बिहार: रिशु श्री टेंडर घोटाले में ED की कार्रवाई तेज, छह IAS अधिकारियों को समन; आनंद किशोर से भी पूछताछ

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BNT Desk: बिहार में सरकारी टेंडरों में कथित अनियमितताओं और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले की जांच तेज हो गई है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने ठेकेदार रिशु श्री से जुड़े कथित टेंडर घोटाले की पड़ताल के सिलसिले में बिहार के छह IAS अधिकारियों को पूछताछ के लिए समन भेजा है। इनमें आनंद किशोर, संतोष कुमार मल्ल, धर्मेंद्र कुमार, योगेश कुमार सागर, अभिलाषा कुमारी शर्मा और सुनील यादव के नाम शामिल हैं। अधिकारियों से अलग-अलग तारीखों पर पूछताछ की जा रही है। जांच का मुख्य फोकस सरकारी टेंडर आवंटन की प्रक्रिया, संभावित अनियमितताओं, वित्तीय लेनदेन और मामले से जुड़े लोगों की भूमिका पर है। यह घटनाक्रम 15 अक्टूबर को पटना हाईकोर्ट की उस टिप्पणी के बाद सामने आया है, जिसमें अदालत ने जांच के दायरे और कथित रूप से पर्दे के पीछे मौजूद अन्य लोगों की भूमिका को लेकर सवाल उठाए थे।

 

छह IAS अधिकारियों को अलग-अलग तारीखों पर समन

रिपोर्टों के मुताबिक, ED ने जिन छह IAS अधिकारियों को पूछताछ के लिए बुलाया है, उनमें आनंद किशोर, संतोष कुमार मल्ल, धर्मेंद्र कुमार, योगेश कुमार सागर, अभिलाषा कुमारी शर्मा और सुनील यादव शामिल हैं। एजेंसी इन अधिकारियों से सरकारी टेंडर से जुड़े फैसलों, संबंधित विभागों की प्रक्रियाओं और कथित वित्तीय अनियमितताओं के बारे में जानकारी जुटाने की कोशिश कर रही है।

जांच एजेंसी की ओर से अब तक पूछताछ में सामने आए सभी तथ्यों का विस्तृत आधिकारिक ब्योरा सार्वजनिक नहीं किया गया है। इसलिए अधिकारियों से पूछे गए सवालों या उनके जवाबों को लेकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। समन भेजना जांच प्रक्रिया का हिस्सा है और इसका अर्थ यह नहीं है कि संबंधित अधिकारी के खिलाफ आरोप साबित हो गए हैं।

इस मामले में ED की जांच का दायरा सरकारी ठेकों के आवंटन से जुड़े दस्तावेजों, निर्णय लेने की प्रक्रिया और संभावित वित्तीय लेनदेन तक फैला हुआ बताया जा रहा है। एजेंसी यह समझने की कोशिश कर रही है कि कथित अनियमितताओं में अलग-अलग स्तरों पर किसकी क्या भूमिका रही हो सकती है।

अभिलाषा शर्मा और सुनील यादव से पूछताछ

28 अक्टूबर को प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, IAS अधिकारी अभिलाषा कुमारी शर्मा से 26 अक्टूबर को पूछताछ की गई थी। वहीं, श्रम संसाधन विभाग में विशेष सचिव के पद पर तैनात IAS अधिकारी सुनील यादव से 27 अक्टूबर को ED ने लगभग छह घंटे तक पूछताछ की। इस दौरान उनसे कथित टेंडर अनियमितताओं और संबंधित प्रशासनिक प्रक्रियाओं के बारे में सवाल किए जाने की जानकारी सामने आई।

धर्मेंद्र कुमार को 28 अक्टूबर को पूछताछ के लिए बुलाए जाने की जानकारी भी रिपोर्टों में दी गई है। हालांकि, इन पूछताछों के दौरान क्या जानकारी मिली और जांच में उससे क्या निष्कर्ष निकलता है, इसकी विस्तृत आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

जांच एजेंसियां आम तौर पर संबंधित व्यक्तियों से दस्तावेजों, निर्णयों और लेनदेन के बारे में स्पष्टीकरण मांगती हैं। इसके बाद उपलब्ध जानकारी का दूसरे रिकॉर्ड और बयानों से मिलान किया जाता है। इस मामले में भी आगे की कार्रवाई पूछताछ और जांच में सामने आने वाले तथ्यों पर निर्भर करेगी।

