सीतामढ़ी सदर अस्पताल में अंधेरा, टॉर्च की रोशनी में हुआ इलाज

सीतामढ़ी सदर अस्पताल के 19 करोड़ रुपये से बने मॉडल भवन में गुरुवार सुबह करीब आधे घंटे तक बिजली गुल रही। इस दौरान डॉक्टरों को मोबाइल टॉर्च की रोशनी में मरीजों का इलाज करना पड़ा और रजिस्ट्रेशन व दवा वितरण भी प्रभावित हुआ। लिफ्ट बंद होने से गंभीर मरीजों को सीढ़ियों से ले जाना पड़ा। प्रबंधन ने चेंजर नहीं घुमाने को कारण बताया है।

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BNT Desk: सीतामढ़ी सदर अस्पताल के 19 करोड़ रुपये की लागत से बने मॉडल भवन में गुरुवार सुबह 10:10 बजे अचानक बिजली कट गई। करीब आधे घंटे तक आपूर्ति बहाल नहीं हो सकी। इस दौरान ओपीडी में मरीजों की लंबी कतार लगी रही और पूरे भवन में अफरातफरी का माहौल बन गया। हैरानी की बात यह रही कि जनरेटर और सोलर सिस्टम होने के बावजूद वैकल्पिक व्यवस्था समय पर चालू नहीं की जा सकी।

मोबाइल टॉर्च में जांच, रजिस्ट्रेशन भी बाधित

बिजली नहीं रहने के कारण डॉक्टरों को मोबाइल की टॉर्च जलाकर मरीजों की जांच करनी पड़ी। कई विभागों में अंधेरे के बीच इलाज चलता रहा। कंप्यूटर बंद होने से रजिस्ट्रेशन और दवा वितरण का काम भी रुक-रुक कर हुआ। मरीजों ने बताया कि सुबह से लाइन में खड़े रहने के बाद भी उन्हें काफी देर तक इंतजार करना पड़ा।

लिफ्ट बंद, गंभीर मरीजों को परेशानी

मॉडल भवन के पहले तल्ले पर एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड की सुविधा है। बिजली बाधित होने से लिफ्ट बंद हो गई। बुजुर्ग, गर्भवती महिलाओं और गंभीर मरीजों को सीढ़ियों के सहारे ऊपर ले जाना पड़ा। इससे मरीजों और उनके परिजनों में नाराजगी देखी गई।

प्रबंधन की सफाई, पहले भी हो चुका है मामला

बताया जा रहा है कि 22 दिसंबर 2025 को भी इसी तरह की समस्या हुई थी। अस्पताल के डीएस डॉ. मुकेश कुमार ने कहा कि चेंजर नहीं घुमाने के कारण दिक्कत हुई। हालांकि स्थानीय लोगों ने इसे लापरवाही बताते हुए व्यवस्था में सुधार की मांग की है।

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