BNT Desk: बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) ने एक बार फिर पेपर लीक की गंभीर शिकायतों और पुलिसिया जांच के आधार पर AEDO परीक्षा को रद्द करने का बड़ा फैसला लिया है। इस परीक्षा के लिए करीब 11 लाख अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था और वे बड़ी उम्मीदों के साथ परीक्षा केंद्रों पर पहुंचे थे। लेकिन सॉल्वर गैंग और पेपर लीक माफियाओं की साजिश ने एक बार फिर बिहार की सबसे बड़ी भर्ती परीक्षाओं में से एक को पटरी से उतार दिया है।
क्यों रद्द हुई परीक्षा?
आयोग ने यह फैसला आर्थिक अपराध इकाई (EOU) और जिला पुलिस की जांच रिपोर्ट के बाद लिया है। जांच के दौरान यह पाया गया कि परीक्षा शुरू होने से पहले ही प्रश्न पत्र के कुछ हिस्से डिजिटल माध्यमों पर प्रसारित हो रहे थे।
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कार्यवाही का आंकड़ा: अब तक बिहार के 6 अलग-अलग जिलों में कुल 8 FIR दर्ज की जा चुकी हैं।
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गिरफ्तारियां: पुलिस ने इस पूरी साजिश में शामिल अब तक 36 लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें सॉल्वर गैंग के मास्टरमाइंड, कुछ अभ्यर्थी और बिचौलिए शामिल हैं।
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छापेमारी: पटना, गया, और नवादा समेत कई संदिग्ध ठिकानों पर पुलिस की छापेमारी अब भी जारी है।
पेपर लीक की ‘पूरी साजिश’ क्या थी?
जांच में जो बातें सामने आई हैं, वे चौंकाने वाली हैं। पेपर लीक की साजिश को काफी पेशेवर तरीके से अंजाम देने की कोशिश की गई थी:
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डिजिटल सेंधमारी: प्रश्न पत्र को परीक्षा शुरू होने से करीब एक घंटे पहले मोबाइल एप्स और व्हाट्सएप ग्रुप्स के जरिए वायरल किया गया।
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सॉल्वर गैंग का नेटवर्क: गैंग ने कुछ सेंटरों के बाहर ‘सॉल्वर’ बैठा रखे थे, जो पेपर मिलते ही उसे हल कर अभ्यर्थियों तक उत्तर पहुंचाने की फिराक में थे।
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ब्लूटूथ और हाईटेक गैजेट्स: कई केंद्रों पर पकड़े गए आरोपियों के पास से हाईटेक ब्लूटूथ डिवाइस और जासूसी कैमरे जैसे उपकरण बरामद हुए हैं।
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मोटी रकम का खेल: शुरुआती पूछताछ में पता चला है कि पेपर उपलब्ध कराने के नाम पर प्रति अभ्यर्थी 5 से 10 लाख रुपये तक की डील की गई थी।
6 जिलों में मची अफरा-तफरी
जैसे ही पुलिस ने दबिश देनी शुरू की, परीक्षा केंद्रों के बाहर हड़कंप मच गया। पटना के साथ-साथ अन्य संवेदनशील जिलों में परीक्षा से पहले ही कई संदिग्धों को हिरासत में लिया गया था। पुलिस ने इनके पास से एडमिट कार्ड, चेक और कई डिजिटल सबूत बरामद किए हैं, जो सीधे तौर पर पेपर लीक की साजिश की ओर इशारा करते हैं।
BPSC का पक्ष और आगामी कदम
बीपीएससी के अधिकारियों का कहना है कि आयोग परीक्षा की सुचिता (Integrity) के साथ कोई समझौता नहीं करेगा।
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छात्रों को राहत: आयोग ने आश्वासन दिया है कि जल्द ही नई तारीखों की घोषणा की जाएगी और अभ्यर्थियों को दोबारा फॉर्म भरने या फीस देने की जरूरत नहीं होगी।
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दोषियों पर कार्रवाई: पकड़े गए सभी 36 आरोपियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जा रही है और उन्हें भविष्य में किसी भी सरकारी परीक्षा में बैठने से प्रतिबंधित (Debar) कर दिया जाएगा।
अभ्यर्थियों में भारी आक्रोश
परीक्षा रद्द होने की खबर मिलते ही अभ्यर्थियों में काफी गुस्सा देखा जा रहा है। दूर-दराज के इलाकों से आए छात्रों का कहना है कि बार-बार पेपर लीक होने से उनकी आर्थिक स्थिति खराब हो रही है और वे मानसिक तनाव का शिकार हो रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी #BPSCPaperLeak जैसे हैशटैग के साथ छात्र न्याय की मांग कर रहे हैं।
सिस्टम की खामियों पर सवाल
BPSC द्वारा उठाए गए इस सख्त कदम ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि सॉल्वर गैंग का नेटवर्क कितना गहरा है। हालांकि आयोग ने परीक्षा रद्द कर गलत तरीके से भर्ती होने वालों के मंसूबों पर पानी फेर दिया है, लेकिन 11 लाख छात्रों के समय और मेहनत की भरपाई कैसे होगी, यह एक बड़ा सवाल है।