BNT Desk: बिहार में सरकारी सेवाओं में अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) की भागीदारी और उनके कल्याण को लेकर राज्य सरकार अब पूरी तरह ‘एक्शन मोड’ में है। बिहार विधानसभा की ‘अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण समिति’ ने भवन निर्माण विभाग से राज्यभर में खाली पड़े पदों और कार्यरत कर्मियों का विस्तृत ब्योरा तलब किया है।
समिति की इस सक्रियता के बाद भवन निर्माण विभाग ने अपने सभी अंचलों और अधीनस्थ प्रमंडलों को पत्र जारी कर तीन दिनों के भीतर आंकड़े उपलब्ध कराने का कड़ा निर्देश दिया है।
विधानसभा समिति की बैठक के बाद बड़ा फैसला
पिछले महीने बिहार विधानसभा की कल्याण समिति की एक अहम बैठक हुई थी। इस बैठक में राज्य के विभिन्न विभागों में आरक्षित वर्गों (SC/ST) की स्थिति की समीक्षा की गई। समिति ने पाया कि कई विभागों में स्वीकृत पदों के मुकाबले कार्यरत कर्मियों की संख्या कम है। इसी को ध्यान में रखते हुए समिति ने भवन निर्माण विभाग को निर्देश दिया कि वह राज्यभर में पदों की वर्तमान स्थिति और आवासीय विद्यालयों से संबंधित प्रगति रिपोर्ट पेश करे।
विभाग ने जारी किया फरमान: देना होगा कोटिवार डेटा
समिति के कड़े रुख को देखते हुए भवन निर्माण विभाग ने एक आधिकारिक पत्र जारी किया है। विभाग ने सभी संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि वे निम्नलिखित जानकारियां उपलब्ध कराएं:
-
स्वीकृत कार्यबल: विभाग में कुल कितने पद स्वीकृत हैं।
-
कार्यरत कर्मी: वर्तमान में कितने अधिकारी और कर्मचारी काम कर रहे हैं।
-
रिक्त पद: संवर्गवार (Cadre-wise) कितने पद खाली पड़े हैं।
विभाग ने विशेष रूप से यह निर्देश दिया है कि कार्यरत कर्मियों की संख्या कोटिवार (Category-wise) होनी चाहिए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि अनुसूचित जाति और जनजाति के कितने लोग वर्तमान में सेवा दे रहे हैं।
आवासीय विद्यालयों के निर्माण और मरम्मत की भी होगी जांच
सिर्फ नौकरियों का विवरण ही नहीं, बल्कि समिति ने विकास योजनाओं की भी जानकारी मांगी है। पिछले 5 वर्षों के दौरान विभिन्न जिलों में अनुसूचित जाति एवं जनजाति आवासीय विद्यालयों में जो भी काम हुए हैं, उनका लेखा-जोखा मांगा गया है।
-
नए भवन निर्माण का विवरण।
-
पुराने भवनों की मरम्मत (Renovation) से जुड़े आंकड़े। इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि इन वर्गों के बच्चों के लिए दी जाने वाली सुविधाओं का सही उपयोग हो रहा है या नहीं।
तीन दिनों की ‘डेडलाइन’ और सख्त निर्देश
भवन निर्माण विभाग ने समय की महत्ता को देखते हुए अधिकारियों को केवल 3 दिनों का समय दिया है। सभी अंचलों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने आंकड़े सामान्य, पिछड़ा वर्ग, अत्यंत पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के आधार पर अलग-अलग तैयार करें।
-
माध्यम: यह रिपोर्ट विभागीय ई-मेल या वॉट्सऐप ग्रुप के माध्यम से तत्काल भेजी जानी है। इन आंकड़ों को समेकित (Consolidate) करने के बाद बिहार विधानसभा सचिवालय को भेजा जाएगा, जहां इसे समिति के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।
रिक्तियां भरने की बढ़ी उम्मीद
इस कवायद को बिहार में आने वाली नई भर्तियों के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। यदि रिपोर्ट में बड़ी संख्या में रिक्तियां पाई जाती हैं, तो सरकार पर इन बैकलॉग पदों को भरने का दबाव बढ़ेगा। इससे राज्य के युवाओं, विशेषकर आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए सरकारी नौकरी के नए अवसर पैदा हो सकते हैं।