 

आनंद किशोर से 30 अक्टूबर को पूछताछ की तैयारी

IAS अधिकारी आनंद किशोर को 30 अक्टूबर को ED कार्यालय में उपस्थित होने के लिए समन भेजे जाने की जानकारी सामने आई है। वहीं, संतोष कुमार मल्ल को 29 अक्टूबर को पूछताछ के लिए बुलाए जाने की बात रिपोर्टों में कही गई है। योगेश कुमार सागर के संबंध में भी पूछताछ की तारीख को लेकर एजेंसी के कार्यक्रम से जुड़ी जानकारी सामने आई है। कुछ रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने अगले सप्ताह तक का समय मांगा था।

इन अधिकारियों से पूछताछ का उद्देश्य कथित टेंडर प्रक्रिया से जुड़े तथ्यों को समझना और मामले में सामने आए विभिन्न बिंदुओं की जांच करना बताया जा रहा है। आनंद किशोर सहित वरिष्ठ अधिकारियों को समन भेजे जाने के कारण यह मामला प्रशासनिक महकमे में भी चर्चा का विषय बना हुआ है।

हालांकि, किसी अधिकारी को पूछताछ के लिए बुलाए जाने से उसकी भूमिका या जिम्मेदारी के बारे में अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। जांच एजेंसी को उपलब्ध दस्तावेजों, बयानों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय करनी होगी। संबंधित अधिकारियों का पक्ष और जांच के अंतिम निष्कर्ष भी इस मामले की पूरी तस्वीर समझने के लिए महत्वपूर्ण होंगे।

 

रिशु श्री से जुड़े कथित टेंडर घोटाले की जांच क्या है?

यह मामला बिहार में सरकारी टेंडर प्रक्रिया में कथित हेरफेर और उससे जुड़े संभावित मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों से संबंधित है। रिशु श्री का नाम इस मामले की जांच में सामने आया है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि सरकारी ठेकों को हासिल करने या उनके आवंटन को प्रभावित करने के लिए किसी तरह की अनियमित प्रक्रिया अपनाई गई थी या नहीं।

मामले में ED मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े पहलुओं की जांच कर रही है, जबकि बिहार की विशेष निगरानी इकाई (SVU) भी संबंधित आरोपों की पड़ताल में शामिल रही है। अलग-अलग एजेंसियों की जांच का दायरा और कानूनी आधार अलग हो सकते हैं, लेकिन मामले से जुड़े तथ्यों को समझने के लिए उनके बीच साझा की गई सूचनाएं भी महत्वपूर्ण हो सकती हैं।

जांच से जुड़े विवरणों के अनुसार, रिशु श्री से पूछताछ और उससे प्राप्त जानकारी के आधार पर कुछ वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के नाम सामने आने की बात कही गई थी। इसी संदर्भ में यह सवाल उठा कि क्या कथित टेंडर अनियमितताओं में केवल निजी पक्ष शामिल थे या सरकारी व्यवस्था में भी किसी स्तर पर भूमिका की जांच की आवश्यकता थी। इन सवालों का जवाब जांच और न्यायिक प्रक्रिया से ही स्पष्ट हो सकेगा।

 

15 अक्टूबर को पटना हाईकोर्ट ने जांच पर उठाए थे सवाल

रिशु श्री से संबंधित मामले में 15 अक्टूबर 2026 को पटना हाईकोर्ट में सुनवाई हुई थी। अदालत रिशु श्री की याचिका पर विचार कर रही थी। सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति सत्यव्रत वर्मा ने ED की जांच और वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों की संभावित भूमिका को लेकर कई सवाल उठाए।

अदालत के आदेश में दर्ज विवरण के मुताबिक, ED ने अपने जवाब में बताया था कि उसने छह वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के बारे में जानकारी साझा की थी। इसके बाद तीन अधिकारियों—मुमुक्षु चौधरी, तरणी दास और उमेश कुमार—के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज किए जाने की जानकारी दी गई। अदालत ने सवाल किया कि जब छह अधिकारियों के नाम सामने आए थे, तो संबंधित मामले में सभी की भूमिका की जांच किस तरह की गई और बाकी अधिकारियों के संबंध में क्या कदम उठाए गए।

