BNT Desk: राष्ट्रीय लोक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा ने पटना में एक महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए केंद्र की राजनीति और बिहार के हक को लेकर तीखे सवाल उठाए हैं। कुशवाहा ने घोषणा की है कि महिला आरक्षण बिल के क्रियान्वयन (Implementation) में हो रही देरी और बिहार के साथ हो रहे अन्याय के विरोध में उनकी पार्टी 22 अप्रैल को राज्यव्यापी आंदोलन करेगी।
इस दिन पटना सहित बिहार के सभी जिला मुख्यालयों पर ‘धिक्कार मार्च’ निकाला जाएगा। इस मार्च के जरिए पार्टी जनता को बताएगी कि किन राजनीतिक दलों ने महिलाओं और बिहार के विकास की राह में रोड़े अटकाए हैं।
महिला आरक्षण: ऐतिहासिक क्षण लेकिन अधूरा प्रयास?
प्रेस वार्ता के दौरान उपेंद्र कुशवाहा ने महिला आरक्षण बिल को भारत के लिए एक ऐतिहासिक क्षण बताया। उन्होंने कहा कि देश की आधी आबादी यानी हमारी माताएं, बहनें और बेटियां अपने अधिकारों की ओर एक बड़ा कदम बढ़ा रही हैं।
कुशवाहा के संबोधन के मुख्य बिंदु:
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समर्थन की वजह: कुशवाहा ने कहा कि उनकी पार्टी ने बिल का समर्थन इसलिए किया क्योंकि वे मानते हैं कि महिला सशक्तिकरण किसी एक खास वर्ग का नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र का मुद्दा है।
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OBC आरक्षण पर रुख: उन्होंने स्वीकार किया कि ओबीसी (OBC) महिलाओं के लिए आरक्षण का विषय अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिना जातीय जनगणना के इसका सटीक निर्धारण संभव नहीं है।
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भरोसा: कुशवाहा ने उम्मीद जताई कि जैसे ही जातीय जनगणना की रिपोर्ट आएगी, सरकार ओबीसी महिलाओं के अधिकारों को सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाएगी।
परिसीमन पर पुरानी मांग को दोहराया
उपेंद्र कुशवाहा ने केवल आरक्षण ही नहीं, बल्कि सीटों के सीमांकन यानी ‘डिलिमिटेशन’ के मुद्दे पर भी कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद यह प्रक्रिया हर 10 साल में होनी चाहिए थी, लेकिन आपातकाल (Emergency) के दौरान इसे दुर्भाग्यपूर्ण तरीके से रोक दिया गया।
उन्होंने मांग की कि देश की बढ़ती जनसंख्या के अनुसार लोकसभा और विधानसभा सीटों की संख्या में तत्काल बढ़ोतरी की जानी चाहिए, ताकि नागरिकों को उचित संवैधानिक प्रतिनिधित्व मिल सके।
बिहार की सीटों का गणित: 40 से 60 करने की मांग
उपेंद्र कुशवाहा ने बिहार के संदर्भ में एक बड़ा आंकड़ा पेश किया। उन्होंने कहा कि 2011 की जनगणना के आंकड़ों को देखें तो बिहार की आबादी में भारी इजाफा हुआ है। इस आधार पर राज्य का हक मारना गलत है।
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लोकसभा सीटें: उन्होंने दावा किया कि आबादी के हिसाब से बिहार में लोकसभा की सीटें 40 से बढ़ाकर 60 होनी चाहिए।
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विधानसभा सीटें: इसी तरह, विधानसभा की सीटें 243 से बढ़ाकर 365 की जा सकती थीं।
उन्होंने तर्क दिया कि यदि सीटों की संख्या बढ़ती, तो बिहार के अधिक युवाओं और नए चेहरों को राजनीति में आने और चुनाव लड़ने का अवसर मिलता। इससे न केवल राज्य का प्रतिनिधित्व मजबूत होता, बल्कि विकास की गति भी तेज होती।
विरोधियों पर निशाना और केंद्र का आभार
कुशवाहा ने सीधे तौर पर विपक्षी दलों पर इस प्रक्रिया में बाधा डालने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कुछ दल जानबूझकर महिला आरक्षण और सीटों की संख्या बढ़ाने के काम को रोकने की कोशिश कर रहे हैं, जो सीधे तौर पर बिहार के सम्मान और विकास से खिलवाड़ है।
हालांकि, उन्होंने प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने इस दिशा में सकारात्मक पहल की थी, लेकिन विपक्षी दलों के नकारात्मक रवैये के कारण प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ सका।
22 अप्रैल का ‘धिक्कार मार्च’: क्या है तैयारी?
राष्ट्रीय लोक मोर्चा इस मुद्दे को लेकर अब जन-जन तक जाने की तैयारी में है।
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उद्देश्य: जनता को उन चेहरों से वाकिफ कराना जिन्होंने बिहार के हक और महिलाओं के आरक्षण में रुकावट पैदा की है।
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स्थान: बिहार के सभी 38 जिलों के मुख्यालयों पर एक साथ विरोध प्रदर्शन होगा।
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संदेश: कुशवाहा ने कहा कि यह केवल एक राजनीतिक विरोध नहीं है, बल्कि यह बिहार के अस्तित्व और महिलाओं के आत्मसम्मान की लड़ाई है।