी उम्मीदवारों की परीक्षा कराना व्यावहारिक नहीं हो सकता। ऐसे में उपलब्ध संसाधनों और परीक्षा केंद्रों की क्षमता को देखते हुए चरणबद्ध परीक्षा कराई जा सकती है।
नेगेटिव मार्किंग पर भी स्थिति स्पष्ट
नेगेटिव मार्किंग को लेकर अभ्यर्थियों के बीच उठ रहे सवालों पर आयोग ने कहा कि BPSC की वस्तुनिष्ठ परीक्षाओं में पहले से ही नेगेटिव मार्किंग का प्रावधान है। किसी विशेष परीक्षा के लिए अलग से यह नियम नहीं बनाया गया है। आयोग के अनुसार गलत उत्तर देने पर निर्धारित नियम के तहत अंक काटे जाते हैं। इसका उद्देश्य अभ्यर्थियों को बिना सोचे-समझे उत्तर देने से रोकना और चयन प्रक्रिया को अधिक निष्पक्ष बनाना है। आयोग ने स्पष्ट किया कि नेगेटिव मार्किंग सभी अभ्यर्थियों के लिए समान है और इसमें किसी वर्ग या माध्यम के आधार पर अंतर नहीं किया जाता।
हिंदी-अंग्रेजी माध्यम के अंकों पर क्या कहा?
परीक्षा में हिंदी माध्यम से लिखने वाले अभ्यर्थियों को कम और अंग्रेजी माध्यम के अभ्यर्थियों को अधिक अंक मिलने के आरोपों पर भी BPSC ने सफाई दी है। आयोग ने कहा कि परीक्षा आवेदन के दौरान अभ्यर्थियों से उनकी पढ़ाई के माध्यम के संबंध में ऐसी जानकारी नहीं ली जाती, जिसके आधार पर हिंदी और अंग्रेजी माध्यम के उम्मीदवारों का अलग-अलग आंकड़ा तैयार किया जा सके। इसलिए बिना किसी आधिकारिक डेटा के यह दावा करना कि किसी एक माध्यम के अभ्यर्थियों को कम या ज्यादा अंक दिए गए, उचित नहीं है। आयोग ने यह भी कहा कि उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन अनुभवी शिक्षकों और प्रोफेसरों की सेवाओं से कराया जाता है। मूल्यांकन के दौरान उत्तर की गुणवत्ता और निर्धारित मानकों को ध्यान में रखा जाता है, न कि अभ्यर्थी ने हिंदी में उत्तर दिया है या अंग्रेजी में।
60 फीसदी से ज्यादा अंक पर कोई रोक नहीं
BPSC ने 60 प्रतिशत से ज्यादा अंक दिए जाने पर कथित रोक को भी गलत बताया है। आयोग के अनुसार ऐसा कोई नियम नहीं है कि किसी अभ्यर्थी को अधिकतम 60 प्रतिशत अंक ही दिए जा सकते हैं। आयोग ने बताया कि मूल्यांकन में ओवर मार्किंग या अंडर मार्किंग की स्थिति सामने आने पर निर्धारित प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की जाती है। यदि किसी अभ्यर्थी का प्रदर्शन बेहतर है और उसके उत्तर निर्धारित मानकों के अनुरूप हैं, तो उसे 60 प्रतिशत से अधिक अंक भी दिए जा सकते हैं।
आवेदन के बाद तय होगी परीक्षा की तारीख
परीक्षा की तारीख को लेकर आयोग ने कहा कि फिलहाल आवेदन प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार किया जा रहा है। आयोग के मुताबिक आवेदन 1 सितंबर से 30 सितंबर तक लिए जाएंगे। आवेदन की अंतिम संख्या सामने आने के बाद ही परीक्षा की तारीख और परीक्षा केंद्रों की व्यवस्था को अंतिम रूप दिया जाएगा। आयोग के अनुसार एक बार में बिहार में करीब पांच लाख तक अभ्यर्थियों की वस्तुनिष्ठ परीक्षा आयोजित कराई जा सकती है। अगर आवेदन करने वाले उम्मीदवारों की संख्या पांच लाख से कम रहती है, तो अलग-अलग कक्षाओं और उपलब्ध केंद्रों के आधार पर तीन तारीखों में परीक्षा कराई जा सकती है।
पांच लाख से ज्यादा आवेदन आए तो बढ़ेंगे परीक्षा के चरण
अगर आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों की संख्या पांच लाख से अधिक होती है तो परीक्षा को दो चरणों में आयोजित करने की जरूरत पड़ सकती है। ऐसी स्थिति में परीक्षा के लिए करीब छह तारीखों की आवश्यकता हो सकती है। इसका मतलब है कि परीक्षा की अंतिम तारीख अभी अभ्यर्थियों की संख्या पर निर्भर करेगी। आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही आयोग यह तय करेगा कि कितने चरणों में परीक्षा आयोजित की जाएगी और इसके लिए कितने परीक्षा केंद्रों की जरूरत होगी।
पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था पर जोर
BPSC ने अपनी सफाई में कहा है कि परीक्षा व्यवस्था में लिए जा रहे फैसलों का उद्देश्य प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाना है। आयोग ने अभ्यर्थियों से अपील की है कि वे बिना आधिकारिक पुष्टि के सोशल मीडिया पर फैल रही सूचनाओं पर भरोसा न करें। फिलहाल अभ्यर्थियों की नजर आवेदन प्रक्रिया और उसके बाद जारी होने वाले परीक्षा कार्यक्रम पर है। आवेदन की संख्या सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि परीक्षा एक चरण में होगी या दो चरणों में और इसके लिए कितनी तारीखें निर्धारित की जाएंगी।