अदालत ने यह भी पूछा कि जब ED के पास कथित तौर पर कुछ वरिष्ठ अधिकारियों के नाम और उनके संबंध में जानकारी थी, तो उन अधिकारियों को पूछताछ के लिए बुलाने की कार्रवाई पहले क्यों नहीं की गई। अदालत के अनुसार, एजेंसी के जवाब से यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाया कि उन अधिकारियों की भूमिका की जांच किस तरह आगे बढ़ी।

यह टिप्पणी जांच की प्रक्रिया और उसकी व्यापकता को लेकर अदालत की चिंता को दर्शाती है। हालांकि, अदालत की ओर से उठाए गए सवालों को किसी अधिकारी के दोषी होने का फैसला नहीं माना जा सकता। आरोपों की पुष्टि साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही हो सकती है।

 

अदालत ने रिशु श्री की भूमिका पर भी की टिप्पणी

सुनवाई के दौरान पटना हाईकोर्ट ने इस बात पर भी सवाल उठाया कि कथित मनी लॉन्ड्रिंग और सरकारी टेंडरों में हेरफेर जैसे मामले में रिशु श्री की भूमिका कितनी व्यापक थी। अदालत के आदेश में दर्ज टिप्पणी के अनुसार, उपलब्ध परिस्थितियों को देखते हुए यह सवाल उठता है कि क्या रिशु श्री अकेले इतनी बड़ी कथित गतिविधि को अंजाम दे सकता था या अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।

अदालत ने इस संदर्भ में जांच एजेंसी के सामने मौजूद तथ्यों और उसकी कार्रवाई के बीच स्पष्टता की जरूरत पर जोर दिया। सुनवाई में यह मुद्दा भी उठा कि यदि सरकारी अधिकारियों के नाम जांच के दौरान सामने आए थे, तो उनकी भूमिका की जांच किस तरह की गई और संबंधित एजेंसियों ने उन पर क्या कार्रवाई की।

अदालत की टिप्पणी का उद्देश्य जांच के अलग-अलग पहलुओं पर स्पष्टीकरण मांगना था। इसे किसी व्यक्ति या अधिकारी के खिलाफ अंतिम न्यायिक निष्कर्ष नहीं समझना चाहिए। मामले की जांच अभी अपने कानूनी दायरे में आगे बढ़ रही है और आरोपों की पुष्टि होना बाकी है।

 

ED और SVU की जांच पर अब सबकी नजर

रिशु श्री से जुड़े मामले में ED और बिहार की विशेष निगरानी इकाई की कार्रवाई पर अब निगाहें टिकी हैं। ED वरिष्ठ IAS अधिकारियों से पूछताछ के जरिए सरकारी टेंडरों से जुड़े फैसलों और कथित वित्तीय अनियमितताओं की कड़ियों को समझने की कोशिश कर रही है। दूसरी ओर, पटना हाईकोर्ट ने जांच में सामने आए नामों और उन पर की गई कार्रवाई के संबंध में स्पष्ट जानकारी मांगी है।

आगे की जांच में अधिकारियों के बयान, सरकारी दस्तावेज, टेंडर आवंटन की प्रक्रिया और संबंधित वित्तीय रिकॉर्ड अहम हो सकते हैं। इन तथ्यों के आधार पर ही यह निर्धारित किया जा सकेगा कि कथित अनियमितताओं में किसकी क्या भूमिका रही और क्या किसी के खिलाफ आगे कानूनी कार्रवाई की आवश्यकता है।

फिलहाल, छह IAS अधिकारियों को समन भेजे जाने और अलग-अलग तारीखों पर पूछताछ किए जाने की जानकारी सामने आई है। मामले में जांच एजेंसियों की ओर से अंतिम निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं किया गया है। इसलिए यह जरूरी है कि जांच की खबरों को आरोपों और प्रक्रियागत कार्रवाई के संदर्भ में देखा जाए, न कि किसी व्यक्ति की दोषसिद्धि के रूप में।

बिहार के इस कथित टेंडर घोटाले में आने वाले दिनों में ED की पूछताछ और पटना हाईकोर्ट में होने वाली अगली सुनवाई महत्वपूर्ण हो सकती है। अदालत के आदेश के अनुसार, मामले को 27 नवंबर 2026 को दोपहर 3 बजे फिर सूचीबद्ध किया गया है। तब तक जांच और संबंधित पक्षों की ओर से पेश किए जाने वाले जवाबों से आगे की स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद रहेगी।

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